दक्कन का समाज, व्यापार और संस्कृति
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II, Chapter 7
दक्कन का समाज, व्यापार और संस्कृति
विदेशी यात्री इस काल के दक्कन को समृद्ध, आबाद और भारी व्यापारिक बताते हैं। इसकी संपत्ति वस्त्र, लोहा, हीरे और युद्ध के घोड़ों के विशाल आयात पर टिकी थी, और इसकी संस्कृति ने तेलुगु, कन्नड़ तथा दक्खिनी लेखन का स्वर्ण युग दिया।
समाज
- समाज वर्ण व्यवस्था पर चलता था, पर सैन्य सेवा और व्यापार गतिशीलता देते थे, और नायक कई समुदायों से उठे।
- फर्नाओ नुनिज लिखता है कि महल में स्त्रियां लेखाकार, लेखिका, संगीतज्ञ, पहलवान और रक्षक के रूप में कार्यरत थीं, जो दिखाता है कि स्त्रियों के पास वेतनभोगी सार्वजनिक भूमिकाएं थीं।
- देवदासियां मंदिरों से जुड़ी थीं, और कुछ वर्गों में सती प्रथा का उल्लेख विदेशी प्रेक्षकों ने किया है।
- अब्दुर रज्जाक राजधानी के बाजारों को रत्नों से भरा, आबादी को बड़ी और बाजारों को व्यवस्थित बताता है, और कहता है कि इसके समान कहीं कुछ नहीं था।
- दासता मौजूद थी, और घरेलू दासों का उल्लेख अभिलेखों तथा यात्रा विवरणों में बार-बार मिलता है।
व्यापार और घोड़ों का प्रश्न
- दक्कन में युद्ध के घोड़ों के लिए अच्छी नस्ल भूमि नहीं थी, इसलिए विजयनगर और सल्तनतें दोनों अरब तथा फारस से बहुत ऊंचे दाम पर घोड़े मंगाती थीं।
- घोड़े पश्चिमी बंदरगाहों - भटकल, होनावर, मंगलौर और गोवा - से आते थे, और जो इन बंदरगाहों पर नियंत्रण रखता, वही दक्कन की घुड़सवार सेना पर नियंत्रण रखता था।
- वास्को द गामा के 1498 में कालीकट पहुंचने और पुर्तगालियों के 1510 में गोवा लेने के बाद उन्होंने घोड़ा व्यापार पर प्रभुत्व जमाया और उसे कूटनीतिक दबाव की तरह प्रयोग किया।
- कृष्णदेवराय ने पुर्तगालियों से बातचीत ठीक इसीलिए की कि घोड़ों की निरंतर आपूर्ति बनी रहे।
- अन्य निर्यात थे सूती वस्त्र, मसाले, लोहा और इस्पात, तथा गोलकुंडा के हीरे, जो उस समय बड़े हीरों का विश्व में एकमात्र ज्ञात स्रोत थे।
इस काल का मंदिर स्थापत्य
- विजयनगर मंदिर ने पुरानी द्रविड़ योजना में नई संरचनाएं जोड़ीं।
- रायगोपुरम् - विशाल प्रवेश द्वार शिखर, प्रायः गर्भगृह से ऊंचा, ताकि मंदिर दूर से दिखे।
- कल्याण मंडप - देवता के वार्षिक विवाह उत्सव के लिए मंडप।
- अम्मन मंदिर - उसी परिसर में देवी के लिए अलग गर्भगृह।
- उठे हुए याली, एक पौराणिक सिंहनुमा प्राणी, से तराशे मिश्रित स्तंभ इस शैली की पहचान बने।
| विशेषता | क्या है |
|---|---|
| रायगोपुरम् | ऊंचा प्रवेश द्वार शिखर |
| कल्याण मंडप | देवता के विवाह उत्सव का मंडप |
| अम्मन मंदिर | देवी के लिए अलग मंदिर |
| याली स्तंभ | उठे हुए पौराणिक प्राणी वाला मिश्रित स्तंभ |
साहित्य
- तेलुगु कृष्णदेवराय और अष्टदिग्गजों के समय स्वर्ण युग में पहुंचा; उसकी अपनी आमुक्तमाल्यद इसी उत्कर्ष का भाग है।
- कन्नड़ साहित्य फला-फूला, जिसमें कुमार व्यास ने महाभारत का पुनर्कथन किया।
- संस्कृत में सायण से जुड़ी वेद भाष्य परंपरा विजयनगर के संरक्षण में तैयार हुई।
- सल्तनतों में दरबारी भाषा फारसी थी, पर उर्दू का प्रारंभिक रूप दक्खिनी सबसे पहले यहीं विकसित हुआ; मुहम्मद कुली कुतुब शाह इसके प्रारंभिक कवि के रूप में याद किए जाते हैं।
- दक्कन की भक्ति परंपरा कर्नाटक के हरिदासों से चलती रही, जैसे पुरंदरदास, जिन्हें कर्नाटक संगीत का जनक माना जाता है।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि महल की स्त्रियों का वर्णन किस यात्री ने किया, गोवा कब लिया गया, और कल्याण मंडप क्या है। सुमेलित कीजिए में स्थापत्य विशेषता और उसका कार्य जुड़ता है। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि घोड़ा व्यापार राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण था।
UPSC / State PSC के लिए
अर्थव्यवस्था को राजनीति से जोड़िए - आयातित घुड़सवार सेना पर दक्कन की निर्भरता ने एक छोटी तटीय यूरोपीय शक्ति को अपने आकार से कहीं अधिक प्रभाव दे दिया, और यहीं से भारतीय राजनीति में यूरोपीय हस्तक्षेप शुरू होता है। नुनिज का कामकाजी स्त्रियों वाला प्रमाण मध्यकालीन परदे की इकहरी तस्वीर को सुधारता है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ रायगोपुरम् स्वयं गर्भगृह है | ✓ यह प्रवेश द्वार शिखर है, प्रायः गर्भगृह से ऊंचा
✗ पुर्तगालियों ने 1498 में गोवा लिया | ✓ 1498 में वास्को द गामा कालीकट पहुंचा; गोवा 1510 में लिया गया
✗ दक्खिनी फारसी की बोली है | ✓ दक्खिनी उर्दू का प्रारंभिक रूप है, जो दक्कन में विकसित हुआ
एक नजर में
- नुनिज ने महल में स्त्रियों को लेखाकार, लेखिका, संगीतज्ञ और रक्षक बताया।
- अब्दुर रज्जाक ने राजधानी के बाजार और समृद्धि का वर्णन किया।
- दक्कन अरब और फारस से भटकल, होनावर तथा गोवा होकर युद्ध के घोड़े मंगाता था।
- वास्को द गामा 1498 में कालीकट पहुंचा; पुर्तगालियों ने 1510 में गोवा लेकर घोड़ा व्यापार पकड़ा।
- मंदिर विशेषताएं - रायगोपुरम्, कल्याण मंडप, अम्मन मंदिर और याली स्तंभ।
- तेलुगु का स्वर्ण युग; कुमार व्यास से कन्नड़; सल्तनतों में दक्खिनी उर्दू की शुरुआत।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
