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मांग, पूर्ति और बाजार कीमत

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 11 • Statistics for Economics and Introductory Microeconomics • मांग और पूर्ति के अध्याय | NCERT कक्षा 12 • Introductory Microeconomics

मांग, पूर्ति और बाजार कीमत

मांग किसी वस्तु की वह मात्रा है जिसे क्रेता दी गई कीमत पर एक निश्चित अवधि में खरीदने को इच्छुक और सक्षम हों। पूर्ति वह मात्रा है जिसे विक्रेता उस कीमत पर देने को तैयार हों। जिस कीमत पर दोनों बराबर हों वह संतुलन कीमत है, और इसी प्रकार बाजार स्वयं कीमत तय करता है।

मांग और पूर्ति का नियम

  • मांग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर कीमत गिरने से मांगी गई मात्रा बढ़ती है और कीमत बढ़ने से घटती है।
  • इसलिए मांग वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर ढलता है।
  • मांग वस्तु की कीमत, क्रेता की आय, संबंधित वस्तुओं की कीमत, रुचि और अपेक्षाओं पर निर्भर है।
  • प्रतिस्थापन वस्तुएं जैसे चाय और कॉफी दूसरे की कीमत की दिशा में मांग बदलती हैं; पूरक वस्तुएं जैसे कार और पेट्रोल विपरीत दिशा में।
  • पूर्ति का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर कीमत बढ़ने से पूर्ति की मात्रा बढ़ती है।
  • इसलिए पूर्ति वक्र बाएं से दाएं ऊपर की ओर ढलता है।
  • पूर्ति कीमत, उत्पादन लागत, तकनीक, कर और विक्रेताओं की संख्या पर निर्भर है।

संतुलन और लोच

  • संतुलन वहां होता है जहां मांग वक्र और पूर्ति वक्र काटते हैं; वहां कीमत बदलने की प्रवृत्ति नहीं रहती।
  • कीमत संतुलन से ऊपर हो तो अधिशेष बनता है और विक्रेता कीमत घटाते हैं; नीचे हो तो कमी बनती है और कीमत चढ़ती है।
  • मांग की लोच मापती है कि कीमत बदलने पर मांगी गई मात्रा कितनी प्रबलता से प्रतिक्रिया करती है।
  • मांग लोचदार तब है जब छोटा कीमत परिवर्तन बड़ा मात्रा परिवर्तन लाए, जैसे विलासिता वस्तुओं में।
  • मांग बेलोचदार तब है जब मात्रा लगभग न बदले, जैसे नमक और अनिवार्य दवा में।
  • पूर्ति की भी लोच होती है, जो अल्पकाल में प्रायः कम और दीर्घकाल में अधिक रहती है।
  • सरकार कभी-कभी न्यूनतम या अधिकतम कीमत तय कर बाजार संतुलन में हस्तक्षेप करती है।
परिवर्तनमांग वक्र पर प्रभाव
क्रेता की आय बढ़नासामान्य वस्तु में वक्र दाएं खिसकता है
प्रतिस्थापन की कीमत बढ़नावक्र दाएं खिसकता है
पूरक की कीमत बढ़नावक्र बाएं खिसकता है
अपनी कीमत बदलनाउसी वक्र पर गति

संतुलन कीमत — वह कीमत जिस पर मांगी गई मात्रा और पूर्ति की मात्रा बराबर हो जाती हैं।

Exam me kaise aata hai

  • मांग वक्र किस दिशा में ढलता है — बाएं से दाएं नीचे
  • मांग और पूर्ति बराबर होने की कीमत — संतुलन कीमत
  • चाय और कॉफी क्या हैं — प्रतिस्थापन वस्तुएं
  • नमक की मांग कैसी है — बेलोचदार

UPSC/State PSC ke liye

  • वस्तु की अपनी कीमत बदलने पर वक्र पर गति होती है, जबकि किसी अन्य निर्धारक के बदलने पर पूरा वक्र खिसक जाता है।
  • कर नीति में लोच महत्वपूर्ण है, क्योंकि बेलोचदार वस्तु पर कर राजस्व बढ़ाता है और खपत बहुत कम घटाता है।

Yahan confuse hote hain

पूर्ति वक्र नीचे की ओर ढलता है | पूर्ति वक्र ऊपर की ओर ढलता है  |  

आय बढ़ने से मांग वक्र पर गति होती है | इससे पूरा मांग वक्र खिसकता है  |  

सभी वस्तुओं की मांग लोचदार होती है | नमक जैसी अनिवार्य वस्तुओं की मांग बेलोचदार है  |  

Ek nazar me

  • मांग का नियम: कीमत बढ़े, मांगी मात्रा घटे।
  • पूर्ति का नियम: कीमत बढ़े, पूर्ति मात्रा बढ़े।
  • संतुलन वहां जहां दोनों वक्र काटते हैं।
  • लोचदार मांग कीमत पर तेज प्रतिक्रिया देती है; बेलोचदार लगभग नहीं।

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