पूर्व वैदिक काल: समाज और राजनीति
NCERT Class 6 - Our Pasts I • NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I
पूर्व वैदिक काल: समाज और राजनीति
पूर्व वैदिक या ऋग्वैदिक काल, लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व, केवल ऋग्वेद से जाना जाता है। समाज कबीलाई और पशुपालक था, संपत्ति गायों में गिनी जाती थी, और सरदार स्थायी नौकरशाही के बजाय कबीलाई सभाओं की मदद से शासन करता था।
भूगोल
- ऋग्वैदिक लोग सप्त सिंधु में रहते थे - सात नदियों का क्षेत्र, जिसमें पूर्वी अफगानिस्तान, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किनारा आता है।
- सिंधु सबसे अधिक बार उल्लिखित नदी है; सरस्वती को नदीतमा, यानी नदियों में श्रेष्ठ कहा गया है।
- गंगा का उल्लेख केवल एक बार और यमुना का तीन बार है, जिससे पता चलता है कि पूर्वी मैदान तब भी मुख्य क्षेत्र से बाहर था।
- न नगर थे न लेखन; बस्तियां अस्थायी और लकड़ी-सरकंडे की थीं।
राजनीतिक संगठन
- इकाई जन यानी कबीला था, जिसका नेतृत्व राजन करता था, जो युद्ध नेता था, भू-क्षेत्र का राजा नहीं।
- सभाएं उसकी शक्ति पर अंकुश रखती थीं - सभा (बुजुर्गों की छोटी संस्था), समिति (बड़ी आम सभा), विदथ (सबसे प्राचीन सभा, वितरण का काम भी) और गण।
- मुख्य पदाधिकारी पुरोहित, सेनानी और ग्रामणी थे, पर न नियमित कर था, न स्थायी सेना।
- बलि सरदार को दी जाने वाली स्वैच्छिक भेंट थी, अनिवार्य कर नहीं।
- दस राजाओं का युद्ध (दाशराज्ञ) परुष्णी (रावी) नदी पर लड़ा गया, जिसमें भरत कबीले के सुदास ने दस कबीलों के संघ को हराया।
अर्थव्यवस्था और समाज
- अर्थव्यवस्था मुख्यतः पशुपालक थी; गाय संपत्ति की मुख्य माप थी, और गविष्टि शब्द, जिसका शाब्दिक अर्थ "गायों की खोज" है, युद्ध का पर्याय बन गया।
- खेती थी पर गौण; मुख्य अनाज जौ (यव) था।
- समाज कुल, ग्राम और विश पर आधारित था; परिवार पितृसत्तात्मक था पर कठोर स्तरीकृत नहीं।
- वर्ण विभाजन तब वंशानुगत और कठोर नहीं था। चार वर्णों का वर्णन करने वाला पुरुष सूक्त मंडल 10 में है, जो ऋग्वेद में बाद का जोड़ है।
- स्त्रियां सभाओं में जाती थीं, शिक्षा पाती थीं और सूक्त रचती थीं - अपाला, घोषा, लोपामुद्रा और विश्ववारा के नाम मिलते हैं। बाल विवाह और सती अनुपस्थित हैं।
| विशेषता | पूर्व वैदिक स्थिति |
|---|---|
| मुख्य स्रोत | ऋग्वेद |
| अर्थव्यवस्था | पशुपालक, गाय केंद्रित |
| राजनीतिक इकाई | जन (कबीला), नेतृत्व राजन |
| सभाएं | सभा, समिति, विदथ, गण |
| कर व्यवस्था | बलि, स्वैच्छिक |
| वर्ण | लचीला, वंशानुगत नहीं |
धर्म
- पूजा प्राकृतिक शक्तियों की होती थी, यज्ञ और अग्नि के माध्यम से; न मंदिर थे न मूर्ति पूजा।
- इंद्र सबसे अधिक आह्वान किए गए देवता हैं, जिन्हें पुरंदर यानी किलों को तोड़ने वाला कहा गया; लगभग 250 सूक्त इन्हें समर्पित हैं।
- अग्नि दूसरे स्थान पर हैं, जो देवताओं और मनुष्यों के बीच संदेशवाहक हैं; वरुण ऋत यानी ब्रह्मांडीय और नैतिक व्यवस्था के रक्षक हैं।
- अन्य देवता - सोम (पूरा मंडल 9), सूर्य, उषा, वायु, यम और अदिति।
- इस चरण में यज्ञ सरल थे, न विस्तृत कर्मकांड था न भारी दक्षिणा।
परीक्षा में कैसे आता है
अधिकांश प्रश्न तथ्यात्मक होते हैं - कौन सी नदी सबसे अधिक बार आई, किस देवता के सबसे अधिक सूक्त हैं, गविष्टि का अर्थ क्या है। सुमेलित कीजिए में सभाएं और पदाधिकारी जोड़े जाते हैं। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि ऋग्वैदिक काल में वर्ण कठोर था या नहीं और गंगा ज्ञात थी या नहीं।
UPSC / State PSC के लिए
याद रखें कि ऋग्वैदिक व्यवस्था को कुल या सरदारी व्यवस्था कहा जाता है, राज्य नहीं - क्षेत्र आधारित कर नहीं, दमनकारी तंत्र नहीं, लिखित विधि नहीं। पुरुष सूक्त का बाद के मंडल 10 में होना ही वह प्रमाण है जिससे कहा जाता है कि वर्ण पदानुक्रम बाद में आया।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ सरस्वती सबसे अधिक उल्लिखित ऋग्वैदिक नदी है | ✓ सिंधु सबसे अधिक उल्लिखित है; सरस्वती को नदीतमा कहा गया
✗ वरुण युद्ध के देवता हैं | ✓ इंद्र युद्ध के देवता हैं; वरुण ऋत के रक्षक हैं
✗ बलि अनिवार्य भूमि कर था | ✓ बलि सरदार को दी गई स्वैच्छिक भेंट थी
एक नजर में
- पूर्व वैदिक काल लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व, स्रोत केवल ऋग्वेद।
- निवास सप्त सिंधु; सिंधु सर्वाधिक उल्लिखित, सरस्वती नदीतमा, गंगा केवल एक बार।
- जन का नेतृत्व राजन; सभा, समिति, विदथ और गण उसकी शक्ति पर अंकुश।
- पशुपालक अर्थव्यवस्था; गाय संपत्ति; गविष्टि का अर्थ युद्ध; बलि स्वैच्छिक।
- सर्वाधिक सूक्त इंद्र के, फिर अग्नि के; वरुण ऋत के रक्षक; मंडल 9 सोम को समर्पित।
- वर्ण लचीला; स्त्रियां सूक्त रचती थीं; पुरुष सूक्त बाद के मंडल 10 में है।
