भूकंप और ज्वालामुखी
NCERT Class 11 - Fundamentals of Physical Geography, Chapters 3 and 6
भूकंप और ज्वालामुखी
भूकंप और ज्वालामुखी आकस्मिक आंतरिक प्रक्रियाएं हैं - ये पृथ्वी के भीतर की ऊर्जा को लाखों वर्षों में नहीं, मिनटों में मुक्त करती हैं। दोनों प्लेट सीमाओं पर केंद्रित हैं, इसीलिए इनका विश्व मानचित्र प्लेट मानचित्र से मेल खाता है।
भूकंप
- भूकंप पृथ्वी का वह कंपन है जो भ्रंश के साथ ऊर्जा मुक्त होने से आता है और भूकंपीय तरंगों के रूप में बाहर फैलता है।
- पृथ्वी के भीतर उद्गम बिंदु उद्गम केंद्र (focus) कहलाता है; ठीक उसके ऊपर सतह का बिंदु अधिकेंद्र (epicentre) होता है, जहां क्षति सामान्यतः सबसे अधिक होती है।
- प्रकार - विवर्तनिक, जो भ्रंश पर हलचल से आते हैं और सबसे आम हैं; ज्वालामुखीय, जो उद्गार से जुड़े हैं; निपात, जो खनन क्षेत्रों में; विस्फोट, जो परमाणु या रासायनिक विस्फोट से; और जलाशय जनित, जो बड़े बांध के पीछे जल के भार से।
- मापन - रिक्टर पैमाना मुक्त ऊर्जा यानी परिमाण मापता है, और यह लघुगणकीय है जिसमें हर पूर्णांक लगभग बत्तीस गुना अधिक ऊर्जा दिखाता है; मर्केली पैमाना दिखाई देने वाली क्षति यानी तीव्रता को I से XII तक मापता है।
- प्रभावों में भूमि कंपन, ढीली संतृप्त मिट्टी का द्रवीकरण, भूस्खलन, आग, बांधों को क्षति, और समुद्र तल खिसकने पर सुनामी शामिल हैं।
भारत के भूकंप क्षेत्र
- भारत चार भूकंपीय क्षेत्रों में बंटा है, सबसे कम जोखिम वाले क्षेत्र 2 से सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र 5 तक।
- क्षेत्र 5 में पूरा पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के भाग, कच्छ का रण, तथा अंडमान-निकोबार द्वीप आते हैं।
- हिमालयी पेटी अत्यधिक सक्रिय है क्योंकि भारतीय प्लेट अब भी यूरेशियाई प्लेट को धकेल रही है।
- बिहार मुख्यतः उच्च जोखिम क्षेत्रों में आता है; 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप भारतीय अभिलेखों के सबसे विनाशकारी भूकंपों में है, और इसी पेटी में 1988 में भी बड़ा भूकंप आया।
ज्वालामुखी
| प्रकार | स्वरूप |
|---|---|
| ढाल ज्वालामुखी | चौड़ा और मंद ढाल वाला, तरल बेसाल्टी लावा से; हवाई के ज्वालामुखी |
| मिश्रित या शंकु ज्वालामुखी | गाढ़े लावा से लावा और राख की परतों वाला तीखा शंकु; फूजीयामा |
| काल्डेरा | तब बना बड़ा गर्त जब ज्वालामुखी अपने खाली कक्ष में धंस जाता है |
| बाढ़ी बेसाल्ट प्रदेश | बड़े क्षेत्रों को ढकने वाली लावा की विशाल चादरें; भारत का दक्कन ट्रैप |
| मध्य महासागरीय कटक ज्वालामुखी | कटक पर निरंतर उद्गार, जिससे नया महासागरीय तल बनता है |
- ज्वालामुखी सक्रिय, प्रसुप्त या शांत वर्ग में रखे जाते हैं। भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी अंडमान सागर के बैरन द्वीप पर है।
- दक्कन ट्रैप बाढ़ी बेसाल्ट उद्गारों से बना और यही पश्चिमी तथा मध्य भारत की काली मिट्टी का स्रोत है।
- विश्व के अधिकांश ज्वालामुखी धंसाव सीमाओं वाले प्रशांत अग्नि वलय में, मध्य महासागरीय कटकों पर, और पूर्वी अफ्रीकी दरार जैसी दरार घाटियों में हैं।
अंतर्वेधी ज्वालामुखी आकृतियां
- बाथोलिथ - भूपर्पटी में गहराई पर ठंडे मैग्मा का विशाल पिंड, जो कई पर्वत शृंखलाओं का केंद्र बनता है।
- लैकोलिथ - गुंबदाकार अंतर्वेधन, जिसका आधार सपाट होता है और नीचे नली से जुड़ा रहता है।
- लोपोलिथ - तश्तरीनुमा अंतर्वेधन, जो बीच में धंसा होता है।
- फैकोलिथ - मोड़ के शीर्ष या गर्त में जमा मैग्मा।
- सिल - चट्टानी परतों के समानांतर फैली मैग्मा की चादर; डाइक वह चादर है जो परतों को काटती हुई जाती है।
- बहिर्वेधी रूपों में लावा पठार, सिंडर शंकु, और आसपास का शंकु कट जाने पर बचे ज्वालामुखी ग्रीवा आते हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र का अंतर, रिक्टर तथा मर्केली क्या मापते हैं, और भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहां है, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में अंतर्वेधी आकृति और उसका आकार, तथा ज्वालामुखी प्रकार और उदाहरण जुड़ते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
परिमाण और तीव्रता का अंतर सावधानी से रखिए - परिमाण घटना का एक ही मान है, जबकि तीव्रता दूरी और भूमि की दशा के अनुसार स्थान-स्थान पर बदलती है। ज्वालामुखी पर लिखिए कि आकार लावा की श्यानता तय करती है - तरल बेसाल्टी लावा फैलकर ढाल बनाता है, गाढ़ा लावा जमकर तीखा शंकु।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ रिक्टर पैमाना हुई क्षति मापता है | ✓ वह परिमाण मापता है; क्षति मर्केली पैमाना मापता है
✗ उद्गम केंद्र सतह पर ऊपर का बिंदु है | ✓ वह अधिकेंद्र है; उद्गम केंद्र पृथ्वी के भीतर होता है
✗ डाइक चट्टानी परतों के समानांतर होता है | ✓ सिल समानांतर होता है; डाइक उन्हें काटता है
एक नजर में
- उद्गम केंद्र पृथ्वी के भीतर; अधिकेंद्र ठीक उसके ऊपर सतह पर।
- प्रकार - विवर्तनिक, ज्वालामुखीय, निपात, विस्फोट और जलाशय जनित।
- रिक्टर पैमाना लघुगणकीय रूप से परिमाण; मर्केली क्षति की तीव्रता मापता है।
- भारत में चार भूकंपीय क्षेत्र, क्षेत्र 2 से सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्र 5 तक।
- ज्वालामुखी प्रकार - ढाल, मिश्रित, काल्डेरा, बाढ़ी बेसाल्ट और कटक ज्वालामुखी।
- बैरन द्वीप पर भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी; दक्कन ट्रैप बाढ़ी बेसाल्ट है।
- सिल चट्टानी परतों के समानांतर और डाइक उन्हें काटता हुआ होता है।
