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सुधारों के प्रभाव

Effects of the Reforms

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NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Liberalisation Privatisation and Globalisation"

सुधारों के प्रभाव

1991 के सुधारों ने भारतीय आर्थिक नीति की दिशा बदल दी। इनका मूल्यांकन भिन्न-भिन्न है, क्योंकि उन्हीं परिवर्तनों ने वृद्धि और बाह्य सुदृढ़ता में स्पष्ट बढ़ोतरी दी जबकि कई संरचनात्मक समस्याएं अछूती छोड़ दीं। दोनों पक्षों को साथ पढ़ना आवश्यक है।

सुधारों ने क्या दिया

  • पिछले दशकों की तुलना में आर्थिक वृद्धि की दर बढ़ी।
  • विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से सुधरा और भुगतान संकट समाप्त हुआ।
  • मुद्रास्फीति संकट वर्षों की तुलना में बेहतर नियंत्रण में आई।
  • सेवा क्षेत्र, विशेषकर सॉफ्टवेयर, दूरसंचार और वित्त, बहुत तेजी से बढ़ा और बड़ा निर्यात अर्जक बना।
  • उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वस्तुओं और सेवाओं का कहीं व्यापक चयन मिला।
  • प्रतिस्पर्धा में भारतीय फर्में अधिक कुशल बनीं और कुछ वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी हुईं।
  • विदेशी निवेश और तकनीक आई, जिससे कई उद्योगों में उत्पादकता बढ़ी।
  • भारत को आउटसोर्सिंग तेजी से बढ़ी, जिससे तकनीक और व्यावसायिक सेवाओं में ऊंचे वेतन के नगरीय रोजगार बने।

आलोचनाएं और बनी हुई समस्याएं

  • कृषि को तुलनीय ध्यान नहीं मिला, और उसमें सार्वजनिक निवेश धीमा पड़ा।
  • वृद्धि विनिर्माण के बजाय सेवाओं से चली, इसलिए श्रमिकों का कृषि से बाहर जाना सीमित रहा।
  • रोजगार उत्पादन के अनुपात में नहीं बढ़ा, जिस स्थिति को रोजगारविहीन वृद्धि कहा जाता है।
  • क्षेत्रों के बीच तथा कुशल और अकुशल श्रमिकों के बीच असमानता चौड़ी हुई।
  • छोटे उत्पादकों को आयात और बड़ी फर्मों से प्रतिस्पर्धा मिली, पर उसके अनुरूप सहायता नहीं।
  • विनिवेश से मिली राशि कभी-कभी संपत्ति बनाने के बजाय घाटा भरने में लगाई गई।
  • सुधार के प्रारंभिक वर्षों में स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय वृद्धि के अनुपात में नहीं बढ़ा।
  • अस्थिर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश ने अर्थव्यवस्था को वैश्विक धारणा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया।
  • श्रमशक्ति का बड़ा भाग बिना सामाजिक सुरक्षा के असंगठित क्षेत्रक में बना रहा।
  • इसलिए सुधार जारी है, और अब ध्यान विनिर्माण, कौशल तथा सामाजिक सुरक्षा पर है।
क्षेत्रसुधार के बाद परिणाम
वृद्धिपिछले दशकों से ऊंची
भंडार और मुद्रास्फीतिबहुत सुधरे
सेवाएंबहुत तेज वृद्धि, निर्यात अर्जक
कृषि और रोजगारपीछे रह गए

रोजगारविहीन वृद्धि — वह स्थिति जिसमें उत्पादन बढ़ता है पर उसके अनुपात में रोजगार नहीं बढ़ता।

Exam me kaise aata hai

  • रोजगार बढ़े बिना उत्पादन बढ़ना कहलाता है — रोजगारविहीन वृद्धि
  • सुधारों के बाद सबसे तेज कौन सा क्षेत्र बढ़ा — सेवा क्षेत्र
  • 1991 के बाद किस क्षेत्र की उपेक्षा कही जाती है — कृषि
  • सुधार के बाद विदेशी मुद्रा भंडार — तेजी से बढ़ा

UPSC/State PSC ke liye

  • सेवा प्रधान वृद्धि भारत जैसी आय वाले देश के लिए असामान्य है, क्योंकि मानक मार्ग कृषि से विनिर्माण और फिर सेवाओं तक जाता है।
  • सुधार ने कार्यकुशलता बढ़ाई, पर कुशलता का लाभ श्रमिकों तक तभी पहुंचता है जब साथ में रोजगार और कौशल भी बढ़ें, इसीलिए वितरण का प्रश्न खुला रहा।

Yahan confuse hote hain

✗ सुधार पूरी तरह विफल रहे | वृद्धि, भंडार और सेवाओं में स्पष्ट सुधार हुआ  |  ✓

✗ सुधारों ने बेरोजगारी हल कर दी | रोजगार उत्पादन वृद्धि से पीछे रहा  |  ✓

✗ सुधार के बाद वृद्धि विनिर्माण से चली | वह सेवाओं से चली  |  ✓

Ek nazar me

  • सुधार के बाद वृद्धि, भंडार, मुद्रास्फीति नियंत्रण और सेवाएं सुधरीं।
  • उपभोक्ताओं को चयन और फर्मों को कार्यकुशलता मिली।
  • कृषि और विनिर्माण रोजगार पीछे रह गए।
  • रोजगारविहीन वृद्धि और बढ़ती असमानता मुख्य आलोचनाएं हैं।

Ab practice karein

1991 ke reforms se har exam me questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se apni taiyari abhi jaanchein.

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