ऊर्जा एक बुनियादी ढांचा
NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Infrastructure"
ऊर्जा एक बुनियादी ढांचा
ऊर्जा आर्थिक बुनियादी ढांचे का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि हर दूसरी गतिविधि इस पर निर्भर है, कृषि और कारखानों से लेकर परिवहन, घरों और अस्पतालों तक। किसी देश का प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपयोग प्रायः उसके विकास स्तर का व्यापक संकेतक माना जाता है।
ऊर्जा के प्रकार और स्रोत
- वाणिज्यिक ऊर्जा बाजार में खरीदी-बेची जाती है: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और विद्युत।
- गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा खरीदी नहीं बल्कि एकत्र की जाती है: ईंधन लकड़ी, कृषि अपशिष्ट और सूखा गोबर, जो मुख्यतः ग्रामीण घरों में काम आती है।
- परंपरागत स्रोत कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जल विद्युत हैं।
- गैर-परंपरागत स्रोत सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और बायोगैस हैं, जो नवीकरणीय और अधिक स्वच्छ हैं।
- विद्युत मुख्यतः तापीय संयंत्रों में बनती है, साथ में जल, नाभिकीय तथा नवीकरणीय का बढ़ता हिस्सा है।
- ऊर्जा उपभोग परिवहन, कृषि, उद्योग, घरेलू और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बंटा है।
विद्युत क्षेत्र की चुनौतियां
- स्थापित क्षमता बढ़ी है पर अधिक मांग के समय अब भी शिखर कमी दिखती है।
- पारेषण और वितरण हानि ऊंची है, जिसमें तकनीकी हानि और चोरी दोनों आते हैं।
- कई वितरण कंपनियां हानि में हैं, जिससे नेटवर्क में निवेश की उनकी क्षमता सीमित हो जाती है।
- तापीय संयंत्र कोयला आपूर्ति पर निर्भर हैं, इसलिए खनन या परिवहन में बाधा विद्युत को सीधे प्रभावित करती है।
- यदि बिजली को ग्रामीण जीवन बदलना है तो घरों को केवल कनेक्शन नहीं, विश्वसनीय आपूर्ति चाहिए।
- दीर्घकालिक दिशा नवीकरणीय का हिस्सा बढ़ाना, दक्षता सुधारना और ग्रिड मजबूत करना है।
- बेहतर उपकरण और औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसी ऊर्जा दक्षता कम लागत पर प्रभावी रूप से क्षमता जोड़ती है।
- ग्रामीण घरों में स्वच्छ रसोई ईंधन भीतरी धुआं घटाता है और महिलाओं का ईंधन जुटाने का समय बचाता है।
- आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता अर्थव्यवस्था को विश्व कीमत आघातों के प्रति संवेदनशील बनाती है।
| श्रेणी | उदाहरण | कहां प्रयुक्त |
|---|---|---|
| वाणिज्यिक ऊर्जा | कोयला, पेट्रोलियम, विद्युत | उद्योग, परिवहन, घर |
| गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा | लकड़ी, गोबर, कृषि अपशिष्ट | मुख्यतः ग्रामीण घर |
| परंपरागत | कोयला, तेल, गैस, जल विद्युत | वर्तमान आपूर्ति का बड़ा भाग |
| गैर-परंपरागत | सौर, पवन, बायोगैस | बढ़ता हिस्सा, अधिक स्वच्छ |
गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा — ईंधन लकड़ी और गोबर जैसे ऊर्जा स्रोत, जो बाजार से खरीदे नहीं बल्कि एकत्र किए जाते हैं।
Exam me kaise aata hai
- लकड़ी और गोबर किसके उदाहरण हैं — गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा
- भारत में अधिकांश विद्युत कहां बनती है — तापीय संयंत्रों में
- उत्पादन और उपभोक्ता के बीच विद्युत हानि कहलाती है — पारेषण और वितरण हानि
- सौर और पवन क्या हैं — गैर-परंपरागत स्रोत
UPSC/State PSC ke liye
- ऊंची वितरण हानि एक चक्र बनाती है: हानि कंपनी का वित्त कमजोर करती है, कमजोर वित्त नेटवर्क में निवेश रोकता है, और कमजोर नेटवर्क और हानि देता है।
- कनेक्शन से अधिक विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है, क्योंकि अविश्वसनीय आपूर्ति घरों और फर्मों को महंगे वैकल्पिक प्रबंध रखने को विवश करती है।
Yahan confuse hote hain
✗ गैर-वाणिज्यिक ऊर्जा महत्वहीन है | यह अब भी ग्रामीण घरेलू ऊर्जा आवश्यकता का बड़ा भाग पूरा करती है | ✓
✗ जल विद्युत गैर-परंपरागत स्रोत है | जल विद्युत नवीकरणीय होते हुए भी परंपरागत है | ✓
✗ अधिक स्थापित क्षमता से कमी अपने आप समाप्त हो जाती है | वास्तविक उपलब्धता पारेषण, वितरण और ईंधन आपूर्ति भी तय करते हैं | ✓
Ek nazar me
- वाणिज्यिक ऊर्जा खरीदी जाती है; गैर-वाणिज्यिक एकत्र की जाती है।
- परंपरागत स्रोत अब भी प्रमुख; नवीकरणीय बढ़ रहे हैं।
- तापीय विद्युत अग्रणी, साथ में जल और नाभिकीय।
- मुख्य चुनौतियां: शिखर कमी, वितरण हानि और कंपनियों का वित्त।
