पर्यावरण कानून और संस्थाएं
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues" | NCERT कक्षा 11 • Political Science • पर्यावरण संबंधी अध्याय
पर्यावरण कानून और संस्थाएं
प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल सद्भावना पर्याप्त नहीं, क्योंकि प्रदूषण की लागत समाज उठाता है जबकि बचत प्रदूषक के पास जाती है। इसीलिए भारत में ऐसे कानून हैं जो मानक बाध्यकारी बनाते हैं, और ऐसी संस्थाएं हैं जिनका काम मापना, प्रवर्तन और अभियोजन है।
प्रमुख कानून
- जल अधिनियम 1974 पहला बड़ा प्रदूषण कानून था और उसी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाए।
- वायु अधिनियम 1981 ने वही ढांचा वायु प्रदूषण तक बढ़ाया और बोर्डों को औद्योगिक उत्सर्जन पर अधिकार दिए।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 वह छत्र कानून है जो वायु, जल, भूमि और सभी जीवों को समेटता है।
- यह भोपाल गैस त्रासदी के बाद बना, जिसने स्पष्ट कर दिया था कि पहले का ढांचा कितना कमजोर था।
- वन संरक्षण अधिनियम 1980 वन भूमि के परिवर्तन को रोकता है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 प्रजातियों तथा आवासों की रक्षा करता है।
- जैव विविधता अधिनियम 2002 जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच को नियंत्रित करता है।
- प्लास्टिक अपशिष्ट, ई-अपशिष्ट, संकटमय अपशिष्ट और जैव चिकित्सा अपशिष्ट के नियम 1986 के छत्र अधिनियम के अधीन चलते हैं।
संस्थाएं और प्रक्रियाएं
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मानक तय करता और समन्वय करता है, जबकि राज्य बोर्ड सहमति देते, निरीक्षण करते और स्थानीय स्तर पर प्रवर्तन करते हैं।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन आवश्यक करता है कि किसी बड़ी परियोजना के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन स्वीकृति से पहले हो।
- इस आकलन में जन सुनवाई होती है, ताकि प्रभावित होने वाले लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण मामलों के शीघ्र निपटान के लिए बनी विशेष संस्था है।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत प्रदूषण की लागत उसी पर डालता है जो उसे पैदा करता है।
- एहतियाती सिद्धांत कहता है कि पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता का अभाव किसी गंभीर संकट पर कार्रवाई टालने का कारण नहीं है।
- प्रवर्तन निगरानी क्षमता पर निर्भर है, इसलिए वास्तविक समय मापन और आंकड़ों का सार्वजनिक प्रकटीकरण कानून जितने ही महत्वपूर्ण हैं।
| कानून | वर्ष | क्या समेटता है |
|---|---|---|
| जल अधिनियम | 1974 | जल प्रदूषण, बोर्डों का गठन |
| वायु अधिनियम | 1981 | वायु प्रदूषण और उत्सर्जन |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 | वन भूमि का परिवर्तन |
| पर्यावरण संरक्षण अधिनियम | 1986 | पर्यावरण का छत्र कानून |
प्रदूषक भुगतान सिद्धांत — वह सिद्धांत कि प्रदूषण और उसके निवारण की लागत वही पक्ष उठाए जो उसे उत्पन्न करता है।
Exam me kaise aata hai
- जल अधिनियम कब पारित हुआ — 1974
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ — 1986
- परियोजना के संभावित प्रभावों का पूर्व मूल्यांकन — पर्यावरण प्रभाव आकलन
- पर्यावरण मामलों की विशेष संस्था — राष्ट्रीय हरित अधिकरण
UPSC/State PSC ke liye
- जन सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है कि किसी परियोजना की लागत उठाने वाले प्रायः वही नहीं होते जिन्हें लाभ मिलता है, और यही असंतुलन सुनवाई में दर्ज होता है।
- एहतियाती सिद्धांत भार पलट देता है: प्रस्तावक को दिखाना पड़ता है कि गतिविधि सुरक्षित है, न कि आपत्तिकर्ता को यह सिद्ध करना पड़े कि वह हानिकारक है।
Yahan confuse hote hain
✗ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम जल अधिनियम से पहले आया | जल अधिनियम 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 में आया | ✓
✗ पर्यावरण प्रभाव आकलन परियोजना शुरू होने के बाद होता है | यह स्वीकृति से पहले होता है | ✓
✗ हरित अधिकरण पर्यावरण कानून बनाता है | वह मामले तय करता है; कानून विधायिका बनाती है | ✓
Ek nazar me
- जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 मूल आधार हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मानक तय करते, निरीक्षण और प्रवर्तन करते हैं।
- बड़ी परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले जन सुनवाई सहित पर्यावरण प्रभाव आकलन होता है।
- प्रदूषक भुगतान और एहतियाती सिद्धांत पर्यावरणीय निर्णयों को दिशा देते हैं।
Ab practice karein
Pollution aur environmental laws se har exam me date based questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi jaanchein.
