Study Material

Pick a study material, then a subject, then start reading.

भारत में पर्यावरण आंदोलन

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 12 • Political Science • अध्याय "Environment and Natural Resources" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Management of Natural Resources"

भारत में पर्यावरण आंदोलन

भारत के पर्यावरण आंदोलन कार्यालयों या प्रयोगशालाओं से नहीं शुरू हुए। वे उन समुदायों से शुरू हुए जिनकी भूमि, वन और जल कहीं और बनी परियोजनाओं के लिए ली जा रही थी, और उनका केंद्रीय तर्क सदैव यही रहा कि जो लागत उठाते हैं उन्हें निर्णय में स्वर मिलना चाहिए।

प्रमुख आंदोलन

  • चिपको आंदोलन उत्तराखंड की पहाड़ियों में शुरू हुआ, जहां ग्रामीणों ने, जिनमें अनेक महिलाएं थीं, व्यावसायिक कटाई रोकने के लिए वृक्षों से लिपटकर विरोध किया।
  • इसकी मांग थी कि वन संसाधनों पर पहला अधिकार दूर बैठे ठेकेदारों का नहीं, स्थानीय लोगों का हो।
  • इसने संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में कटाई पर रोक लगवाई और अन्यत्र भी वैसी ही कार्रवाई को प्रेरित किया।
  • कर्नाटक का अप्पिको आंदोलन वही विचार पश्चिमी घाट तक ले गया।
  • केरल के साइलेंट वैली अभियान ने दुर्लभ उष्णकटिबंधीय वर्षा वन में एक जल विद्युत परियोजना रुकवाई, और वह क्षेत्र बाद में राष्ट्रीय उद्यान घोषित हुआ।
  • नर्मदा बचाओ आंदोलन ने बड़े बांधों में डूबने वाले लोगों के विस्थापन और पुनर्वास का प्रश्न उठाया।
  • राजस्थान की बिश्नोई परंपरा इस पंक्ति में सबसे पुरानी है, जो सदियों से धार्मिक आधार पर वृक्षों और काले हिरण की रक्षा करती आई है।

उन्होंने क्या बदला

  • उन्होंने स्थापित किया कि विकास परियोजनाओं को विस्थापित होने वालों का हिसाब रखना होगा, उन्हें आनुषंगिक लागत नहीं माना जा सकता।
  • उन्होंने पुनर्वास और पुनर्स्थापन के विचार को दान पर छोड़ने के बजाय नियोजन प्रक्रिया में लाया।
  • उन्होंने जन सुनवाई और पर्यावरण प्रभाव आकलन को बड़ी परियोजनाओं के लिए अनिवार्य बनाया।
  • उन्होंने दिखाया कि महिलाएं प्रायः सबसे पहले आगे आती हैं, क्योंकि ईंधन, चारा और जल लाने का दैनिक भार वही उठाती हैं।
  • उन्होंने अहिंसक तरीकों की शक्ति दिखाई: धरना, वृक्षों से लिपटना, पदयात्रा और न्यायालय जाना।
  • उन्होंने पर्यावरण को जीविका से जोड़ा, यह तर्क देकर कि निर्धनों के लिए पर्यावरण विलासिता नहीं बल्कि रोजी का स्रोत है।
  • उनके तर्क अब कानून, न्यायालय के निर्णयों और परियोजना स्वीकृति की मानक प्रक्रिया में दिखाई देते हैं।
आंदोलनक्षेत्रकेंद्रीय मांग
चिपकोउत्तराखंड की पहाड़ियांवन पर स्थानीय अधिकार, कटाई रोक
अप्पिकोकर्नाटक, पश्चिमी घाटव्यावसायिक कटाई से वन की रक्षा
साइलेंट वैलीकेरलबांध से वर्षा वन बचाना
नर्मदा बचाओ आंदोलननर्मदा घाटीविस्थापितों का पुनर्वास

चिपको आंदोलन — वह आंदोलन जिसमें ग्रामीण वृक्षों से लिपटकर उनकी व्यावसायिक कटाई रोकते थे और वनों पर स्थानीय अधिकार का दावा करते थे।

Hindi me samjhein

इन आंदोलनों की सबसे बड़ी जीत किसी एक परियोजना को रोकना नहीं, बल्कि प्रक्रिया बदलना थी। अब बड़ी परियोजनाओं में जन सुनवाई और प्रभाव आकलन अनिवार्य हैं।

Exam me kaise aata hai

  • चिपको आंदोलन कहां शुरू हुआ — उत्तराखंड की पहाड़ियां
  • साइलेंट वैली अभियान किस राज्य में था — केरल
  • नर्मदा बचाओ आंदोलन ने कौन सा मुद्दा उठाया — विस्थापन और पुनर्वास
  • चिपको का कर्नाटक संस्करण कौन सा था — अप्पिको आंदोलन

UPSC/State PSC ke liye

  • इन आंदोलनों ने विकास की प्रक्रिया बदली, प्रभाव आकलन और जन सुनवाई को वैकल्पिक के बजाय मानक बनाया, जो किसी एक परियोजना रोकने से कहीं अधिक स्थायी विजय है।
  • इनमें अनेक का नेतृत्व महिलाओं ने किया क्योंकि पर्यावरणीय भार उन्हीं पर पड़ता है जो प्रतिदिन जल और ईंधन लाती हैं, जो लिंग को सीधे पर्यावरण नीति से जोड़ देता है।

Yahan confuse hote hain

चिपको और अप्पिको एक ही राज्य में हुए | चिपको उत्तराखंड में, अप्पिको कर्नाटक में  |  

ये आंदोलन हर विकास के विरोधी थे | इनकी मांग थी कि विस्थापितों का हिसाब रखा और उन्हें सुना जाए  |  

भारत में पर्यावरण आंदोलन हाल का विचार है | बिश्नोई परंपरा सदियों पुरानी है  |  

Ek nazar me

  • चिपको, अप्पिको, साइलेंट वैली और नर्मदा बचाओ मील के पत्थर आंदोलन हैं।
  • इनकी मांग थी कि परियोजना की लागत उठाने वालों को स्वर मिले।
  • अनेक का नेतृत्व महिलाओं ने किया क्योंकि दैनिक पर्यावरणीय भार वही उठाती हैं।
  • इन्होंने प्रभाव आकलन, जन सुनवाई और पुनर्वास को मानक प्रक्रिया का भाग बनाया।

Checking your account…

Create a free ExamAtlas account to read the full study material.