मुद्रा का विकास और कार्य
NCERT कक्षा 10 • Economics • अध्याय "Money and Credit" | NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • अध्याय "Money and Banking"
मुद्रा का विकास और कार्य
मुद्रा वह है जिसे वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान तथा ऋण चुकाने के साधन के रूप में सामान्यतः स्वीकार किया जाए। मुद्रा से पहले लोग वस्तु विनिमय करते थे, यानी एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु। वस्तु विनिमय केवल बहुत छोटे समुदायों में चलता था और व्यापार बढ़ते ही विफल हो गया।
वस्तु विनिमय की समस्याएं और मुद्रा का उदय
- वस्तु विनिमय में आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता होती है: दोनों पक्षों को ठीक वही चाहिए जो दूसरा दे रहा है।
- वस्तु विनिमय में मूल्य का सामान्य माप नहीं होता, इसलिए गाय और कपड़े की तुलना कठिन है।
- वस्तुओं को मूल्य के रूप में सरलता से संग्रहीत नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई शीघ्र खराब हो जाती हैं।
- अविभाज्य वस्तुओं को छोटी खरीद के लिए बांटा नहीं जा सकता, इसलिए ठीक विनिमय नहीं हो पाता।
- मुद्रा ने एक ही स्वीकृत माध्यम बनकर इन चारों समस्याओं का समाधान किया।
- मुद्रा वस्तु मुद्रा जैसे अनाज और पशु से धातु मुद्रा, फिर कागजी मुद्रा, और अब बढ़ते हुए डिजिटल मुद्रा तक विकसित हुई।
- आधुनिक मुद्रा फिएट मुद्रा है, जो इसलिए स्वीकार्य है कि विधि उसे वैध मुद्रा घोषित करती है, धातु मूल्य के कारण नहीं।
मुद्रा के कार्य और रूप
- विनिमय का माध्यम — मुद्रा क्रय-विक्रय में सभी को स्वीकार्य है, जिससे दोहरे संयोग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
- मूल्य का माप — हर वस्तु का मूल्य एक ही सामान्य इकाई में व्यक्त किया जा सकता है।
- मूल्य का संचय — क्रय शक्ति को रोककर बाद में उपयोग किया जा सकता है।
- स्थगित भुगतान का मानक — उधार, ऋण और किस्त संभव हो जाते हैं।
- करेंसी का अर्थ नोट और सिक्के हैं; बैंकों की मांग जमा भी मुद्रा हैं क्योंकि चेक और अंतरण से भुगतान होता है।
- मुद्रा आपूर्ति जनता के पास कुल मुद्रा है, जिसमें करेंसी और बैंक जमा दोनों आते हैं।
| वस्तु विनिमय की समस्या | मुद्रा से समाधान |
|---|---|
| आवश्यकताओं का दोहरा संयोग | मुद्रा सबको स्वीकार्य है |
| सामान्य माप का अभाव | सभी मूल्य एक इकाई में |
| मूल्य संचय की कठिनाई | मुद्रा समय तक रखी जा सकती है |
| अविभाज्यता | मुद्रा छोटी इकाइयों में बंटती है |
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग — वह स्थिति जिसमें वस्तु विनिमय के दोनों पक्षों को ठीक वही वस्तु चाहिए जो दूसरा दे रहा हो।
Exam me kaise aata hai
- वस्तु विनिमय की मुख्य समस्या — आवश्यकताओं का दोहरा संयोग
- आधुनिक कागजी मुद्रा किसका उदाहरण है — फिएट मुद्रा
- किस कार्य से मुद्रा बाद के लिए बचाई जा सकती है — मूल्य का संचय
- चेक से निकाली जा सकने वाली बैंक जमा कहलाती है — मांग जमा
UPSC/State PSC ke liye
- फिएट मुद्रा का मूल्य विश्वास और विधिक समर्थन से है, आंतरिक मूल्य से नहीं, इसीलिए निर्गमकर्ता पर भरोसा मुद्रा के लिए केंद्रीय है।
- मांग जमा इसलिए मुद्रा में गिनी जाती हैं कि वे भुगतान में स्वीकार होती हैं, इसीलिए मुद्रा आपूर्ति केवल करेंसी से अधिक है।
Yahan confuse hote hain
✗ केवल नोट और सिक्के ही मुद्रा हैं | बैंकों की मांग जमा भी मुद्रा हैं | ✓
✗ मुद्रा का धातु मूल्य होना चाहिए | फिएट मुद्रा का कोई आंतरिक धातु मूल्य नहीं होता | ✓
✗ वस्तु विनिमय का अर्थ मुद्रा से खरीदना है | वस्तु विनिमय मुद्रा बिना वस्तुओं का सीधा आदान-प्रदान है | ✓
Ek nazar me
- वस्तु विनिमय में दोहरा संयोग चाहिए था और व्यापार बढ़ते ही वह विफल हुआ।
- मुद्रा वस्तु से धातु, कागज और अब डिजिटल तक विकसित हुई।
- चार कार्य: विनिमय माध्यम, मूल्य माप और संचय, स्थगित भुगतान।
- मुद्रा आपूर्ति में करेंसी के साथ मांग जमा भी आती हैं।
