विनिमय दर प्रणालियां
NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • अध्याय "Open Economy Macroeconomics"
विनिमय दर प्रणालियां
विनिमय दर एक मुद्रा की कीमत दूसरी मुद्रा में है। यह तय करती है कि आयात कितने महंगे होंगे और निर्यात कितने प्रतिस्पर्धी बनेंगे, इसलिए यह घरेलू अर्थव्यवस्था को सीधे विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ती है और व्यापार तथा सरकार दोनों इस पर निकट दृष्टि रखते हैं।
विनिमय दर प्रणालियों के प्रकार
- स्थिर विनिमय दर प्रणाली में सरकार या केंद्रीय बैंक दर तय करता है और विदेशी मुद्रा खरीद-बेचकर उसकी रक्षा करता है।
- इसका लाभ व्यापारियों को निश्चितता है; कमी यह कि दर की रक्षा भंडार समाप्त कर सकती है।
- लचीली या तैरती विनिमय दर प्रणाली में दर बाजार में मुद्रा की मांग और पूर्ति से तय होती है।
- इसका लाभ है कि बाजार स्वयं समायोजन करता है; कमी अनिश्चितता और अस्थिरता है।
- प्रबंधित तैरती दर में बाजार दर तय करता है जबकि केंद्रीय बैंक तीखे उतार-चढ़ाव कम करने के लिए हस्तक्षेप करता है, जो आज की सामान्य पद्धति है।
- स्थिर प्रणाली में मुद्रा के मूल्य में आधिकारिक कमी को अवमूल्यन और वृद्धि को अधिमूल्यन कहते हैं।
- तैरती प्रणाली में बाजार में मूल्य गिरने को मूल्यह्रास और बढ़ने को मूल्यवृद्धि कहते हैं।
दर बदलने का प्रभाव
- जब रुपये का मूल्यह्रास होता है, तो विदेशी क्रेताओं के लिए निर्यात सस्ता और देश में आयात महंगा हो जाता है।
- इससे निर्यातकों और आयात से प्रतिस्पर्धा करने वालों को लाभ तथा आयातकों और विदेश यात्रियों को हानि होती है।
- महंगा आयातित कच्चा तेल और उर्वरक घरेलू मुद्रास्फीति बढ़ा सकते हैं।
- जब रुपये की मूल्यवृद्धि होती है, तो आयात सस्ता पर निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो जाता है।
- विदेशी निवेश प्रवाह, ब्याज दर अंतर और व्यापार संतुलन सभी विनिमय दर को हिलाते हैं।
- स्थिर और अनुमेय दर निर्यातकों को अनुबंध की योजना और कीमत तय करने में सहायक रहती है।
- चालू खाता परिवर्तनीयता व्यापार के लिए मुक्त विनिमय देती है, जबकि पूंजी खाता परिवर्तनीयता अधिक सावधानी से खोली जाती है।
| शब्द | प्रणाली | अर्थ |
|---|---|---|
| अवमूल्यन | स्थिर | मुद्रा मूल्य में आधिकारिक कमी |
| अधिमूल्यन | स्थिर | मुद्रा मूल्य में आधिकारिक वृद्धि |
| मूल्यह्रास | तैरती | बाजार में मुद्रा मूल्य गिरना |
| मूल्यवृद्धि | तैरती | बाजार में मुद्रा मूल्य बढ़ना |
विनिमय दर — किसी देश की मुद्रा की कीमत जो दूसरे देश की मुद्रा में व्यक्त की जाती है।
Exam me kaise aata hai
- मुद्रा मूल्य में आधिकारिक कमी कहलाती है — अवमूल्यन
- बाजार में मुद्रा मूल्य गिरना कहलाता है — मूल्यह्रास
- जिस प्रणाली में बाजार दर तय करे — तैरती विनिमय दर
- रुपये के मूल्यह्रास पर निर्यात कैसे होते हैं — विदेशी क्रेताओं के लिए सस्ते
UPSC/State PSC ke liye
- मूल्यह्रास निर्यात को तभी सहायता देता है जब निर्यात पूर्ति वास्तव में प्रतिक्रिया कर सके; अन्यथा वह मुख्यतः आयात बिल बढ़ा देता है।
- प्रबंधित तैरती दर बाजार का समायोजन लेते हुए उस अस्थिरता से बचने का प्रयास करती है जो व्यापार अनुबंध और निवेश नियोजन को हानि पहुंचाती है।
Yahan confuse hote hain
✗ अवमूल्यन और मूल्यह्रास एक ही हैं | अवमूल्यन आधिकारिक निर्णय है; मूल्यह्रास बाजार की गति | ✓
✗ मूल्यह्रास से आयात सस्ता होता है | इससे आयात महंगा होता है | ✓
✗ तैरती दर में केंद्रीय बैंक की आवश्यकता ही नहीं | केंद्रीय बैंक प्रायः तीखे उतार-चढ़ाव कम करने हस्तक्षेप करते हैं | ✓
Ek nazar me
- विनिमय दर एक मुद्रा की कीमत दूसरी में है।
- तीन प्रणालियां: स्थिर, तैरती और प्रबंधित तैरती।
- अवमूल्यन और अधिमूल्यन आधिकारिक; मूल्यह्रास और मूल्यवृद्धि बाजार से।
- मूल्यह्रास निर्यात में सहायक और आयात को महंगा करता है।
