उत्सर्जन और नियंत्रण
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Life Processes" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Control and Coordination"
उत्सर्जन और नियंत्रण
उत्सर्जन शरीर की रासायनिक क्रिया से बने हानिकारक नाइट्रोजनी अपशिष्ट को बाहर निकालना है। यदि ये अपशिष्ट जमा होते रहें तो शरीर को विषैला कर देंगे, इसलिए हर जीव के पास उन्हें उपयोगी पदार्थों से अलग करके बाहर भेजने का तरीका होता है।
मानव उत्सर्जन तंत्र
- उत्सर्जन तंत्र में दो वृक्क, दो मूत्रवाहिनी, एक मूत्राशय और एक मूत्रमार्ग होते हैं।
- वृक्काणु (nephron) वृक्क की मूल छानने वाली इकाई है, और हर वृक्क में इनकी संख्या बहुत अधिक होती है।
- वृक्काणु में आने वाला रक्त कप जैसी संरचना में दाब के साथ छना जाता है, और छनित में जल, ग्लूकोज, लवण तथा यूरिया रहते हैं।
- छनित के नलिका में आगे बढ़ने पर ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, अधिकांश लवण और अधिकांश जल जैसे उपयोगी पदार्थ वापस रक्त में अवशोषित कर लिए जाते हैं।
- जो शेष रहता है वह मूत्र है, जो एकत्र होकर मूत्रवाहिनी से मूत्राशय तक जाता है।
- कितना जल पुनः अवशोषित होगा यह इस पर निर्भर है कि शरीर में कितना अतिरिक्त जल है और कितना घुला अपशिष्ट निकालना है।
- अपोहन (dialysis) वृक्क विफल होने पर प्रयुक्त कृत्रिम प्रक्रिया है, जिसमें रक्त मशीन से गुजारकर साफ किया जाता है।
पौधों में उत्सर्जन और जंतुओं में नियंत्रण
- पौधों में कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं होता; वे रंध्रों से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड तथा वाष्पोत्सर्जन से अतिरिक्त जल छोड़ते हैं।
- पौधे अपशिष्ट रिक्तिकाओं, पुरानी पत्तियों और छाल में जमा करते हैं, जिन्हें बाद में गिरा देते हैं, तथा गोंद और रेजिन स्रावित करते हैं।
- जंतुओं में नियंत्रण और समन्वय तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर संभालते हैं।
- तंत्रिका तंत्र विद्युत आवेगों से काम करता है और तीव्र तथा अल्पकालिक प्रतिक्रिया देता है, जैसे प्रतिवर्ती क्रिया में।
- प्रतिवर्ती चाप मस्तिष्क के बजाय मेरुरज्जु से होकर जाता है, इसीलिए प्रतिक्रिया इतनी तेज होती है।
- अंतःस्रावी तंत्र रक्त में बहते हार्मोन से काम करता है, जिससे प्रतिक्रिया धीमी पर अधिक स्थायी रहती है।
- प्रमुख ग्रंथियां पीयूष, अवटु, अग्न्याशय, अधिवृक्क और जनन ग्रंथियां हैं, जिनमें से हर एक का अपना हार्मोन है।
| तंत्र | संदेश किससे | गति और अवधि |
|---|---|---|
| तंत्रिका | विद्युत आवेग | बहुत तेज, अल्पकालिक |
| अंतःस्रावी | रक्त में हार्मोन | धीमा, दीर्घकालिक |
वृक्काणु — वृक्क की मूल छानने वाली इकाई, जिसमें रक्त छना जाता है और उपयोगी पदार्थ पुनः अवशोषित होते हैं।
Exam me kaise aata hai
- वृक्क की छानने वाली इकाई क्या है — वृक्काणु
- रक्त की कृत्रिम सफाई कहलाती है — अपोहन
- प्रतिवर्ती क्रिया किससे नियंत्रित होती है — मेरुरज्जु
- हार्मोन लक्ष्य तक किससे पहुंचते हैं — रक्त
UPSC/State PSC ke liye
- प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु से इसलिए जाता है कि संकेत को पहले मस्तिष्क भेजने में वह समय लगता जो संकट के समय शरीर के पास नहीं होता।
- पुनः अवशोषण ही वृक्क को कुशल बनाता है: छनन भेद नहीं करता, इसलिए उपयोगी पदार्थ जानबूझकर वापस लेने पड़ते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ मूत्र केवल छना हुआ रक्त है | मूत्र बनने से पहले उपयोगी पदार्थ पुनः अवशोषित हो जाते हैं | ✓
✗ प्रतिवर्ती क्रिया मस्तिष्क से नियंत्रित होती है | यह मेरुरज्जु से नियंत्रित होती है | ✓
✗ पौधों में विशेष उत्सर्जी अंग होता है | पौधों में ऐसा अंग नहीं होता और वे अन्य मार्ग अपनाते हैं | ✓
Ek nazar me
- उत्सर्जन नाइट्रोजनी अपशिष्ट हटाता है; वृक्क मुख्य अंग हैं।
- वृक्काणु रक्त छानता और उपयोगी पदार्थ पुनः अवशोषित करता है।
- अपोहन विफल वृक्कों का स्थान लेता है।
- तंत्रिका तंत्र तीव्र और हार्मोन धीमी पर स्थायी प्रतिक्रिया देते हैं।
Ab practice karein
Life processes se har exam me seedhe diagram aur factual questions bante hain. ExamAtlas ke mock test se abhi jaanchein.
