राजकोषीय नीति और केंद्र राज्य वित्त
NCERT कक्षा 12 • Introductory Macroeconomics • अध्याय "Government Budget and the Economy" | NCERT कक्षा 11 • Political Science • संघवाद के अध्याय
राजकोषीय नीति और केंद्र राज्य वित्त
राजकोषीय नीति आर्थिक गतिविधि के स्तर को प्रभावित करने के लिए सरकारी व्यय और कराधान का उपयोग है। यह मौद्रिक नीति के साथ चलती है पर अधिक सीधे कार्य करती है, क्योंकि सरकारी व्यय में परिवर्तन साख बाजार के बजाय तुरंत मांग बनकर अर्थव्यवस्था में प्रवेश करता है।
विस्तारक और संकुचनकारी नीति
- विस्तारक राजकोषीय नीति मंदी के समय मांग बढ़ाने के लिए सरकारी व्यय बढ़ाती या कर घटाती है।
- इसका प्रयोग तब होता है जब उत्पादन क्षमता से नीचे हो और बेरोजगारी ऊंची हो।
- संकुचनकारी राजकोषीय नीति मुद्रास्फीति ऊंची होने पर मांग घटाने के लिए व्यय घटाती या कर बढ़ाती है।
- राजकोषीय नीति को किसी क्षेत्र या प्रक्षेत्र पर लक्षित किया जा सकता है, जो मौद्रिक नीति नहीं कर सकती।
- स्वचालित स्थिरक बिना किसी नए निर्णय के काम करते हैं: मंदी में कर संग्रह घटता है और कल्याण व्यय बढ़ता है, जो गिरावट को स्वयं संभाल लेता है।
- राजकोषीय नीति की मुख्य सीमाएं निर्णय और क्रियान्वयन में लगने वाला समय विलंब तथा मौजूदा ऋण की बाधा हैं।
केंद्र राज्य वित्तीय संबंध
- संविधान कराधान की शक्तियां संघ और राज्यों में बांटता है, इसलिए दोनों की अपनी कर सूची है।
- वित्त आयोग समय-समय पर गठित होता है और सिफारिश करता है कि बांटने योग्य केंद्रीय कर राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों में आपस में कैसे बंटे।
- इसकी सिफारिशें करों का हिस्सा, सहायता अनुदान और स्थानीय निकायों के लिए उपाय समेटती हैं।
- राज्यों को विशेष योजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता भी मिलती है, और वस्तु एवं सेवा कर परिषद GST दरें संयुक्त रूप से तय करती है।
- स्थानीय निकाय, अर्थात पंचायत और नगरपालिकाएं, राज्य सरकार और वित्त आयोग अनुदानों के माध्यम से धन पाते हैं।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक है कि हस्तांतरण कमजोर राजस्व क्षमता वाले राज्यों की ओर जाएं।
| स्थिति | राजकोषीय नीति | कार्रवाई |
|---|---|---|
| मंदी और बेरोजगारी | विस्तारक | अधिक व्यय, कम कर |
| ऊंची मुद्रास्फीति | संकुचनकारी | कम व्यय, अधिक कर |
| स्वचालित प्रतिक्रिया | स्थिरक | कर घटे, कल्याण व्यय स्वयं बढ़े |
स्वचालित स्थिरक — बजट का वह लक्षण जो बिना किसी नए नीतिगत निर्णय के उत्पादन के उतार-चढ़ाव को कम कर देता है।
Exam me kaise aata hai
- मंदी में व्यय बढ़ाना कौन सी नीति है — विस्तारक राजकोषीय नीति
- केंद्रीय करों के बंटवारे की सिफारिश कौन करता है — वित्त आयोग
- मंदी में कल्याण व्यय का स्वयं बढ़ना क्या है — स्वचालित स्थिरक
- राजकोषीय नीति के दो मुख्य उपकरण — व्यय और कराधान
UPSC/State PSC ke liye
- राजकोषीय नीति को क्षेत्र और प्रक्षेत्र के अनुसार लक्षित किया जा सकता है, इसीलिए क्षेत्रीय असंतुलन सुधारने में उसे वरीयता मिलती है जबकि मौद्रिक नीति पूरे देश में एक समान रहती है।
- राज्यों को हस्तांतरण समता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्यों की अपनी राजस्व क्षमता में भारी अंतर है जबकि उनके व्यय दायित्व समान हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ राजकोषीय नीति केंद्रीय बैंक चलाता है | राजकोषीय नीति सरकार बजट के माध्यम से चलाती है | ✓
✗ स्वचालित स्थिरकों के लिए हर बार नया निर्णय चाहिए | ये बिना नए निर्णय स्वयं काम करते हैं | ✓
✗ विस्तारक नीति मुद्रास्फीति में प्रयुक्त होती है | यह मंदी में; मुद्रास्फीति में संकुचनकारी नीति प्रयुक्त होती है | ✓
Ek nazar me
- राजकोषीय नीति सरकारी व्यय और कराधान का उपयोग करती है।
- मंदी में विस्तारक; ऊंची मुद्रास्फीति में संकुचनकारी।
- स्वचालित स्थिरक बिना नए निर्णय चक्र को संभालते हैं।
- वित्त आयोग केंद्रीय करों के राज्यों से बंटवारे की सिफारिश करता है।
Ab practice karein
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