आहार शृंखला और आहार जाल
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Our Environment" | NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Ecosystem"
आहार शृंखला और आहार जाल
आहार शृंखला वह क्रम है जिससे भोजन ऊर्जा एक जीव से अगले तक जाती है। उस क्रम का हर चरण एक पोषी स्तर है, और यह समझना कि ऊर्जा इन स्तरों से कैसे गुजरती है, पारिस्थितिकी का लगभग हर नियम समझा देता है।
पोषी स्तर और ऊर्जा प्रवाह
- पहला पोषी स्तर उत्पादक है, जो प्रकाश संश्लेषण से सौर ऊर्जा पकड़ता है।
- दूसरा शाकाहारी या प्राथमिक उपभोक्ता, तीसरा द्वितीयक उपभोक्ता और चौथा तृतीयक उपभोक्ता है।
- पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय है: वह सूर्य प्रकाश के रूप में आती है और अंततः ऊष्मा बनकर खो जाती है, लौटती कभी नहीं।
- दस प्रतिशत नियम कहता है कि एक पोषी स्तर की केवल लगभग दस प्रतिशत ऊर्जा अगले स्तर तक जाती है।
- शेष श्वसन, गति और ऊष्मा में खो जाती है, इसीलिए आहार शृंखलाओं में प्रायः चार या पांच से अधिक स्तर नहीं होते।
- हर स्तर पर इतनी हानि होने से छोटी आहार शृंखला शीर्ष पर अधिक जीवों को सहारा दे पाती है।
- आहार जाल वह तंत्र है जो अनेक आहार शृंखलाओं के जुड़ने से बनता है, और यह पारितंत्र को अकेली शृंखला से अधिक स्थिर बना देता है।
पारिस्थितिक पिरामिड और जैव आवर्धन
- पारिस्थितिक पिरामिड पोषी स्तरों के बीच संबंध को संख्या, जैव भार या ऊर्जा के रूप में दिखाता है।
- ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा हर ऊपरी स्तर पर घटती ही है।
- संख्या का पिरामिड उल्टा हो सकता है, जैसे एक बड़ा वृक्ष अनेक कीटों को सहारा देता है।
- जैव भार का पिरामिड भी उल्टा हो सकता है, जैसे महासागर में छोटे पादप प्लवक बड़ी मछलियों को सहारा देते हैं।
- जैव आवर्धन किसी हानिकारक रसायन की सांद्रता का हर ऊपरी पोषी स्तर पर बढ़ना है।
- फसलों पर छिड़के कीटनाशक आहार शृंखला में प्रवेश कर शीर्ष उपभोक्ताओं में, जिनमें मनुष्य भी है, सर्वाधिक सांद्रता तक पहुंच जाते हैं।
- इसीलिए जो रसायन मृदा में हानिरहित दिखते हैं, वे शृंखला के अंत तक पहुंचते-पहुंचते खतरनाक हो सकते हैं।
| पिरामिड प्रकार | आकार | कारण |
|---|---|---|
| ऊर्जा | सदैव सीधा | ऊर्जा हर स्तर पर घटती है |
| संख्या | उल्टा हो सकता है | एक वृक्ष अनेक कीटों को सहारा |
| जैव भार | उल्टा हो सकता है | छोटे प्लवक बड़ी मछलियों को सहारा |
जैव आवर्धन — आहार शृंखला के हर अगले पोषी स्तर पर किसी हानिकारक रसायन की सांद्रता का बढ़ना।
Exam me kaise aata hai
- पोषी स्तरों के बीच ऊर्जा स्थानांतरण लगभग कितना होता है — दस प्रतिशत
- कौन सा पारिस्थितिक पिरामिड सदैव सीधा होता है — ऊर्जा का पिरामिड
- आहार शृंखला में रसायन का बढ़ना कहलाता है — जैव आवर्धन
- पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह कैसा है — एकदिशीय
UPSC/State PSC ke liye
- दस प्रतिशत नियम बताता है कि किसी भी पारितंत्र में शीर्ष मांसाहारियों की संख्या सदैव कम क्यों रहती है; अधिक को सहारा देने योग्य ऊर्जा बचती ही नहीं।
- जैव आवर्धन जलीय आहार शृंखलाओं में सर्वाधिक गंभीर है क्योंकि वे प्रायः लंबी होती हैं, जिससे रसायन को सांद्र होने के अधिक चरण मिल जाते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ ऊर्जा पारितंत्र में चक्र बनाती है | ऊर्जा एक दिशा में बहती है; केवल पदार्थ चक्र बनाता है | ✓
✗ सभी पारिस्थितिक पिरामिड सीधे होते हैं | केवल ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है | ✓
✗ आहार जाल आहार शृंखला से सरल है | आहार जाल अनेक जुड़ी शृंखलाएं हैं और अधिक जटिल है | ✓
Ek nazar me
- आहार शृंखला ऊर्जा को पोषी स्तरों से एक दिशा में ले जाती है।
- अगले स्तर तक केवल लगभग दस प्रतिशत ऊर्जा जाती है।
- ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा; संख्या और जैव भार के उल्टे हो सकते हैं।
- जैव आवर्धन हानिकारक रसायन शीर्ष उपभोक्ताओं में सांद्र कर देता है।
