वन संसाधन और प्रबंधन
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Management of Natural Resources" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Forest and Wildlife Resources"
वन संसाधन और प्रबंधन
वनों को जैव विविधता तप्त स्थल कहा जाता है क्योंकि देश की अधिकांश पादप और जंतु प्रजातियां उन्हीं में हैं। वे इमारती लकड़ी, ईंधन, चारा और औषधि भी देते हैं, मृदा थामते, भूजल भरते और कार्बन सोखते हैं, इसीलिए वनों पर हर बहस में एक साथ कई भिन्न हित जुड़ जाते हैं।
लाभ और वनोन्मूलन
- प्रत्यक्ष लाभों में इमारती लकड़ी, ईंधन लकड़ी, चारा, बांस, गोंद, रेजिन, लाख, शहद और औषधीय पौधे आते हैं।
- अप्रत्यक्ष लाभों में मृदा संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, कार्बन अवशोषण और वन्य जीवों का आवास आते हैं।
- वनोन्मूलन कृषि, खनन, बांध, सड़क, उद्योग और बसाव के लिए वन साफ करना है।
- यह स्थानांतरी कृषि, अतिचारण, ईंधन लकड़ी संग्रह और वन अग्नि से भी होता है।
- इसके प्रभावों में मृदा अपरदन, बाढ़, सूखा, जैव विविधता हानि और वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि आते हैं।
- वन की हानि वन में बसे समुदायों का जीविका आधार भी छीन लेती है।
- किसी ढाल से मृदा चली जाने के बाद वन फिर उगाना कहीं कठिन हो जाता है, इसलिए क्षति और गहरी होती जाती है।
हितधारक और प्रबंधन
- किसी वन के हितधारक वे लोग हैं जो उसमें और उसके आसपास रहते हैं, वन विभाग, वन उपज का उपयोग करने वाला उद्योग, तथा वन्यजीव और प्रकृति प्रेमी।
- स्थानीय समुदायों का वन से सबसे लंबा संबंध और उसके बचे रहने में सबसे बड़ा हित है।
- संयुक्त वन प्रबंधन गांव समितियों को वन उपज में हिस्से के बदले रक्षा में जोड़ता है।
- चिपको आंदोलन ने दिखाया कि सामुदायिक कार्रवाई व्यावसायिक कटाई रोक सकती है, और उसी से वन रक्षा की व्यापक परंपरा शुरू हुई।
- पवित्र उपवनों ने धार्मिक संरक्षण से अछूते वन के टुकड़े बचाए रखे हैं।
- वनरोपण और सामाजिक वानिकी गांव की भूमि, सड़क किनारों, नहर तटों और खेत की मेड़ों पर वृक्ष आवरण बढ़ाते हैं।
- संधारणीय वन प्रबंधन उपयोग और पुनर्जनन में संतुलन रखता है, और यही उसे दोहन तथा पूर्ण निषेध दोनों से अलग करता है।
| हितधारक | हित |
|---|---|
| स्थानीय समुदाय | ईंधन, चारा, जीविका, वन का दीर्घकालिक अस्तित्व |
| वन विभाग | स्वामित्व, नियंत्रण और राजस्व |
| उद्योग | इमारती लकड़ी और बांस जैसा कच्चा माल |
| प्रकृति प्रेमी | वन्य जीवन और आवास का संरक्षण |
संयुक्त वन प्रबंधन — वह व्यवस्था जिसमें गांव समुदाय वन उपज में हिस्से के बदले वन की रक्षा करते हैं।
Hindi me samjhein
वन के अप्रत्यक्ष लाभ प्रत्यक्ष लाभों से कहीं बड़े हैं, पर उनकी कोई कीमत नहीं लगती। इसीलिए वन प्रायः उन उपयोगों के लिए काट दिए जाते हैं जिनका मूल्य कहीं कम होता है।
Exam me kaise aata hai
- किस आंदोलन ने वृक्षों की व्यावसायिक कटाई का विरोध किया — चिपको आंदोलन
- धार्मिक आधार पर बचाए वन टुकड़े — पवित्र उपवन
- वन रक्षा में सामुदायिक भागीदारी कहलाती है — संयुक्त वन प्रबंधन
- वनों का अप्रत्यक्ष लाभ कौन सा है — भूजल पुनर्भरण
UPSC/State PSC ke liye
- संयुक्त वन प्रबंधन इसलिए काम करता है कि वह समुदाय की आय को वन के खड़े रहने पर निर्भर बना देता है, उसके कटने पर नहीं।
- अप्रत्यक्ष लाभ मूल्य में प्रत्यक्ष से कहीं बड़े हैं, फिर भी उनकी कीमत नहीं लगती, और ठीक इसीलिए वन कहीं कम मूल्य के उपयोगों के लिए साफ कर दिए जाते हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ वन केवल इमारती लकड़ी के लिए मूल्यवान हैं | उनके अप्रत्यक्ष लाभ मूल्य में कहीं बड़े हैं | ✓
✗ सभी लोगों को हटा देना वन रक्षा का सर्वोत्तम ढंग है | सामुदायिक भागीदारी वनों की बेहतर रक्षा करती है | ✓
✗ वनोन्मूलन केवल कटे क्षेत्र को प्रभावित करता है | यह दूर नीचे तक अपरदन, बाढ़ और सूखा लाता है | ✓
Ek nazar me
- वन प्रत्यक्ष उपज और उससे बड़े अप्रत्यक्ष पारिस्थितिक लाभ देते हैं।
- वनोन्मूलन अपरदन, बाढ़, सूखा और जैव विविधता हानि लाता है।
- हितधारकों में स्थानीय समुदाय, विभाग, उद्योग और संरक्षणवादी आते हैं।
- संयुक्त वन प्रबंधन और सामुदायिक कार्रवाई वनों की सर्वाधिक प्रभावी रक्षा करते हैं।
