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राज्यपाल और राज्य कार्यपालिका

Governor and the State Executive

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NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 4

राज्यपाल और राज्य कार्यपालिका

राज्य की कार्यपालिका संघ की कार्यपालिका का प्रतिबिंब है। अनुच्छेद 153 के अंतर्गत राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख हैं, और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका, जो विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।

राज्यपाल

  • अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होते हैं और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं - इसलिए कार्यकाल की निश्चित सुरक्षा नहीं है, यद्यपि सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष है।
  • योग्यताएं - भारत का नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष पूरी हो; परंपरा से राज्यपाल उस राज्य का निवासी नहीं होता जहां उसकी नियुक्ति होती है।
  • एक ही व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त हो सकता है।
  • उनकी शक्तियां राज्य के भीतर राष्ट्रपति जैसी हैं - कार्यपालिका नियुक्तियां, विधानसभा आहूत करना और भंग करना, विधेयकों पर अनुमति, अनुच्छेद 213 में अध्यादेश, और अनुच्छेद 161 में क्षमादान।
  • दो सीमाएं ध्यान रखें - राज्यपाल की क्षमा शक्ति मृत्युदंड और सैन्य न्यायालय के मामलों तक नहीं जाती, ये दोनों राष्ट्रपति के पास रहते हैं।

विवेकाधीन शक्तियां

स्थितिराज्यपाल का विवेक
किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहींमुख्यमंत्री के रूप में किसे बुलाना है यह चुनना
सरकार विश्वास खो देपरिषद को हटाना और नई व्यवस्था की सिफारिश
विधेयक संघ के हितों को छूता होअनुच्छेद 200 में उसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करना
संवैधानिक तंत्र की विफलताअनुच्छेद 356 की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति को रिपोर्ट
राज्य का प्रशासनअनुच्छेद 167 में मुख्यमंत्री से जानकारी मांगना
  • अनुच्छेद 163 कहता है कि राज्यपाल परिषद की सलाह पर कार्य करते हैं, सिवाय उन मामलों के जहां उन्हें विवेक से काम करना है, और कौन सा मामला विवेकाधीन है इस पर उनका अपना निर्णय अंतिम है, जिस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
  • यह विवेक का दायरा राष्ट्रपति से कहीं अधिक है, इसीलिए यह पद राजनीतिक विवाद का विषय रहा है।
  • कुछ राज्यों के राज्यपालों के पास विशेष उत्तरदायित्व भी हैं, जैसे अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्रों में, तथा कुछ राज्यों के लिए विशिष्ट संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत।

मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद

  • अनुच्छेद 164 - मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, और अन्य मंत्री मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं।
  • मंत्रिपरिषद विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है, इसलिए वहां अविश्वास प्रस्ताव सरकार को हटा देता है।
  • 91वां संशोधन राज्य परिषद का आकार विधानसभा के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है, न्यूनतम बारह।
  • राज्य में मुख्यमंत्री की शक्तियां केंद्र में प्रधानमंत्री जैसी हैं - विभागों का बंटवारा, मंत्रिमंडल की अध्यक्षता, और अनुच्छेद 167 में परिषद तथा राज्यपाल के बीच कड़ी का काम।
  • जिस राज्य में विधान परिषद है, वहां मंत्री किसी भी सदन से लिए जा सकते हैं, पर उत्तरदायित्व केवल विधान सभा के प्रति होता है।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि राज्यपाल को कौन नियुक्त करता है, अध्यादेश किस अनुच्छेद में है, और क्या वे मृत्युदंड क्षमा कर सकते हैं। सुमेलित कीजिए में अनुच्छेद और शक्ति जुड़ती है। व्यावहारिक प्रश्न त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति देकर पूछते हैं कि राज्यपाल क्या कर सकते हैं।

UPSC / State PSC के लिए

राज्यपाल का पद भारतीय संघवाद में सबसे विवादित है। मुख्य आलोचनाएं लिखिए - नियुक्ति और हटाना पूरी तरह केंद्र के प्रसाद पर, मुख्यमंत्री बुलाने में व्यापक विवेक, और अनुच्छेद 356 का प्रयोग। सुधार भी लिखिए - उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बहुमत की परीक्षा राजभवन में नहीं, सदन के पटल पर होनी चाहिए।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ राज्यपाल मृत्युदंड क्षमा कर सकते हैं  |  ✓ यह केवल राष्ट्रपति कर सकते हैं; अनुच्छेद 161 में यह शामिल नहीं

✗ राज्यपाल का पांच वर्ष का कार्यकाल सुनिश्चित है  |  ✓ वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं

✗ राज्य मंत्रिपरिषद विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी है  |  ✓ वह केवल विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है

एक नजर में

  • राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155 में राष्ट्रपति करते हैं और वे उन्हीं के प्रसादपर्यंत रहते हैं।
  • न्यूनतम आयु 35; एक ही व्यक्ति एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है।
  • अनुच्छेद 213 में अध्यादेश; अनुच्छेद 161 में क्षमा, पर मृत्युदंड शामिल नहीं।
  • अनुच्छेद 163 विवेक देता है, और क्या विवेकाधीन है इस पर उनका निर्णय अंतिम है।
  • विवेक त्रिशंकु विधानसभा, विधेयक आरक्षित करने और अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण है।
  • अनुच्छेद 164 - मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल; परिषद विधान सभा के प्रति उत्तरदायी।
  • अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री को परिषद और राज्यपाल के बीच कड़ी बनाता है।

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