गुप्त साम्राज्य: शासक और प्रशासन
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2
गुप्त साम्राज्य: शासक और प्रशासन
गुप्तों ने लगभग 319 ईस्वी से लगभग दो शताब्दियों तक उत्तर भारत पर शासन किया। उनका साम्राज्य मौर्य साम्राज्य से छोटा और अधिक विकेंद्रित था, जो एकल वेतनभोगी नौकरशाही के बजाय गठबंधनों, करद राजाओं और भूमि दान पर टिका था।
शासक
- श्रीगुप्त और घटोत्कच पहले शासक बताए जाते हैं, जिनकी साधारण उपाधि महाराज थी।
- चंद्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज की शाही उपाधि ली और लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया; गुप्त संवत 319-320 ईस्वी से शुरू होता है। सिक्के उनके पुत्र को लिच्छवि-दौहित्र कहते हैं।
- समुद्रगुप्त का वर्णन उसके दरबारी कवि हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ लेख) में है। इसमें वे शासक गिनाए गए हैं जिन्हें उसने दक्षिण में हराकर लौटाया और उत्तर में मिला लिया।
- वी. ए. स्मिथ ने समुद्रगुप्त को भारतीय नेपोलियन कहा। उसके वीणावादक प्रकार के सिक्के, जिनमें वह वीणा बजाता दिखता है, उसका दूसरा पक्ष दिखाते हैं।
- चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य ने शक पश्चिमी क्षत्रपों को हराकर पश्चिमी बंदरगाह प्राप्त किए। उसके शासन में चीनी यात्री फाहियान आया।
- कुमारगुप्त प्रथम ने नालंदा महाविहार की स्थापना की; स्कंदगुप्त ने पहले हूण आक्रमण रोके और सुदर्शन झील की मरम्मत कराई, जो उसके जूनागढ़ अभिलेख में दर्ज है।
प्रशासन
| स्तर | नाम | प्रमुख |
|---|---|---|
| प्रांत | भुक्ति | उपरिक |
| जिला | विषय | विषयपति |
| छोटी इकाई | वीथी | स्थानीय अधिकारी |
| गांव | ग्राम | ग्रामिक और ग्राम वृद्ध |
- पद प्रायः वंशानुगत हो गए, और एक ही व्यक्ति कई पद रखता था - यह मौर्य व्यवहार से स्पष्ट अंतर है।
- जिला परिषद में नगर-श्रेष्ठी (प्रमुख साहूकार), सार्थवाह (कारवां प्रमुख), प्रथम-कुलिक (प्रमुख शिल्पी) और प्रथम-कायस्थ (प्रमुख लेखक) होते थे, जो नगर श्रेणियों की वास्तविक भूमिका दिखाता है।
- ब्राह्मणों और मंदिरों को दी गई भूमि, जिसे अग्रहार कहा जाता था, प्रायः कर मुक्त होती थी और प्रशासनिक अधिकार भी साथ जाते थे, जिससे केंद्रीय नियंत्रण कमजोर हुआ।
- सेना छोटी थी, और गुप्त सामंत प्रमुखों पर निर्भर थे जो कर देते और सैनिक भेजते थे।
सिक्के, राजस्व और पतन
- गुप्त स्वर्ण सिक्के, जिन्हें दीनार कहा जाता था, प्राचीन भारत में सबसे अधिक और सबसे कलात्मक हैं, जिनमें राजा शिकार करता, वीणा बजाता या अश्वमेध करता दिखता है।
- बाद के गुप्त स्वर्ण सिक्कों में सोने की मात्रा घटती है, जो आर्थिक दबाव का संकेत है।
- भू-राजस्व भाग मुख्य आय रहा, साथ में बलि और विष्टि नामक बेगार।
- पतन के कारण - तोरमाण और मिहिरकुल के नेतृत्व में बार-बार हूण आक्रमण, मालवा के यशोधर्मन का विद्रोह, स्वतंत्र होते सामंत और पश्चिमी समुद्री व्यापार का ह्रास।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि प्रयाग प्रशस्ति किसने लिखी, गुप्त संवत कब शुरू हुआ, और नालंदा किसने बनवाया। सुमेलित कीजिए में शासक और उपलब्धि या प्रशासनिक इकाई और उसका प्रमुख जुड़ते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि गुप्त प्रशासन मौर्य से कैसे अलग था।
UPSC / State PSC के लिए
मुख्य विश्लेषणात्मक बिंदु विकेंद्रीकरण है - वंशानुगत पद, सामंत राजा और कर मुक्त भूमि दान ने गुप्त राज्य को नौकरशाही मशीन के बजाय दायित्वों का जाल बना दिया। यही "भारतीय सामंतवाद" की शुरुआत वाली बहस का आधार है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ प्रयाग प्रशस्ति समुद्रगुप्त ने लिखी | ✓ इसकी रचना उसके दरबारी कवि हरिषेण ने की
✗ फाहियान समुद्रगुप्त के शासन में आया | ✓ वह चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन में आया
✗ नालंदा स्कंदगुप्त ने बनवाया | ✓ नालंदा कुमारगुप्त प्रथम ने बनवाया; स्कंदगुप्त ने हूणों से युद्ध किया
एक नजर में
- गुप्त संवत 319-320 ईस्वी से, चंद्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया।
- समुद्रगुप्त की जानकारी हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति से; भारतीय नेपोलियन कहा गया।
- चंद्रगुप्त द्वितीय ने शकों को हराया; उसी के शासन में फाहियान आया।
- कुमारगुप्त प्रथम ने नालंदा बनवाया; स्कंदगुप्त ने हूणों को रोका।
- प्रांत भुक्ति के अधीन उपरिक, जिला विषय के अधीन विषयपति, गांव में ग्रामिक।
- स्वर्ण दीनार सिक्के; अग्रहार दान; पतन हूण आक्रमण और उभरते सामंतों से।
