हड़प्पा नगर नियोजन और समाज
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 1
हड़प्पा नगर नियोजन और समाज
हड़प्पाई नगर महलों के लिए नहीं, नियोजन के लिए याद किए जाते हैं। सड़कें समकोण पर कटती थीं, हर घर में नाली थी, और ईंट का वही अनुपात गुजरात से पंजाब तक चलता था। सैकड़ों किलोमीटर तक यही एकरूपता इस सभ्यता की असली पहचान है।
ग्रिड योजना
- सड़कें उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा में चलती थीं, समकोण पर कटती थीं और नगर को आयताकार खंडों में बांटती थीं - यही ग्रिड पद्धति है।
- अधिकांश नगर दो भागों में थे - पश्चिम में ऊंचा दुर्ग (citadel), जो कच्ची ईंट के चबूतरे पर बना था, और पूर्व में बड़ा निचला नगर, जहां आम लोग रहते थे।
- दुर्ग में सार्वजनिक भवन थे - स्नानागार, अन्नागार, सभा भवन। चन्हूदड़ो वह प्रसिद्ध स्थल है जहां दुर्ग नहीं मिला।
- ईंटें पकी हुई थीं और अनुपात निश्चित 1:2:4 (मोटाई : चौड़ाई : लंबाई) था, हर जगह एक जैसा।
- कई नगर मोटी कच्ची ईंट की दीवारों से किलेबंद थे, संभवतः हमले से ज्यादा बाढ़ से बचाव के लिए।
जल निकासी - प्राचीन विश्व में सर्वश्रेष्ठ
- हर घर में अपना स्नानघर था, और घर की नाली सड़क की नाली से जुड़ती थी, जो ईंट या पत्थर की पटियों से ढकी रहती थी।
- नालियों में सफाई के लिए बीच-बीच में निरीक्षण गड्ढे (manholes) थे और हल्का ढाल था ताकि पानी बहता रहे।
- नालियां पहले बिछाई जाती थीं, घर बाद में बनते थे - यानी निर्माण से पहले नियोजन।
- ठोस कचरा रोकने के लिए सोख्ता गड्ढे और मर्तबान लगाए जाते थे।
ऊपर से हड़प्पाई नगर कैसा दिखता
कल्पना कीजिए आप नगर को ऊपर से देख रहे हैं। बाईं ओर एक छोटा ऊंचा आयत कृत्रिम टीले पर है - वही दुर्ग है, चारदीवारी सहित, बीच में सीढ़ियों वाला जलकुंड और बगल में लंबा स्तंभयुक्त भवन। दाईं ओर नीचे कहीं बड़ा आयत है - निचला नगर, जिसे दो दिशाओं में सीधी सड़कें समकोण पर काटकर सुथरे खंडों में बांटती हैं। हर खंड में आंगन वाले घर हैं, जिनकी बाहरी दीवारें सड़क की ओर बंद हैं। हर सड़क के बीचोंबीच एक पतली गहरी रेखा दिखती है - ढकी हुई नाली, जिसमें बराबर दूरी पर छोटे छेद हैं।
घर और प्रमुख संरचनाएं
- घर केंद्रीय आंगन के चारों ओर बने थे; सड़क की ओर खिड़कियां नहीं थीं, जिससे एकांत बना रहता था।
- कई घरों में छत या ऊपरी मंजिल तक सीढ़ी थी और भीतर कुआं भी।
- मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार लगभग 12 गुणा 7 मीटर का और करीब 2.4 मीटर गहरा कुंड है, जिसे बिटुमन (डामर) से जलरोधक बनाया गया, दोनों ओर सीढ़ियां और चारों ओर कमरे हैं। यह संभवतः धार्मिक स्नान के लिए था।
- मोहनजोदड़ो का विशाल अन्नागार उस स्थल का सबसे बड़ा एकल भवन है।
- कालीबंगा में कतार में बने अग्निकुंड मिले हैं, जो कर्मकांड की ओर संकेत करते हैं।
| विशेषता | याद रखने की बात |
|---|---|
| सड़क पद्धति | ग्रिड, समकोण, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम |
| नगर विभाजन | दुर्ग (पश्चिम, ऊंचा) और निचला नगर (पूर्व, बड़ा) |
| ईंट अनुपात | 1 : 2 : 4, पकी ईंट, सभी स्थलों पर समान |
| जल निकासी | ढकी हुई, ढालदार, निरीक्षण गड्ढों सहित |
| विशाल स्नानागार | मोहनजोदड़ो, बिटुमन से जलरोधक |
| बिना दुर्ग वाला स्थल | चन्हूदड़ो |
समाज - प्रमाण क्या बताते हैं
- न मंदिर मिले, न राजकीय मकबरे, न कोई निश्चित महल - मिस्र और मेसोपोटामिया की तुलना में यह असामान्य है।
- घरों के आकार, कब्र की वस्तुओं और आभूषणों में अंतर सामाजिक भेद दिखाता है, पर अत्यधिक असमानता नहीं।
- शव आमतौर पर गड्ढों में उत्तर-दक्षिण दिशा में दफनाए जाते थे, साथ में मृद्भांड और कभी तांबे का दर्पण या मनके; हड़प्पा का कब्रिस्तान R-37 सबसे प्रसिद्ध है।
- शिल्प विशेषज्ञता थी - मनका बनाने वाले, मुहर तराशने वाले, कुम्हार और धातुकर्मी अलग-अलग क्षेत्रों में रहते थे।
परीक्षा में कैसे आता है
ईंट के अनुपात, विशाल स्नानागार की स्थिति और दुर्ग-निचला नगर विभाजन पर तथ्यात्मक प्रश्न आते हैं। कथन-आधारित प्रश्न पूछते हैं कि नालियां ढकी थीं या नहीं, मंदिर मिले या नहीं, और किस स्थल पर दुर्ग नहीं है। कब्रिस्तान R-37 एक बार-बार पूछी जाने वाली पंक्ति है।
UPSC / State PSC के लिए
मंदिर और राजकीय कब्रों की अनुपस्थिति एक बड़ी बहस खड़ी करती है - क्या एक ही राज्य था, कई शासक थे, या कोई शासक ही नहीं था? यह भी ध्यान रखें कि "दुर्ग" और "निचला नगर" पुरातत्वविदों के दिए नाम हैं, हड़प्पाई शब्द नहीं; और बाट-ईंट की एकरूपता ही केंद्रीय सत्ता का सबसे मजबूत तर्क है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ दुर्ग नगर का बड़ा हिस्सा था | ✓ निचला नगर बड़ा था; दुर्ग छोटा पर ऊंचा था
✗ नगरों में मुख्यतः कच्ची ईंट लगती थी | ✓ परिपक्व हड़प्पाई नगरों में 1:2:4 अनुपात की पकी ईंट लगती थी
✗ विशाल स्नानागार सार्वजनिक तरणताल था | ✓ इसे धार्मिक स्नान का स्थल माना जाता है
एक नजर में
- ग्रिड सड़क योजना, समकोण कटान, आयताकार खंड।
- दो भाग - पश्चिम में ऊंचा दुर्ग, पूर्व में बड़ा निचला नगर; चन्हूदड़ो में दुर्ग नहीं।
- सभी स्थलों पर 1:2:4 अनुपात की एक समान पकी ईंट।
- ढकी हुई नालियां, निरीक्षण गड्ढों सहित, घरों से पहले बिछाई गईं।
- मोहनजोदड़ो में विशाल स्नानागार और अन्नागार; कालीबंगा में अग्निकुंड।
- मंदिर या राजकीय मकबरे नहीं मिले; कब्रिस्तान R-37 हड़प्पा में है।
