ऊष्मीय प्रभाव और विद्युत शक्ति
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Electricity"
ऊष्मीय प्रभाव और विद्युत शक्ति
जब धारा किसी प्रतिरोधक से गुजरती है तो विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है। इसे धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं, और यह पारेषण लाइनों में हानि भी है तथा हीटर, इस्त्री, गीजर, टोस्टर और बल्ब का पूरा आधार भी।
जूल का नियम और शक्ति
- जूल का तापन नियम कहता है कि उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और धारा बहने के समय के अनुक्रमानुपाती होती है।
- इसलिए धारा बढ़ाने पर उत्पन्न ऊष्मा बहुत तेजी से बढ़ती है, क्योंकि वह धारा के वर्ग पर निर्भर है।
- विद्युत शक्ति वह दर है जिससे विद्युत ऊर्जा खपती है और यह P = VI से मिलती है।
- ओम के नियम का उपयोग कर शक्ति को I²R या V²/R के रूप में भी लिखा जा सकता है।
- शक्ति का SI मात्रक वाट है, और एक किलोवाट एक हजार वाट के बराबर है।
- खपत विद्युत ऊर्जा शक्ति गुणा समय है, और व्यावसायिक मात्रक किलोवाट घंटा है।
फ्यूज, उपकरण और सुरक्षा
- फ्यूज सुरक्षा युक्ति है जो कम गलनांक और अधिक प्रतिरोध वाले तार से बनी होती है।
- यह विद्युन्मय तार के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ता है, ताकि धारा सुरक्षित मान से अधिक होने पर वह पिघलकर परिपथ तोड़ दे।
- अधिक धारा अतिभारण से आती है, जब बहुत सारे उपकरण साथ धारा लें, तथा लघु पथन से, जब विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे छू जाएं।
- तापन उपकरणों में तापन तत्व के लिए नाइक्रोम जैसी मिश्रातु लगती है, क्योंकि उसका प्रतिरोध अधिक, गलनांक बहुत ऊंचा है और वह सरलता से ऑक्सीकृत नहीं होती।
- विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन से बनता है, जिसका गलनांक बहुत ऊंचा है।
- भू संपर्कण उपकरण की धातु बॉडी को पृथ्वी से जोड़ता है ताकि कोई रिसती धारा सुरक्षित रूप से बह जाए।
| सूत्र | क्या देता है | मात्रक |
|---|---|---|
| P = VI | विद्युत शक्ति | वाट |
| P = I²R | धारा और प्रतिरोध से शक्ति | वाट |
| ऊर्जा = P × t | विद्युत ऊर्जा | किलोवाट घंटा |
फ्यूज — कम गलनांक का सुरक्षा तार जो विद्युन्मय तार के साथ श्रेणी क्रम में लगता है और धारा अधिक होने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है।
Exam me kaise aata hai
- विद्युत बल्ब का तंतु किससे बनता है — टंगस्टन
- हीटर का तापन तत्व प्रायः किससे बनता है — नाइक्रोम
- फ्यूज किस प्रकार जोड़ा जाता है — विद्युन्मय तार के साथ श्रेणी क्रम में
- उत्पन्न ऊष्मा किसके वर्ग पर निर्भर है — धारा
UPSC/State PSC ke liye
- विद्युत का पारेषण उच्च वोल्टेज और कम धारा पर ठीक इसीलिए होता है कि ऊष्मा हानि धारा के वर्ग पर निर्भर है, इसलिए कम धारा का अर्थ कहीं कम हानि है।
- फ्यूज परिपथ की रक्षा करता है जबकि भू संपर्कण व्यक्ति की, इसलिए दोनों के उद्देश्य अलग हैं और दोनों आवश्यक हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ फ्यूज समांतर क्रम में जुड़ता है | फ्यूज विद्युन्मय तार के साथ श्रेणी क्रम में जुड़ता है | ✓
✗ भू संपर्कण और फ्यूज एक ही काम करते हैं | फ्यूज परिपथ की और भू संपर्कण उपयोगकर्ता की रक्षा करता है | ✓
✗ धारा दोगुनी करने पर ऊष्मा दोगुनी होती है | ऊष्मा धारा के वर्ग पर निर्भर है, इसलिए वह चार गुनी हो जाती है | ✓
Ek nazar me
- उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय पर निर्भर है।
- शक्ति VI के बराबर है, और ऊर्जा किलोवाट घंटे में ली जाती है।
- फ्यूज अधिक धारा पर पिघलता है; अतिभारण और लघु पथन इसके कारण हैं।
- हीटर में नाइक्रोम और बल्ब तंतु में टंगस्टन लगता है।
