भारत की जलवायु प्रतिक्रिया
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • संसाधन संबंधी अध्याय
भारत की जलवायु प्रतिक्रिया
भारत के सामने दोहरी समस्या है। वह अपनी लंबी तटरेखा, हिमालयी हिमनदों और मानसून पर निर्भरता के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील देशों में है, फिर भी उसे जीवन स्तर ऊंचा करने के लिए कहीं अधिक ऊर्जा भी चाहिए।
भारत संवेदनशील क्यों है
- लंबी तटरेखा और घने बसे डेल्टा समुद्र स्तर वृद्धि, तूफानी लहर और लवण जल प्रवेश के सामने खुले हैं।
- हिमालयी हिमनद बड़ी नदियों को जल देते हैं, इसलिए उनका पीछे हटना उत्तरी मैदानों की जल आपूर्ति पर संकट है।
- कृषि मानसून पर निर्भर है, इसलिए उसके समय या बल में परिवर्तन खाद्य उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है।
- लाखों लोग वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं और उनमें एक खराब वर्ष झेलने की क्षमता बहुत कम है।
- नगरों को लू, नगरीय बाढ़ और जल संकट एक साथ झेलने पड़ते हैं।
- पूर्वी तट के चक्रवात और पहाड़ों में हिमनद झील विस्फोट बाढ़ अधिक विनाशकारी होते जा रहे हैं।
- निर्धन परिवार सर्वाधिक जोखिम में हैं, क्योंकि किसी आघात से उबरने की क्षमता उनमें सबसे कम है।
भारत की प्रतिक्रिया
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, विशेषकर सौर और पवन, तेजी से बढ़ी है और अब ऊर्जा नियोजन का केंद्रीय भाग है।
- उपकरणों, भवनों और उद्योग में ऊर्जा दक्षता उत्सर्जन और लागत दोनों घटाती है।
- वनरोपण और क्षरित भूमि का पुनरुद्धार अवशोषित कार्बन बढ़ाते तथा मृदा और जल सुधारते हैं।
- ग्रामीण घरों में स्वच्छ रसोई ईंधन भीतरी प्रदूषण और उत्सर्जन दोनों घटाता है।
- सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो रेल और विद्युत वाहन तेजी से बढ़ते परिवहन क्षेत्र को संबोधित करते हैं।
- कृषि में अनुकूलन सूखा और बाढ़ सहनशील किस्में, सूक्ष्म सिंचाई, फसल बीमा और मौसम सलाह अपनाता है।
- चक्रवात और बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रणालियों ने जनहानि पहले ही तेजी से घटाई है, जो अनुकूलन को काम करते हुए दिखाता है।
| क्षेत्र | कार्रवाई | लाभ |
|---|---|---|
| ऊर्जा | सौर और पवन का विस्तार | विद्युत से उत्सर्जन कम |
| दक्षता | बेहतर उपकरण और भवन | उत्सर्जन और लागत दोनों कम |
| वन | वनरोपण और पुनरुद्धार | कार्बन अवशोषण, मृदा और जल |
| कृषि | सहनशील किस्में, सूक्ष्म सिंचाई | खराब वर्ष से बचाव |
अनुकूलन — पहले से चल रहे जलवायु परिवर्तनों से हानि घटाने के लिए पद्धतियों, तंत्रों और ढांचे में समायोजन।
Exam me kaise aata hai
- भारत के किस क्षेत्र के हिमनद बड़ी नदियों को जल देते हैं — हिमालय
- भारतीय कृषि किस पर सर्वाधिक निर्भर है — मानसून
- पहले से हो रहे परिवर्तनों से समायोजन कहलाता है — अनुकूलन
- कौन सा उपाय उत्सर्जन और लागत दोनों घटाता है — ऊर्जा दक्षता
UPSC/State PSC ke liye
- भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम है जबकि कुल उत्सर्जन बड़ा है, और ठीक इसीलिए वह समता का तर्क देते हुए स्वयं भी कार्रवाई करता है।
- पूर्व चेतावनी प्रणालियां दिखाती हैं कि अनुकूलन अपेक्षाकृत कम लागत पर जीवन बचा सकता है, जिससे वे उपलब्ध सर्वाधिक कुशल जलवायु निवेशों में आती हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ शमन और अनुकूलन विकल्प हैं | दोनों साथ चाहिए | ✓
✗ जलवायु परिवर्तन सभी परिवारों को समान रूप से प्रभावित करता है | निर्धन परिवार सर्वाधिक जोखिम में और उबरने में सबसे कम सक्षम हैं | ✓
✗ अकेली नवीकरणीय ऊर्जा समस्या हल कर देती है | दक्षता, वन, परिवहन और अनुकूलन भी आवश्यक हैं | ✓
Ek nazar me
- भारत तट, हिमनद और मानसून निर्भरता के कारण अत्यधिक संवेदनशील है।
- प्रतिक्रिया में नवीकरणीय ऊर्जा, दक्षता, वनरोपण और स्वच्छ ईंधन आते हैं।
- कृषि सहनशील किस्मों, सूक्ष्म सिंचाई और सलाह से अनुकूलन करती है।
- पूर्व चेतावनी प्रणालियां पहले ही जनहानि तेजी से घटा चुकी हैं।
Ab practice karein
Climate change se har exam me India specific questions bhi aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi practice karein.
