1950 से 1990 तक की अर्थव्यवस्था
NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Indian Economy 1950-1990"
1950 से 1990 तक की अर्थव्यवस्था
1950 से 1990 के बीच भारत ने राज्य निर्देशित नियोजित औद्योगीकरण की रणनीति अपनाई। भारी उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित था, निजी उद्योग को लगभग हर निर्णय के लिए अनुमति चाहिए थी, और आयात प्रतिबंधित थे ताकि घरेलू उद्योग उस संरक्षण में बढ़ सके।
औद्योगिक नीति और लाइसेंस व्यवस्था
- औद्योगिक नीति ने प्रमुख क्षेत्र सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किए और शेष विनियमन के अधीन निजी उद्यम पर छोड़े।
- हर निजी फर्म को उत्पादन शुरू करने, क्षमता बढ़ाने, उत्पाद बदलने या स्थान बदलने के लिए लाइसेंस चाहिए था।
- इस व्यवस्था को लोकप्रिय रूप से लाइसेंस और परमिट व्यवस्था कहा गया।
- घोषित उद्देश्य आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण रोकना और निवेश को पिछड़े क्षेत्रों की ओर मोड़ना था।
- व्यवहार में इसने निर्णय धीमे किए, कार्यकुशलता हतोत्साहित की और अनुमति पाने की होड़ को बढ़ावा दिया।
- लघु उद्योग को उत्पादों की एक सूची विशेष रूप से आरक्षित करके संरक्षण दिया गया।
- बड़े औद्योगिक घराने एकाधिकार और आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकने वाले अलग कानून के अधीन आए।
- विदेशी निवेश पर कड़े प्रतिबंध थे और तकनीक अधिकतर देश में विकसित करनी या शर्तों पर आयात करनी पड़ती थी।
व्यापार नीति और उसके प्रभाव
- आयात प्रतिस्थापन का अर्थ था जो पहले आयात होता था उसे घर में बनाना, ताकि विदेशी मुद्रा बचे।
- इसे ऊंचे प्रशुल्क और आयात पर कठोर कोटा से लागू किया गया।
- संरक्षण से पूंजीगत वस्तु और रसायन सहित व्यापक औद्योगिक आधार विकसित हुआ।
- प्रतिस्पर्धा न होने से गुणवत्ता प्रायः कम और लागत ऊंची बनी रही।
- कुछ क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रम हानि में रहकर भी चलते रहे, क्योंकि रोजगार और रणनीतिक कारण लाभ से भारी पड़े।
- इस काल की वृद्धि मध्यम रही, और अर्थव्यवस्था मानसून तथा बाहरी सहायता पर बहुत निर्भर रही।
| नीति | उपकरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| औद्योगिक लाइसेंस | हर निर्णय के लिए अनुमति | धीमा विस्तार, अनुमति की होड़ |
| आयात प्रतिस्थापन | प्रशुल्क और कोटा | व्यापक आधार पर कम प्रतिस्पर्धा |
| सार्वजनिक क्षेत्र प्राथमिकता | आरक्षित उद्योग | ढांचा बना, कुछ हानि भी |
| लघु उद्योग आरक्षण | उत्पाद आरक्षण सूची | रोजगार बना, पैमाना सीमित |
आयात प्रतिस्थापन — आयातित वस्तुओं के स्थान पर घरेलू उत्पादन की नीति, जिसे प्रशुल्क और कोटा से संरक्षण मिलता है।
Exam me kaise aata hai
- पहले आयातित वस्तु को घर में बनाना कहलाता है — आयात प्रतिस्थापन
- फर्म शुरू या विस्तार करने की अनुमति कहलाती थी — लाइसेंस
- आयात पर मात्रात्मक सीमा कहलाती है — कोटा
- प्रमुख उद्योग किस क्षेत्र के लिए आरक्षित थे — सार्वजनिक क्षेत्र
UPSC/State PSC ke liye
- संरक्षण किसी शिशु उद्योग को सीखने में सहायता दे सकता है, पर समय सीमा बिना संरक्षण प्रतिस्पर्धी बनने का दबाव ही समाप्त कर देता है।
- लाइसेंस व्यवस्था निवेश को दिशा देने के लिए बनी थी, पर अंततः उन्हें पुरस्कृत करने लगी जो अनुमति पाने में निपुण थे, न कि उत्पादन में।
Yahan confuse hote hain
✗ आयात प्रतिस्थापन का अर्थ सभी आयात पर रोक है | इसका अर्थ आयात का क्रमशः घरेलू उत्पादन से प्रतिस्थापन है | ✓
✗ लाइसेंस केवल बड़ी फर्मों पर लागू था | यह निजी उद्योग पर व्यापक रूप से, विस्तार निर्णयों सहित लागू था | ✓
✗ सार्वजनिक क्षेत्र ने केवल हानि दी | कई उपक्रमों ने महत्वपूर्ण ढांचा और क्षमता बनाई | ✓
Ek nazar me
- प्रमुख उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित थे।
- निजी फर्मों को लगभग हर निर्णय के लिए लाइसेंस चाहिए था।
- आयात प्रतिस्थापन ने प्रशुल्क और कोटा से उद्योग को संरक्षण दिया।
- व्यापक आधार बना पर प्रतिस्पर्धा और वृद्धि कमजोर रहीं।
