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भारतीय संघवाद और शक्ति विभाजन

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 10 - Democratic Politics II • NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 7

भारतीय संघवाद और शक्ति विभाजन

अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ कहता है, समझौते से बना परिसंघ नहीं। संविधान संरचना में संघीय पर एकात्मक झुकाव वाला है, इसीलिए विद्वान इसे अर्ध-संघीय या मजबूत केंद्र वाला संघ कहते हैं।

संघीय और एकात्मक विशेषताएं

संघीय विशेषताएंएकात्मक विशेषताएं
दो स्तर की सरकार, संघ और राज्यअनुच्छेद 3 में संसद राज्यों के नाम और सीमाएं बदल सकती है
लिखित और सर्वोच्च संविधानपूरे देश के लिए एक ही संविधान
सातवीं अनुसूची में शक्ति विभाजनअवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास
विवाद सुलझाने वाली स्वतंत्र न्यायपालिकाएकीकृत न्यायपालिका, दो पदानुक्रम नहीं
राज्यों के सदन वाली द्विसदनीय संसदसभी भारतीयों के लिए इकहरी नागरिकता
संघीय प्रावधानों का कठोर संशोधनअखिल भारतीय सेवाओं पर केंद्र का नियंत्रण
राजस्व बंटवारे के लिए वित्त आयोगआपात प्रावधान व्यवस्था को एकात्मक बना सकते हैं
  • अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्य बनाने और सीमाएं बदलने देता है, और संबंधित राज्य की सहमति बाध्यकारी नहीं है - राष्ट्रपति को केवल विधेयक उसकी राय के लिए भेजना होता है।
  • भारत में संघवाद ऐसे देश के लिए बना जिसे जोड़े रखना था, न कि राज्यों के मिलकर बनने से - इसी से मजबूत केंद्र की व्याख्या होती है।

तीन सूचियां

  • सातवीं अनुसूची विषयों को तीन सूचियों में बांटती है।
  • संघ सूची - मूल रूप में 97 विषय, जिनमें रक्षा, विदेश मामले, रेल, बैंकिंग, मुद्रा, परमाणु ऊर्जा, नागरिकता, और डाक-तार शामिल हैं। इन पर केवल संसद कानून बना सकती है।
  • राज्य सूची - मूल रूप में 66 विषय, जिनमें लोक व्यवस्था, पुलिस, लोक स्वास्थ्य, कृषि, भूमि, मत्स्य पालन और स्थानीय शासन शामिल हैं। सामान्यतः केवल राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं।
  • समवर्ती सूची - मूल रूप में 47 विषय, जिनमें शिक्षा, वन, दांडिक विधि, विवाह और विवाह विच्छेद, दिवालियापन, तथा आर्थिक व सामाजिक नियोजन शामिल हैं। दोनों कानून बना सकते हैं।
  • अनुच्छेद 254 - समवर्ती विषय पर केंद्र और राज्य के कानून में टकराव हो तो केंद्र का कानून प्रबल होता है, जब तक राज्य के कानून को राष्ट्रपति की अनुमति न मिली हो।
  • अनुच्छेद 248 - किसी सूची में न आने वाले विषयों की अवशिष्ट शक्तियां संसद के पास हैं।
  • 1976 के 42वें संशोधन ने शिक्षा, वन, बाट और माप, वन्य पशु-पक्षियों का संरक्षण, तथा न्याय प्रशासन को राज्य सूची से समवर्ती सूची में डाला।

संसद राज्य विषय पर कब कानून बना सकती है

  • अनुच्छेद 249 - राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से प्रस्ताव पारित करे कि कोई राज्य सूची विषय राष्ट्रीय हित का है।
  • अनुच्छेद 250 - राष्ट्रीय आपात के दौरान।
  • अनुच्छेद 252 - जब दो या अधिक राज्य विधानमंडल अनुरोध करें, और तब कानून उन राज्यों तथा उसे अपनाने वाले अन्य राज्य पर लागू होता है।
  • अनुच्छेद 253 - किसी अंतरराष्ट्रीय संधि या समझौते को लागू करने के लिए।
  • अनुच्छेद 356 - जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो।

परीक्षा में कैसे आता है

विषय और सूची का सुमेलित कीजिए बहुत आम है - पुलिस राज्य सूची में, रक्षा संघ सूची में, शिक्षा समवर्ती में। तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि अवशिष्ट शक्तियां किसके पास हैं और शिक्षा किस संशोधन से हटी। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि अनुच्छेद 3 में राज्य की सहमति आवश्यक है या नहीं।

UPSC / State PSC के लिए

भारतीय संघवाद को जोड़कर रखने वाला संघवाद बताइए - यह एक ही प्रशासनिक इकाई के विकेंद्रीकरण से बना, स्वतंत्र इकाइयों के मिलने से नहीं, और इसी से अनुच्छेद 3, अवशिष्ट शक्ति, राज्यपाल तथा आपात प्रावधान समझ आते हैं। असमान संघवाद भी लिखें - अनुच्छेद 371 के विशेष प्रावधान तथा पांचवीं और छठी अनुसूची अलग-अलग क्षेत्रों को अलग शर्तें देती हैं।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

अवशिष्ट शक्तियां राज्यों के पास हैं  |   ये अनुच्छेद 248 में संसद के पास हैं

शिक्षा हमेशा से समवर्ती विषय रही है  |   यह 1976 के 42वें संशोधन से राज्य सूची से समवर्ती में आई

राज्य की सीमा बदलने के लिए उसकी सहमति आवश्यक है  |   उसकी राय मांगी जाती है पर वह संसद पर बाध्यकारी नहीं

एक नजर में

  • अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ कहता है; व्यवस्था मजबूत केंद्र वाली संघीय है।
  • अनुच्छेद 3 में संसद राज्य की बाध्यकारी सहमति बिना सीमाएं बदल सकती है।
  • सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां - संघ, राज्य और समवर्ती।
  • अनुच्छेद 254 समवर्ती टकराव में केंद्र के कानून को प्रधानता देता है।
  • अनुच्छेद 248 अवशिष्ट शक्तियां संसद को देता है।
  • 42वें संशोधन ने शिक्षा, वन तथा बाट-माप को समवर्ती सूची में डाला।
  • संसद अनुच्छेद 249, 250, 252, 253 और 356 में राज्य विषय पर कानून बना सकती है।

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