हिंद-यवन, शक और कुषाण
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2
हिंद-यवन, शक और कुषाण
मौर्यों और गुप्तों के बीच उत्तर-पश्चिम पर मध्य एशियाई और यूनानी शासकों की शृंखला रही। इन्होंने भारत को पहले चित्रांकित सिक्के, पहला लंबा संस्कृत अभिलेख, गांधार कला शैली और मध्य एशियाई व्यापार से स्थायी जुड़ाव दिया।
हिंद-यवन
- इन्हें बैक्ट्रियाई यूनानी भी कहते हैं; ये लगभग 200 ईसा पूर्व के बाद भारत आए।
- ये भारत में सोने के सिक्के चलाने वाले पहले शासक थे, और सिक्कों पर राजा का चित्र और नाम डालने वाले भी पहले - इसीलिए इनकी तिथि श्रृंखला इतनी स्पष्ट है।
- मिनांडर, जिसे भारतीय ग्रंथों में मिलिंद कहा गया, सागल (सियालकोट) से शासन करता था। भिक्षु नागसेन से उसका संवाद पालि ग्रंथ मिलिंदपन्हो में दर्ज है, जिसके बाद वह बौद्ध बन गया।
- विदिशा के पास बेसनगर का हेलियोडोरस स्तंभ एक यूनानी राजदूत ने लगवाया, जो स्वयं को वासुदेव का भक्त भागवत कहता है - यह भागवत संप्रदाय का सबसे पुराना स्पष्ट प्रमाण है।
- यूनानी संपर्क ने भारतीय खगोल और मुद्रा को प्रभावित किया; फलित ज्योतिष के लिए होराशास्त्र शब्द इसी का संकेत है।
शक और पह्लव
- शक, यानी सीथियन, यूनानियों के बाद आए और कई शाखाओं में शासन किया; सबसे महत्वपूर्ण उज्जैन के पश्चिमी क्षत्रप थे।
- रुद्रदामन प्रथम इनका सबसे प्रसिद्ध राजा है। लगभग 150 ईस्वी का उसका जूनागढ़ शिलालेख शुद्ध संस्कृत में पहला लंबा अभिलेख है, जिसने सरकारी अभिलेखों की प्राकृत परंपरा तोड़ी।
- इसी अभिलेख में दर्ज है कि उसने सुदर्शन झील की मरम्मत कराई, जो चंद्रगुप्त मौर्य के समय बनी और अशोक के समय सुधारी गई थी।
- 78 ईस्वी से शुरू होने वाला शक संवत भारत के राष्ट्रीय पंचांग का आधार है।
- उज्जैन के जिस शासक ने शकों को हराया, उसे परंपरा में 57 ईसा पूर्व के विक्रम संवत से जोड़ा जाता है।
- पह्लवों ने थोड़े समय शासन किया; गोंडोफर्नीज के काल में परंपरा के अनुसार संत थॉमस भारत आए।
कुषाण
- मूलतः मध्य एशिया के यूची, इन्होंने मध्य एशिया से गंगा मैदान तक साम्राज्य बनाया, जिसकी राजधानियां पुरुषपुर (पेशावर) और मथुरा थीं।
- विम कडफिसेस ने बड़ी संख्या में सोने के सिक्के चलाए और उन पर शिव और नंदी अंकित कराए।
- कनिष्क, जिसका राज्यारोहण सामान्यतः 78 ईस्वी माना जाता है, सबसे महान कुषाण शासक है और उसे शक संवत शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
- उसने कश्मीर में चतुर्थ बौद्ध संगीति कराई और महायान बौद्ध धर्म के मध्य एशिया तथा चीन तक प्रसार में सहयोग दिया।
- उसके दरबार से बुद्धचरित के लेखक अश्वघोष, वैद्य चरक, दार्शनिक नागार्जुन और विद्वान वसुमित्र जुड़े हैं।
| शासक वर्ग | प्रमुख शासक | किसके लिए याद |
|---|---|---|
| हिंद-यवन | मिनांडर | मिलिंदपन्हो, पहले चित्रांकित सिक्के |
| शक | रुद्रदामन प्रथम | जूनागढ़ संस्कृत अभिलेख, सुदर्शन झील |
| पह्लव | गोंडोफर्नीज | संत थॉमस के भारत आगमन की परंपरा |
| कुषाण | कनिष्क | चतुर्थ संगीति, शक संवत, गांधार कला |
कुषाण काल की कला और व्यापार
- गांधार शैली ने बौद्ध विषयवस्तु को यूनानी-रोमन तकनीक से जोड़ा और धूसर शिस्ट में तराशा।
- मथुरा शैली चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर में काम करती थी और उसने भारतीय शैली में बुद्ध की पहली मूर्तियां बनाईं, साथ ही जैन और ब्राह्मण प्रतिमाएं भी।
- कुषाण स्वर्ण सिक्के व्यापक रूप से चले, और साम्राज्य ने रेशम मार्ग पर नियंत्रण रखकर चीन तथा रोम के बीच माल पर कर लिया।
- इस काल में भारी रोमन व्यापार हुआ - भारतीय वस्त्र, मसाले और रत्न पश्चिम गए और रोमन स्वर्ण पूर्व आया।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि पहले सोने के सिक्के किसने चलाए, पहला लंबा संस्कृत अभिलेख कौन सा है, और चतुर्थ संगीति कहां हुई। सुमेलित कीजिए में शासक और उपलब्धि जुड़ती है। कथन-आधारित प्रश्न शक और विक्रम संवत की तिथियां जांचते हैं, जो सबसे आम जाल है।
UPSC / State PSC के लिए
जूनागढ़ अभिलेख दो कारणों से महत्वपूर्ण है - यह सरकारी भाषा के प्राकृत से संस्कृत में बदलाव का चिह्न है, और यह चार शताब्दियों तक तीन वंशों द्वारा एक सिंचाई कार्य के निरंतर रखरखाव को दर्ज करता है। दोनों बिंदु प्रशासन और संस्कृत के इतिहास वाले प्रश्नों में काम आते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ विक्रम संवत 78 ईस्वी से शुरू होता है | ✓ विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व से; शक संवत 78 ईस्वी से
✗ कनिष्क की राजधानी केवल मथुरा थी | ✓ मुख्य राजधानी पुरुषपुर थी, मथुरा दूसरा केंद्र
✗ मथुरा शैली में धूसर शिस्ट लगा | ✓ मथुरा में लाल बलुआ पत्थर; गांधार में धूसर शिस्ट
एक नजर में
- हिंद-यवनों ने भारत में पहले सोने के और पहले चित्रांकित सिक्के चलाए।
- मिनांडर यानी मिलिंद, नागसेन के साथ संवाद मिलिंदपन्हो में दर्ज।
- बेसनगर का हेलियोडोरस स्तंभ भागवत संप्रदाय का प्रारंभिक प्रमाण।
- रुद्रदामन का लगभग 150 ईस्वी का जूनागढ़ अभिलेख पहला लंबा संस्कृत अभिलेख।
- शक संवत 78 ईस्वी राष्ट्रीय पंचांग; विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व से।
- कनिष्क ने चतुर्थ संगीति कराई, महायान को संरक्षण दिया, पुरुषपुर से शासन किया।
