प्रेरण, जनित्र और घरेलू परिपथ
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Magnetic Effects of Electric Current"
प्रेरण, जनित्र और घरेलू परिपथ
यदि धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है, तो उल्टा भी होता है: बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा उत्पन्न करता है। यही विद्युत चुंबकीय प्रेरण है, जिसे फैराडे ने खोजा, और आधुनिक विद्युत उत्पादन पूरी तरह इसी पर टिका है।
प्रेरण और जनित्र
- जब किसी चालक को चुंबकीय क्षेत्र में चलाया जाए, या उसके चारों ओर क्षेत्र बदले, तो चालक में धारा प्रेरित हो जाती है।
- प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम से मिलती है।
- विद्युत जनित्र इसी सिद्धांत से यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
- इसमें चुंबकीय क्षेत्र में घूमती कुंडली होती है; घूर्णन से कुंडली से गुजरता क्षेत्र बदलता है और धारा प्रेरित होती है।
- प्रत्यावर्ती धारा समय-समय पर अपनी दिशा उलटती है, जबकि दिष्ट धारा केवल एक दिशा में बहती है।
- भारतीय घरों में आपूर्ति 50 हर्ट्ज की प्रत्यावर्ती धारा है, अर्थात दिशा हर सेकंड पचास बार उलटती है।
- आपूर्ति के लिए प्रत्यावर्ती धारा इसलिए ली जाती है कि उसे कम हानि के साथ दूर तक भेजा जा सकता है और उसका वोल्टेज सरलता से बदला जा सकता है।
घरेलू तारबंदी और सुरक्षा
- घरेलू आपूर्ति तीन तारों से घर पहुंचती है: विद्युन्मय, उदासीन और भू संपर्क।
- विद्युन्मय तार आपूर्ति वोल्टेज लाता है, उदासीन परिपथ पूरा करता है, और भू संपर्क तार भूमि से जुड़ी सुरक्षा है।
- स्विच और फ्यूज सदैव विद्युन्मय तार में लगते हैं, ताकि स्विच बंद करने पर आपूर्ति वास्तव में कट जाए।
- उपकरण समांतर क्रम में जुड़ते हैं ताकि हर एक को पूरा वोल्टेज मिले और वह स्वतंत्र रूप से चले।
- अतिभारण तब होता है जब बहुत सारे उपकरण साथ धारा लें, और लघु पथन तब जब विद्युन्मय और उदासीन तार छू जाएं।
- भू संपर्क तार किसी भी रिसती धारा को सुरक्षित रूप से भूमि में ले जाता है और धातु बॉडी से लगने वाले तीव्र झटके को रोकता है।
- अब फ्यूज के स्थान पर लघु परिपथ वियोजक प्रयुक्त होते हैं, क्योंकि उन्हें बदलने के बजाय फिर चालू किया जा सकता है।
| तार | कार्य | सामान्य रंग परंपरा |
|---|---|---|
| विद्युन्मय | आपूर्ति वोल्टेज लाता है | लाल या भूरा |
| उदासीन | परिपथ पूरा करता है | काला या नीला |
| भू संपर्क | भूमि से सुरक्षा संपर्क | हरा |
विद्युत चुंबकीय प्रेरण — चालक के चारों ओर बदलते चुंबकीय क्षेत्र से उसमें धारा का उत्पन्न होना।
Exam me kaise aata hai
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसने खोजा — फैराडे
- प्रेरित धारा की दिशा किस नियम से मिलती है — फ्लेमिंग दक्षिण हस्त नियम
- भारतीय घरों में आपूर्ति की आवृत्ति — 50 हर्ट्ज
- फ्यूज और स्विच किस तार में लगते हैं — विद्युन्मय तार
UPSC/State PSC ke liye
- पारेषण में प्रत्यावर्ती धारा इसलिए चुनी जाती है कि ट्रांसफॉर्मर उसका वोल्टेज दूर भेजने के लिए बढ़ा और उपयोग के लिए घटा सकते हैं, जो दिष्ट धारा में उतनी सरलता से संभव नहीं।
- स्विच विद्युन्मय तार में ही होना चाहिए, क्योंकि उदासीन में होने पर उपकरण बंद करने के बाद भी आपूर्ति विभव पर बना रहेगा।
Yahan confuse hote hain
✗ जनित्र विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है | वह मोटर है; जनित्र इसका उल्टा करता है | ✓
✗ स्विच उदासीन तार में लगाया जा सकता है | सुरक्षा के लिए वह विद्युन्मय तार में ही होना चाहिए | ✓
✗ भारत में घरेलू आपूर्ति दिष्ट धारा है | घरेलू आपूर्ति 50 हर्ट्ज की प्रत्यावर्ती धारा है | ✓
Ek nazar me
- बदलता चुंबकीय क्षेत्र धारा प्रेरित करता है, यही विद्युत चुंबकीय प्रेरण है।
- जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
- भारतीय घरेलू आपूर्ति 50 हर्ट्ज की प्रत्यावर्ती धारा है।
- विद्युन्मय, उदासीन और भू संपर्क तार; स्विच और फ्यूज सदैव विद्युन्मय में।
Ab practice karein
Electricity aur magnetism se har exam me formula aur concept dono aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi jaanchein.
