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अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाएं

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 12 • Fundamentals of Human Geography • अध्याय "International Trade" | NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संस्थाएं

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व व्यापार और वित्त को व्यवस्थित रखने के लिए कुछ संस्थाएं बनाई गईं, क्योंकि दोनों युद्धों के बीच के वर्षों ने दिखा दिया था कि प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन और व्यापार बाधाएं वैश्विक मंदी को कितना गहरा कर सकती हैं। भारत इन सभी का संस्थापक या आरंभिक सदस्य है।

प्रमुख संस्थाएं

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष विनिमय दर स्थिरता बनाए रखने और भुगतान संतुलन समस्या वाले सदस्यों को ऋण देने के लिए बना।
  • इसका ऋण प्रायः शर्तों के साथ आता है, जिनमें उधार लेने वाले देश को घाटा सुधारना और नीति में सुधार करना पड़ता है।
  • विश्व बैंक पुनर्निर्माण और बाद में विकास के वित्तपोषण के लिए बना, जो बुनियादी ढांचा, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए ऋण देता है।
  • विश्व व्यापार संगठन ने एक पुराने व्यापार समझौते का स्थान लिया और विश्व व्यापार के नियम संचालित करता है।
  • यह व्यापार वार्ता का मंच तथा सदस्यों के बीच विवाद निपटाने की व्यवस्था देता है।
  • इसके सिद्धांतों में व्यापारिक भागीदारों के बीच भेदभाव न करना और व्यापार बाधाओं को क्रमशः घटाना आते हैं।
  • मुक्त व्यापार क्षेत्र और सीमा शुल्क संघ जैसे क्षेत्रीय समूह भी इन संस्थाओं के साथ व्यापार को आकार देते हैं।

बहसें और भारत की स्थिति

  • आलोचक कहते हैं कि व्यापार नियम विकसित देशों के पक्ष में हैं, विशेषकर कृषि, उपदान और बौद्धिक संपदा में।
  • विकासशील देशों ने बेहतर बाजार पहुंच तथा खाद्य सुरक्षा और छोटे उत्पादकों के लिए नीतिगत गुंजाइश मांगी है।
  • समर्थक कहते हैं कि नियम आधारित व्यवस्था कमजोर देशों की रक्षा कच्ची मोलभाव शक्ति से बेहतर करती है।
  • ऋण के साथ जुड़ी शर्तों की आलोचना इस आधार पर हुई है कि वे व्यय कटौती थोपती हैं जो निर्धनों को हानि पहुंचाती है।
  • भारत ने इन मंचों का उपयोग अधिक न्यायपूर्ण शर्तों के लिए दबाव बनाने में किया है, साथ ही विश्व व्यापार और निवेश प्रवाह में भाग भी लिया है।
संस्थामुख्य कार्य
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोषविनिमय स्थिरता और भुगतान सहायता
विश्व बैंकविकास और परियोजना ऋण
विश्व व्यापार संगठनव्यापार नियम, वार्ता और विवाद निपटान

शर्तबंदी (Conditionality) — वे नीतिगत शर्तें जो उधार लेने वाले देश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पाने के लिए स्वीकार करनी पड़ती हैं।

Exam me kaise aata hai

  • भुगतान समस्या वाले देशों को कौन ऋण देता है — अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
  • विकास परियोजनाओं का वित्तपोषण कौन करता है — विश्व बैंक
  • विश्व व्यापार के नियम कौन संचालित करता है — विश्व व्यापार संगठन
  • ऋण के साथ जुड़ी नीतिगत शर्तें कहलाती हैं — शर्तबंदी

UPSC/State PSC ke liye

  • नियम आधारित व्यापार व्यवस्था कच्ची आर्थिक शक्ति के उपयोग को सीमित करती है, जो उन्हीं देशों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है जिनके पास वह शक्ति सबसे कम है।
  • शर्तबंदी विवादित है क्योंकि अल्पकालिक राजकोषीय सुधार और दीर्घकालिक विकास लक्ष्य नीति को विपरीत दिशाओं में खींच सकते हैं।

Yahan confuse hote hain

विश्व बैंक और मुद्रा कोष एक ही काम करते हैं | बैंक विकास के लिए ऋण देता है; कोष भुगतान संतुलन में सहायता करता है  |  

विश्व व्यापार संगठन घरेलू कर नीति तय करता है | यह सदस्यों के बीच व्यापार नियम संचालित करता है  |  

इनकी सदस्यता से सभी व्यापार बाधाएं समाप्त हो जाती हैं | बाधाएं वार्ता के माध्यम से क्रमशः घटाई जाती हैं  |  

Ek nazar me

  • मुद्रा कोष विनिमय स्थिरता और भुगतान समस्याओं में सहायता करता है।
  • विश्व बैंक विकास परियोजनाओं के लिए ऋण देता है।
  • विश्व व्यापार संगठन व्यापार नियम चलाता और विवाद निपटाता है।
  • बहसें नियमों की न्यायसंगतता और ऋण की शर्तबंदी पर केंद्रित हैं।

Ab practice karein

International trade aur BOP se har exam me concept questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi practice karein.

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