अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Environmental Issues" | NCERT कक्षा 12 • Political Science • अध्याय "Environment and Natural Resources"
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते
पर्यावरणीय समस्याएं सीमाएं पार करती हैं, इसलिए कोई देश उन्हें अकेले नहीं सुलझा सकता। 1970 के दशक के आरंभ से सम्मेलनों और संधियों की शृंखला ने सहयोग का ढांचा बनाया है, और इन सबका आवर्ती विवाद यही है कि धनी और निर्धन देशों के बीच भार कैसे न्यायसंगत रूप से बंटे।
प्रमुख सम्मेलन और संधियां
- 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन मानव पर्यावरण पर पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था।
- 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने देशों को ओजोन नाशक पदार्थ चरणबद्ध रूप से हटाने के लिए बाध्य किया।
- 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन से जलवायु अभिसमय, जैव विविधता अभिसमय और एजेंडा 21 निकले।
- 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल ने केवल विकसित देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य तय किए।
- 2015 के पेरिस समझौते ने भिन्न मार्ग लिया, जिसमें हर देश अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान स्वयं तय करता है।
- रामसर अभिसमय आर्द्रभूमि और CITES संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार समेटता है।
- प्रगति की समीक्षा और आगे की प्रतिबद्धताओं की वार्ता के लिए पक्षकारों का सम्मेलन नियमित रूप से होता है।
सिद्धांत और विवाद
- साझा पर भिन्नकृत उत्तरदायित्व केंद्रीय सिद्धांत है: समस्या सभी देशों की साझी है, पर जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक उत्सर्जन किया उन्हें अधिक करना होगा।
- विकसित देशों ने सस्ते जीवाश्म ईंधन पर औद्योगीकरण किया, इसलिए उनका ऐतिहासिक उत्तरदायित्व कहीं बड़ा है।
- विकासशील देशों का तर्क है कि उनका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम बना हुआ है और उन्हें विकास के लिए ऊर्जा चाहिए।
- इसलिए विकसित से विकासशील देशों को जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण हर समझौते का भाग रहते हैं।
- संधारणीय विकास लक्ष्य पर्यावरणीय लक्ष्यों को निर्धनता उन्मूलन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ते हैं।
- अनुपालन कमजोर कड़ी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पास प्रवर्तन शक्ति सीमित रहती है।
- भारत की स्थिति सदैव उत्तरदायित्व की स्वीकृति के साथ समता और विकास के अधिकार पर आग्रह जोड़ती रही है।
| समझौता | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| स्टॉकहोम सम्मेलन | 1972 | मानव पर्यावरण |
| मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल | 1987 | ओजोन नाशक पदार्थ |
| रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन | 1992 | जलवायु, जैव विविधता, एजेंडा 21 |
| पेरिस समझौता | 2015 | राष्ट्रीय निर्धारित जलवायु कार्रवाई |
साझा पर भिन्नकृत उत्तरदायित्व — वह सिद्धांत कि पर्यावरण का उत्तरदायित्व सभी देशों का साझा है पर उनकी क्षमता और ऐतिहासिक योगदान के अनुपात में।
Exam me kaise aata hai
- पृथ्वी शिखर सम्मेलन कब हुआ — 1992
- मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कब अपनाया गया — 1987
- कौन सा समझौता राष्ट्रीय निर्धारित योगदान अपनाता है — पेरिस समझौता
- मानव पर्यावरण पर पहला बड़ा सम्मेलन कहां हुआ — स्टॉकहोम
UPSC/State PSC ke liye
- क्योटो ने केवल विकसित देशों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य रखे, जबकि पेरिस ने हर देश से अपना लक्ष्य स्वयं तय कराया, जिसमें विधिक कठोरता के बदले व्यापक भागीदारी ली गई।
- प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और ऐतिहासिक उत्सर्जन उत्तरदायित्व की बहुत भिन्न तस्वीर देते हैं, और ठीक इसीलिए समता की बहस कभी नहीं थमती।
Yahan confuse hote hain
✗ क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता एक ही ढंग से काम करते हैं | क्योटो ने विकसित देशों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य रखे; पेरिस स्वयं तय राष्ट्रीय योगदान लेता है | ✓
✗ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है | वह ओजोन नाशक पदार्थों से जुड़ा है | ✓
✗ सभी देशों का उत्तरदायित्व समान है | उत्तरदायित्व साझा पर भिन्नकृत है | ✓
Ek nazar me
- स्टॉकहोम 1972, मॉन्ट्रियल 1987, रियो 1992 और पेरिस 2015 मील के पत्थर हैं।
- क्योटो ने विकसित देशों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य; पेरिस राष्ट्रीय योगदान लेता है।
- साझा पर भिन्नकृत उत्तरदायित्व केंद्रीय सिद्धांत है।
- जलवायु वित्त, तकनीक हस्तांतरण और समता मुख्य विवाद बने हुए हैं।
Ab practice karein
Climate change aur global agreements se har exam me date based questions aate hain. ExamAtlas ke mock test se abhi jaanchein.
