खलजी वंश और अलाउद्दीन के सुधार
NCERT Class 7 - Our Pasts II • NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II
खलजी वंश और अलाउद्दीन के सुधार
खलजियों ने 1290 से 1320 तक शासन किया। अलाउद्दीन खलजी, जिसने 1296-1316 तक शासन किया, पहला सुल्तान था जिसने बाजार, भू-राजस्व और सेना पर सीधे नियंत्रण का प्रयास किया - ये सभी उपाय मंगोलों के विरुद्ध स्थायी सेना के खर्च के लिए थे।
विजय अभियान
- जलालुद्दीन खलजी ने वंश की स्थापना की; उसका भतीजा और दामाद अलाउद्दीन देवगिरि छापे के बाद सत्ता में आया।
- उत्तर में उसने गुजरात, रणथंभौर, चित्तौड़, मालवा और जालोर जीते।
- दक्षिण में उसके सेनापति मलिक काफूर ने देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र और मदुरै पर अभियान किए, और विलय के बजाय कर वसूला।
- उसने बार-बार मंगोल आक्रमणों को हराया, और यही उसके बाकी सभी सुधारों का व्यावहारिक कारण है।
- षड्यंत्र रोकने के लिए उसने अमीरों के आपसी उत्सव, वैवाहिक संबंध और मद्यपान पर रोक लगाई, और सशक्त गुप्तचर तंत्र बनाया।
बाजार नियंत्रण
- आवश्यक वस्तुओं के दाम राज्य तय करता था, बाजार पर नहीं छोड़े जाते थे।
- तीन बाजार नियंत्रित थे - अनाज का, कपड़े और निर्मित वस्तुओं का जिसमें सराय अद्ल आता था, और घोड़े, दास तथा पशुओं का।
- इसका विभाग दीवान-ए-रियासत था, जिसका प्रमुख नायब-ए-रियासत होता था, और हर बाजार में शहना-ए-मंडी नामक अधीक्षक रहता था।
- अनाज राजकीय अन्नागारों में जमा होता और दाम बढ़ने पर निकाला जाता; जमाखोरी पर कठोर दंड था।
- व्यापारियों को पंजीकरण कराना पड़ता था, और तौल में बेईमानी पर उतने ही वजन का मांस काटने का दंड था - इसी से व्यवस्था की कठोरता का अंदाजा लगता है।
- उद्देश्य लोक कल्याण नहीं था, बल्कि यह कि सैनिक निश्चित नकद वेतन में गुजारा कर सकें और महंगाई से कोष न खाली हो।
राजस्व और सैन्य सुधार
- भू-राजस्व बढ़ाकर उपज का आधा किया गया, जिसका आकलन मौके पर अनुमान के बजाय भूमि की पैमाइश (मसाहत) से होता था।
- मध्यस्थों - खुत, मुकद्दम और चौधरी - के विशेषाधिकार छीन लिए गए, जिससे वे भी आम किसान जितना कर देने लगे।
- चराई (चराई) और घर (घरी) पर कर लगाए गए।
- उसने नकद वेतन वाली बड़ी स्थायी सेना बनाई, जो इससे पहले किसी सुल्तान ने नहीं की थी।
- धोखाधड़ी रोकने के दो उपाय थे - दाग, यानी घोड़ों पर मुहर, और चेहरा, यानी हर सैनिक का हुलिया रजिस्टर।
| सुधार | साधन | उद्देश्य |
|---|---|---|
| मूल्य नियंत्रण | शहना-ए-मंडी, राजकीय अन्नागार | नकद वेतन वाली सेना के लिए सस्ता माल |
| राजस्व | पैमाइश, उपज का आधा | अधिक और निश्चित आय |
| मध्यस्थ | विशेषाधिकार समाप्त | राज्य और किसान के बीच सीधा संबंध |
| सेना | दाग और चेहरा | सैनिकों और घोड़ों में धोखा रोकना |
स्थापत्य और दरबार
- उसने कुतुब परिसर में अलाई दरवाजा बनवाया, जो भारत में सच्चे मेहराब और गुंबद का प्रारंभिक उदाहरण है।
- उसने सीरी नगर बसाया और हौज खास जलाशय बनवाया।
- कवि अमीर खुसरो उसके दरबार की शोभा थे, और इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी ने बाद में उसके शासन पर लिखा।
- उसकी मृत्यु के बाद मलिक काफूर का अल्प प्रभुत्व और पारिवारिक संघर्ष 1320 तक वंश का अंत कर गया।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न भू-राजस्व की दर, बाजार अधिकारी का नाम, और दाग तथा चेहरा का अर्थ पूछते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि अलाउद्दीन ने दाम क्यों नियंत्रित किए - अपेक्षित उत्तर है नकद वेतन वाली स्थायी सेना, लोक कल्याण नहीं।
UPSC / State PSC के लिए
सुधारों को एक जुड़ी हुई व्यवस्था की तरह प्रस्तुत कीजिए - मंगोल खतरे के लिए स्थायी सेना चाहिए, स्थायी सेना के लिए नकद वेतन, नकद वेतन के लिए कम दाम और अधिक राजस्व, इसलिए दाम तय और मध्यस्थ समाप्त। यह भी लिखें कि उसकी मृत्यु के तुरंत बाद मूल्य नियंत्रण समाप्त हो गए, जो दिखाता है कि सब कुछ व्यक्तिगत सख्ती पर टिका था।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ अलाउद्दीन ने दक्षिणी राज्यों का विलय कर लिया | ✓ उसने दक्षिण से कर लिया; विलय बाद में हुआ
✗ दाग का अर्थ सैनिक का हुलिया रजिस्टर है | ✓ दाग घोड़ों पर मुहर है; चेहरा हुलिया रजिस्टर है
✗ बाजार नियंत्रण गरीबों के कल्याण के लिए था | ✓ यह नकद वेतन वाली स्थायी सेना चलाने के लिए था
एक नजर में
- खलजी शासन 1290-1320; अलाउद्दीन का शासन 1296-1316।
- विजय - गुजरात, रणथंभौर, चित्तौड़, मालवा; दक्षिण अभियान मलिक काफूर ने किए।
- दीवान-ए-रियासत और शहना-ए-मंडी के अधीन तीन नियंत्रित बाजार।
- भू-राजस्व उपज का आधा, पैमाइश से आकलन; मध्यस्थों के विशेषाधिकार समाप्त।
- नकद वेतन वाली स्थायी सेना, नियंत्रण दाग और चेहरा से।
- अलाई दरवाजा, सीरी और हौज खास; दरबार में अमीर खुसरो।
