झीलें, जलप्रपात और नदी प्रदूषण
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Drainage" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Drainage System"
झीलें, जलप्रपात और नदी प्रदूषण
झीलें ठहरे जल के भंडार हैं जो हिमनद, विवर्तनिक हलचल, नदी क्रिया या मानव प्रयास से बनती हैं। भारत की झीलें हिमालय की मीठे जल की झीलों से लेकर शुष्क क्षेत्रों की खारी झीलों और तटीय लैगून तक फैली हैं। जलप्रपात वहां बनते हैं जहां नदी अचानक ढाल से गिरती है।
झीलों के प्रकार
- हिमनद झीलें हिमालय के उन बेसिनों में बनती हैं जिन्हें बर्फ ने खोदा; कश्मीर की वुलर भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील है, जो विवर्तनिक क्रिया से बनी और झेलम से जल पाती है।
- गोखुर झील (oxbow) तब बनती है जब नदी का विसर्प कट जाता है; गंगा मैदान में आम है।
- लैगून तटीय झीलें हैं जिन्हें बालू रोध अलग कर देता है, जैसे ओडिशा की चिलिका, आंध्र-तमिलनाडु तट की पुलिकट और केरल की वेम्बनाड।
- खारी झीलें शुष्क क्षेत्रों में मिलती हैं, जैसे राजस्थान की सांभर, जो नमक उत्पादन में काम आती है।
- कृत्रिम झीलें बांधों के पीछे बने जलाशय हैं, जैसे भाखड़ा के पीछे गोबिंद सागर।
- झीलें नदी प्रवाह को संतुलित करती हैं, मत्स्य और पर्यटन को सहारा देती हैं तथा पारितंत्र बनाए रखती हैं।
| झील | राज्य | प्रकार |
|---|---|---|
| वुलर | जम्मू और कश्मीर | मीठा जल |
| चिलिका | ओडिशा | लैगून |
| पुलिकट | आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु | लैगून |
| सांभर | राजस्थान | खारी |
| वेम्बनाड | केरल | लैगून |
प्रमुख जलप्रपात
| जलप्रपात | नदी | राज्य |
|---|---|---|
| जोग या गरसोप्पा | शरावती | कर्नाटक |
| धुआंधार | नर्मदा | मध्य प्रदेश |
| शिवसमुद्रम | कावेरी | कर्नाटक |
| हुंडरू | स्वर्णरेखा | झारखंड |
जलप्रपात कैसे बनते हैं
जलप्रपात वहां बनता है जहां नदी मुलायम चट्टान के ऊपर पड़ी कठोर चट्टान की पट्टी को पार करती है, या भ्रंश कगार से गिरती है। नीचे की मुलायम चट्टान तेजी से कटती है, कगार नीचे से खोखला होता है, और प्रपात धीरे-धीरे ऊपर की ओर हटता हुआ तल पर गहरा कुंड (plunge pool) बनाता है।
नदी प्रदूषण
- बढ़ते शहर, उद्योग और खेत नदियों में मलजल, बहिःस्राव और उर्वरक बहाव डालते हैं।
- शुष्क मौसम में प्रवाह घटने से प्रदूषक और गाढ़े हो जाते हैं।
- गंगा कार्य योजना 1985 में शुरू हुई, जो पहला बड़ा नदी सफाई कार्यक्रम था।
- राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना ने बाद में यही कार्य अन्य नदियों तक बढ़ाया।
- नमामि गंगे कार्यक्रम आज गंगा सफाई का कार्य जारी रखे हुए है।
- सफाई के लिए शोधन संयंत्रों के साथ नदी में न्यूनतम प्रवाह भी आवश्यक है।
Exam me kaise aata hai
- भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील — वुलर
- जोग जलप्रपात किस नदी पर है — शरावती
- सांभर खारी झील कहां है — राजस्थान
- गंगा कार्य योजना कब शुरू हुई — 1985
UPSC/State PSC ke liye
- चिलिका खारे-मीठे मिश्रित जल की लैगून है, जिसकी लवणता ऋतु और समुद्री मुहाने के खुलने से बदलती है।
- नदी सफाई के लिए बहिःस्राव शोधन के साथ सुनिश्चित पर्यावरणीय प्रवाह भी चाहिए; केवल शोधन पर्याप्त नहीं।
Yahan confuse hote hain
✗ चिलिका मीठे जल की झील है | चिलिका खारे-मीठे जल की लैगून है | ✓
✗ जोग जलप्रपात कावेरी पर है | जोग जलप्रपात शरावती पर है | ✓
✗ सांभर गुजरात में है | सांभर राजस्थान में है | ✓
Ek nazar me
- झीलें: हिमनद, गोखुर, लैगून, खारी और कृत्रिम।
- वुलर सबसे बड़ी मीठे जल की झील; चिलिका सबसे बड़ी लैगून।
- जोग शरावती पर, धुआंधार नर्मदा पर।
- गंगा कार्य योजना 1985, फिर राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना।
Ab practice karein
Is chapter ke facts yaad hue ya nahi — ye ExamAtlas ke mock test se check karein. Drainage ke questions har exam me aate hain.
