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भूमि, मृदा और ऊर्जा संरक्षण

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Resources and Development" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Management of Natural Resources"

भूमि, मृदा और ऊर्जा संरक्षण

भूमि स्थिर संसाधन है: उसे और बनाया नहीं जा सकता, और जो क्षरित हो जाए उसे लौटाने में दशकों लगते हैं। कोयला और पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा संसाधन भी उतने ही सीमित हैं, इसीलिए दोनों का संरक्षण कम उपयोग और बेहतर उपयोग के एक ही तर्क पर चलता है।

भूमि क्षरण और मृदा संरक्षण

  • भूमि क्षरण का अर्थ है अपरदन, लवणता, जल जमाव, खनन अपशिष्ट और औद्योगिक बहिःस्राव से भूमि की उत्पादक क्षमता का नष्ट होना।
  • वनोन्मूलन, अतिचारण, गलत सिंचाई और खनन मुख्य कारण हैं।
  • अतिचारण शुष्क क्षेत्रों में गंभीर कारण है, और लवणता सहित जल जमाव वहां आम है जहां सिंचाई के साथ जल निकासी न हो।
  • पवन और जल से मृदा अपरदन सबसे व्यापक रूप है, जिसमें अवनालिका अपरदन चंबल बीहड़ जैसी भूमि बना देता है।
  • समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, पट्टी कृषि और रक्षक मेखला अपरदन को सीधे नियंत्रित करते हैं।
  • वनरोपण, उचित चराई प्रबंधन, चेक डैम और अवनालिका भराव क्षरित भूमि को लौटाते हैं।
  • जैविक खाद, फसल चक्र और रसायनों का कम उपयोग मृदा की संरचना और उर्वरता बनाए रखते हैं।

ऊर्जा संरक्षण

  • कोयला और पेट्रोलियम लाखों वर्षों में बने और मानवीय समय में फिर नहीं बनेंगे।
  • इन्हें जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड तथा कणिकीय पदार्थ भी निकलते हैं।
  • ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है उसी काम के लिए कम ऊर्जा लगाना, जो नई क्षमता बनाने से सस्ता और तेज है।
  • व्यावहारिक उपायों में दक्ष उपकरण, बेहतर भवन रचना, सार्वजनिक परिवहन, ठीक रखे वाहन और अपव्यय से बचाव आते हैं।
  • सौर, पवन, बायोगैस, लघु जल विद्युत और अन्य नवीकरणीय स्रोतों की ओर जाना जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाता है।
  • उद्योग में ऊर्जा लेखा परीक्षा ठीक-ठीक बताती है कि ऊर्जा कहां व्यर्थ जा रही है।
  • पूरे विषय का सिद्धांत कम करो, फिर उपयोग करो और पुनर्चक्रण करो है, जो पदार्थ और ऊर्जा दोनों पर लागू होता है।
समस्याकारणउपाय
मृदा अपरदनवनोन्मूलन, गलत जुताईसमोच्च जुताई, सीढ़ी, वृक्ष आवरण
जल जमाव और लवणतानिकासी बिना सिंचाईउचित जल निकासी, जिप्सम
जीवाश्म ईंधन का ह्रासबढ़ती मांगदक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा

भूमि क्षरण — अपरदन, लवणता, जल जमाव या संदूषण से भूमि की उत्पादक क्षमता का नष्ट होना।

Exam me kaise aata hai

  • ढाल के आर-पार जुताई कहलाती है — समोच्च जुताई
  • पवन के विरुद्ध लगाई वृक्ष पंक्तियां — रक्षक मेखला
  • निकासी बिना सिंचाई से क्या होता है — जल जमाव और लवणता
  • उसी काम के लिए कम ऊर्जा लगाना — ऊर्जा संरक्षण

UPSC/State PSC ke liye

  • ऊर्जा संरक्षण को प्रायः सबसे सस्ता ऊर्जा स्रोत कहा जाता है, क्योंकि बचाई गई इकाई उत्पादित इकाई से कहीं सस्ती पड़ती है और उसके लिए नया संयंत्र, ईंधन या पारेषण नहीं चाहिए।
  • भूमि क्षरण को पलटना कठिन है क्योंकि मृदा सदियों में बनती है, इसलिए रोकथाम पुनरुद्धार से कहीं अधिक कुशल है।

Yahan confuse hote hain

सिंचाई सदैव भूमि सुधारती है | निकासी बिना सिंचाई जल जमाव और लवणता लाती है  |  

ऊर्जा संरक्षण का अर्थ बिना काम चलाना है | इसका अर्थ उसी काम के लिए कम ऊर्जा लगाना है  |  

क्षरित भूमि शीघ्र लौटाई जा सकती है | मृदा बनने में सदियां लगती हैं, इसलिए पुनरुद्धार धीमा है  |  

Ek nazar me

  • भूमि क्षरण अपरदन, लवणता, जल जमाव और संदूषण से आता है।
  • समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, रक्षक मेखला और वनरोपण मृदा बचाते हैं।
  • कोयला और पेट्रोलियम सीमित और प्रदूषणकारी हैं।
  • ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय स्रोत मिलकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाते हैं।

Ab practice karein

Natural resources aur conservation se har exam me seedhe questions bante hain. ExamAtlas ke mock test se abhi practice karein.

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