भूमि उपयोग और कृषि के प्रकार
NCERT कक्षा 8 • Resources and Development • अध्याय "Agriculture" | NCERT कक्षा 10 • Contemporary India II • अध्याय "Agriculture"
भूमि उपयोग और कृषि के प्रकार
भूमि सीमित प्राकृतिक संसाधन है, और उसका उपयोग तय करता है कि वह कितने लोगों को सहारा दे सकती है। भारत की भूमि वन, कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि, परती भूमि, चरागाह तथा शुद्ध बोया गया क्षेत्र में बंटी है। कृषि प्रणालियां वर्षा, मृदा, पूंजी और बाजार पहुंच के अनुसार भिन्न होती हैं।
भूमि उपयोग की श्रेणियां
- वन भूमि वह क्षेत्र है जो वन के रूप में दर्ज है, और अब भी पारिस्थितिक संतुलन के वांछित स्तर से कम है।
- कृषि के लिए अनुपलब्ध भूमि में बंजर चट्टानी भूमि तथा भवन, सड़क और कारखानों जैसे गैर-कृषि उपयोग की भूमि आती है।
- परती भूमि वह कृषि भूमि है जो उर्वरता लौटाने के लिए खाली छोड़ी जाती है; वर्तमान परती एक वर्ष और अन्य परती दो से पांच वर्ष तक।
- स्थायी चरागाह चराई की भूमि है, जो खेती के दबाव में लगातार घटती जा रही है।
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र वह भूमि है जिस पर वर्ष में कम से कम एक बार बुवाई हुई; सकल फसली क्षेत्र में उसे हर फसल के लिए फिर गिना जाता है।
- फसल सघनता तब बढ़ती है जब सिंचाई से वही खेत वर्ष में दो या तीन फसलें देता है।
कृषि के प्रकार
- आदिम निर्वाह कृषि में सरल औजार और पारिवारिक श्रम लगते हैं; पूर्वोत्तर की झूम स्थानांतरी कृषि इसी में आती है।
- गहन निर्वाह कृषि में छोटी जोत, अधिक श्रम और अधिक उर्वरक लगते हैं, जो घनी बसी मैदानी भूमि में आम है।
- वाणिज्यिक कृषि आधुनिक निवेश, अधिक उपज वाले बीज और मशीनों से बिक्री के लिए फसल उगाती है, जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।
- बागानी कृषि बड़े एस्टेट पर पूंजी और मजदूरी श्रम से चाय, कॉफी, रबड़ या गन्ना जैसी एक फसल उगाती है।
- मिश्रित कृषि जोखिम बांटने के लिए फसल के साथ दुग्ध या मुर्गीपालन जोड़ती है।
| कृषि प्रकार | मुख्य लक्षण | उदाहरण क्षेत्र |
|---|---|---|
| आदिम निर्वाह | सरल औजार, बदलते खेत | पूर्वोत्तर की पहाड़ियां |
| गहन निर्वाह | छोटी जोत, अधिक श्रम | गंगा मैदान |
| वाणिज्यिक | बाजार केंद्रित, मशीनें | पंजाब, हरियाणा |
| बागानी | एक फसल, बड़ा एस्टेट | असम की चाय, केरल का रबड़ |
शुद्ध बोया गया क्षेत्र — वह भूमि जिस पर कृषि वर्ष में कम से कम एक बार वास्तव में फसल बोई गई हो।
Exam me kaise aata hai
- वर्ष में कम से कम एक बार बोई गई भूमि कहलाती है — शुद्ध बोया गया क्षेत्र
- पूर्वोत्तर की स्थानांतरी कृषि कहलाती है — झूम
- चाय और कॉफी किस कृषि प्रकार में उगती हैं — बागानी
- एक वर्ष खाली छोड़ी भूमि कहलाती है — वर्तमान परती
UPSC/State PSC ke liye
- फसल सघनता सकल फसली क्षेत्र और शुद्ध बोए गए क्षेत्र का अनुपात है, इसलिए सुनिश्चित सिंचाई इसे सीधे बढ़ाती है।
- स्थायी चरागाह का घटना बची हुई सामुदायिक भूमि पर अतिचारण और बढ़ती चारा कमी का एक बड़ा कारण है।
Yahan confuse hote hain
✗ शुद्ध बोया गया क्षेत्र सकल फसली क्षेत्र से बड़ा है | सकल फसली क्षेत्र बड़ा होता है | ✓
✗ बागानी कृषि निर्वाह कृषि है | बागानी कृषि वाणिज्यिक और बाजार केंद्रित है | ✓
✗ परती भूमि स्थायी रूप से अकृष्य है | परती भूमि अस्थायी रूप से विश्राम पर कृषि भूमि है | ✓
Ek nazar me
- भूमि उपयोग: वन, अनुपलब्ध, परती, चरागाह, शुद्ध बोया गया क्षेत्र।
- सकल फसली क्षेत्र में एक ही खेत की कई फसलें गिनी जाती हैं।
- कृषि प्रकार: आदिम और गहन निर्वाह, वाणिज्यिक, बागानी, मिश्रित।
- सिंचाई फसल सघनता बढ़ाती है।
