कानून निर्माण और विधेयकों के प्रकार
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 5
कानून निर्माण और विधेयकों के प्रकार
कानून के प्रस्ताव को विधेयक कहते हैं; यह दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की अनुमति के बाद ही अधिनियम बनता है। प्रक्रिया इस पर निर्भर करती है कि विधेयक साधारण, धन, वित्त या संविधान संशोधन विधेयक है।
विधेयकों के प्रकार
| प्रकार | कहां प्रस्तुत | राज्यसभा की शक्ति | राष्ट्रपति |
|---|---|---|---|
| साधारण विधेयक | किसी भी सदन में | समान; अस्वीकार या संशोधन कर सकती है | अनुमति, रोक, या एक बार वापस भेज सकते हैं |
| धन विधेयक, अनुच्छेद 110 | केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की सिफारिश पर | केवल सिफारिश, 14 दिन के भीतर | वापस नहीं भेज सकते, केवल अनुमति या रोक |
| वित्त विधेयक | कुछ श्रेणियों में केवल लोकसभा में | कुछ श्रेणियों में समान शक्ति | साधारण विधेयक की तरह |
| संविधान संशोधन, अनुच्छेद 368 | किसी भी सदन में | समान; विशेष बहुमत से पारित आवश्यक | अनुमति देनी ही होती है |
- धन विधेयक केवल अनुच्छेद 110 में गिनाए विषयों से संबंधित होता है - कराधान, उधार, संचित निधि, विनियोग और लेखापरीक्षा।
- किसी विधेयक के धन विधेयक होने पर अध्यक्ष का प्रमाणपत्र अंतिम है और उस पर किसी न्यायालय या सदन में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
- यदि राज्यसभा धन विधेयक चौदह दिन में नहीं लौटाती, तो वह दोनों सदनों से पारित माना जाता है।
- धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती।
साधारण विधेयक के चरण
- प्रथम वाचन - विधेयक की प्रस्तुति और राजपत्र में प्रकाशन; इस चरण में बहस नहीं होती।
- द्वितीय वाचन - मुख्य चरण, जिसमें सामान्य चर्चा, प्रवर या संयुक्त समिति को भेजने की संभावना, और फिर खंड-दर-खंड विचार होता है।
- तृतीय वाचन - बहस केवल पूरे विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार करने तक सीमित; केवल शाब्दिक संशोधन की अनुमति।
- फिर विधेयक दूसरे सदन में जाता है, जहां तीनों चरण दोहराए जाते हैं।
- यदि दूसरा सदन इसे अस्वीकार कर दे, छह माह से अधिक लंबित रखे, या संशोधनों पर असहमत हो, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठक बुला सकते हैं, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं और निर्णय उपस्थित सदस्यों के साधारण बहुमत से होता है।
- भारतीय संसदीय इतिहास में संयुक्त बैठकें बहुत कम बार हुई हैं।
राष्ट्रपति के विकल्प और बजट
- साधारण विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति दे सकते हैं, अनुमति रोक सकते हैं, या पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं; यदि सदन उसे संशोधन सहित या बिना संशोधन दोबारा पारित कर दें तो राष्ट्रपति को अनुमति देनी ही होती है।
- बजट, जो औपचारिक रूप से अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण है, आगामी वित्तीय वर्ष की अनुमानित प्राप्तियां और व्यय दिखाता है।
- संचित निधि पर भारित व्यय - जैसे राष्ट्रपति, न्यायाधीशों, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और अध्यक्ष के वेतन - संसद में मतदान योग्य नहीं होते, यद्यपि उन पर चर्चा हो सकती है।
- विनियोग विधेयक संचित निधि से धन निकालने का अधिकार देता है, और वित्त विधेयक कर प्रस्तावों को प्रभावी करता है।
- लेखानुदान पूरा बजट पारित होने तक खर्च की अनुमति देता है, और गिलोटिन समय समाप्त होने पर बिना चर्चा वाली मांगों को मतदान के लिए रख देता है।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि धन विधेयक किस अनुच्छेद में परिभाषित है, उसे कौन प्रमाणित करता है, और संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि संयुक्त बैठक कब नहीं बुलाई जा सकती। व्यावहारिक प्रश्न कोई विधेयक बताकर उसका प्रकार पूछते हैं।
UPSC / State PSC के लिए
धन विधेयक पर अध्यक्ष के अंतिम प्रमाणपत्र का संवैधानिक महत्व समझिए - इससे वर्गीकरण अपुनरावलोकनीय हो जाता है और वास्तविक शक्ति पीठासीन अधिकारी के हाथ आ जाती है, इसीलिए धन विधेयक मार्ग का प्रयोग जीवंत संवैधानिक बहस है। धन विधेयक और वित्त विधेयक का अंतर भी स्पष्ट रखें, यह आम जाल है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ धन विधेयक पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है | ✓ धन विधेयक या संविधान संशोधन पर संयुक्त बैठक संभव नहीं
✗ राज्यसभा धन विधेयक अस्वीकार कर सकती है | ✓ वह केवल चौदह दिन के भीतर सिफारिश कर सकती है
✗ राष्ट्रपति धन विधेयक पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं | ✓ धन विधेयक लौटाया नहीं जा सकता; केवल अनुमति या रोक
एक नजर में
- विधेयक दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की अनुमति के बाद अधिनियम बनता है।
- अनुच्छेद 110 का धन विधेयक केवल लोकसभा में, राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से आता है।
- धन विधेयक पर अध्यक्ष का प्रमाणपत्र अंतिम है, उस पर प्रश्न नहीं उठता।
- राज्यसभा के पास धन विधेयक पर केवल चौदह दिन की सिफारिश शक्ति है।
- अनुच्छेद 108 की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करते हैं; धन और संशोधन विधेयक पर नहीं।
- अनुच्छेद 112 का बजट; भारित व्यय पर मतदान नहीं; फिर विनियोग और वित्त विधेयक।
