जैव विविधता के स्तर और महत्व
NCERT कक्षा 12 • Biology • अध्याय "Biodiversity and Conservation"
जैव विविधता के स्तर और महत्व
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की वह भिन्नता है जो हर स्तर पर मिलती है, किसी प्रजाति के भीतर के जीनों से लेकर उन पारितंत्रों तक जिनमें प्रजातियां रहती हैं। भारत विश्व के मेगा विविध देशों में है, जो अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र में वैश्विक प्रजातियों का बहुत बड़ा भाग रखता है।
तीन स्तर
- आनुवंशिक विविधता एक ही प्रजाति के भीतर की भिन्नता है, जैसे भारत में उगाई जाने वाली चावल, आम और गेहूं की अनेक किस्में।
- आनुवंशिक विविधता ही किसी प्रजाति को दशाएं बदलने पर अनुकूलन की क्षमता देती है, इसलिए वह विकास का कच्चा माल है।
- प्रजाति विविधता किसी क्षेत्र की भिन्न प्रजातियों की भिन्नता है, और अधिकांश लोग जैव विविधता से यही स्तर समझते हैं।
- पारितंत्र विविधता आवासों की भिन्नता है, मरुस्थल और मैंग्रोव से लेकर अल्पाइन घास मैदान और प्रवाल भित्ति तक।
- भारत में जलवायु, उच्चावच और मृदा की विविधता के कारण तीनों प्रचुर हैं।
- प्रजाति विविधता सामान्यतः ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर बढ़ती है, इसीलिए उष्णकटिबंधीय क्षेत्र सर्वाधिक समृद्ध हैं।
- विविधता आवास के क्षेत्रफल के साथ भी बढ़ती है, इसलिए बड़े सतत वन खंडित वनों से अधिक प्रजातियां रखते हैं।
जैव विविधता क्यों महत्वपूर्ण है
- पारिस्थितिक सेवाओं में ऑक्सीजन उत्पादन, परागण, मृदा निर्माण, पोषक चक्रण, जल शुद्धिकरण और जलवायु नियमन आते हैं।
- आर्थिक मूल्य भोजन, इमारती लकड़ी, रेशा, ईंधन, औषधि और उद्योग के कच्चे माल से आता है।
- आधुनिक औषधियों का बहुत बड़ा भाग पौधों से मिला है, इसलिए अज्ञात प्रजातियों में भविष्य के उपचार छिपे हो सकते हैं।
- फसलों के जंगली संबंधियों के आनुवंशिक संसाधन वे प्रतिरोध जीन रखते हैं जिनकी प्रजनकों को भविष्य के कीटों के विरुद्ध आवश्यकता होगी।
- सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक मूल्य पवित्र उपवनों, लोक परंपराओं, मनोरंजन और पर्यटन में फैला है।
- विविध पारितंत्र अधिक स्थिर रहता है और सूखे, रोग या अन्य विक्षोभ से बेहतर उबरता है।
- जैव विविधता तप्त स्थल वे क्षेत्र हैं जिनकी प्रजाति समृद्धि असाधारण रूप से अधिक है और जो गंभीर संकट में भी हैं।
| स्तर | क्या समेटता है | भारतीय उदाहरण |
|---|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | प्रजाति के भीतर भिन्नता | चावल और आम की अनेक किस्में |
| प्रजाति विविधता | क्षेत्र की भिन्न प्रजातियां | पश्चिमी घाट की प्रजाति समृद्धि |
| पारितंत्र विविधता | आवासों की भिन्नता | मरुस्थल, मैंग्रोव, अल्पाइन घास मैदान |
जैव विविधता तप्त स्थल — असाधारण प्रजाति समृद्धि और अधिक स्थानिक प्रजातियों वाला वह क्षेत्र जो गंभीर संकट में भी है।
Exam me kaise aata hai
- एक ही प्रजाति के भीतर भिन्नता कहलाती है — आनुवंशिक विविधता
- प्रजाति विविधता कहां सर्वाधिक है — भूमध्य रेखा के पास
- संकट में पड़ा समृद्ध क्षेत्र कहलाता है — जैव विविधता तप्त स्थल
- कौन सा स्तर आवासों की भिन्नता समेटता है — पारितंत्र विविधता
UPSC/State PSC ke liye
- आनुवंशिक विविधता भविष्य के अनुकूलन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि आनुवंशिक रूप से एक जैसी फसल किसी एक नए रोग से पूरी नष्ट हो सकती है।
- प्रजाति समृद्धि भूमध्य रेखा की ओर इसलिए बढ़ती है कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की जलवायु लंबे समय से स्थिर रही और उन्हें वर्ष भर अधिक सौर ऊर्जा मिलती है।
Yahan confuse hote hain
✗ जैव विविधता का अर्थ केवल प्रजातियों की संख्या है | इसमें आनुवंशिक और पारितंत्र विविधता भी आती है | ✓
✗ विविधता ध्रुवों पर सर्वाधिक है | यह उष्णकटिबंध में सर्वाधिक है | ✓
✗ तप्त स्थल का अर्थ केवल समृद्ध क्षेत्र है | तप्त स्थल स्थानिक प्रजातियों में समृद्ध और गंभीर संकट में भी होता है | ✓
Ek nazar me
- जैव विविधता के आनुवंशिक, प्रजाति और पारितंत्र स्तर हैं।
- विविधता ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर और आवास क्षेत्रफल के साथ बढ़ती है।
- इसका मूल्य पारिस्थितिक, आर्थिक, आनुवंशिक और सांस्कृतिक है।
- तप्त स्थलों में अधिक समृद्धि और अधिक संकट दोनों मिलते हैं।
