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मनसबदारी, जागीर और भू-राजस्व

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part II, Chapter 8

मनसबदारी, जागीर और भू-राजस्व

मुगल शासन तीन जुड़े हुए उपकरणों पर टिका था - मनसबदारों की श्रेणीबद्ध सेवा, जागीर से भुगतान, और पैमाइश तथा औसत कीमतों पर आधारित राजस्व व्यवस्था। तीनों का जुड़ाव समझने से साम्राज्य की शक्ति और उसका संकट दोनों समझ आते हैं।

केंद्रीय और प्रांतीय पद

पदउत्तरदायित्व
वजीर या दीवान-ए-आलाराजस्व और वित्त
मीर बख्शीसैन्य विभाग, मनसब, गुप्तचर
मीर सामानशाही गृहस्थी और कारखाने
सद्र-उस-सुदूरधार्मिक अनुदान और दान
काजी-उल-कुजातन्याय
  • प्रांत सूबा था, जिसका प्रमुख सूबेदार होता था, और राजस्व के लिए अलग दीवान रहता था जो सीधे केंद्र को रिपोर्ट करता था - यह सूबेदार पर सोचा-समझा अंकुश था।
  • नीचे कानून व्यवस्था के लिए फौजदार वाला सरकार, शिक्कदार, आमिल और कानूनगो वाला परगना, और मुकद्दम तथा पटवारी वाला गांव आता था।
  • नगरों में व्यवस्था कोतवाल संभालता था।

मनसबदारी व्यवस्था

  • हर अधिकारी के पास मनसब यानी पद होता था, जो दो संख्याओं में व्यक्त होता था।
  • जात उसकी व्यक्तिगत हैसियत, पदानुक्रम में स्थान और वेतन तय करता था।
  • सवार तय करता था कि उसे कितने घुड़सवार रखने हैं।
  • मनसब वंशानुगत नहीं थे - मृत्यु पर समाप्त हो जाते और बादशाह की इच्छा से फिर दिए जाते, जिससे अमीर वर्ग निर्भर रहता था।
  • घोड़ों की दाग मुहर और चेहरा हुलिया रजिस्टर, दोनों पुरानी परंपरा से लिए गए, गिनती जांचने में प्रयोग होते थे।
  • अमीर वर्ग जानबूझकर मिश्रित रखा गया - तूरानी, ईरानी, अफगान, राजपूत, भारतीय मुसलमान और मराठा - ताकि कोई एक गुट हावी न हो।

जागीर

  • अधिकांश मनसबदारों को नकद नहीं, जागीर से भुगतान होता था, यानी किसी क्षेत्र के राजस्व का आवंटन।
  • जागीरदार को केवल राजस्व का अधिकार था, भूमि का नहीं, और जागीरें बार-बार बदली जाती थीं ताकि कोई अधिकारी स्थानीय आधार न बना ले।
  • वतन जागीर अपवाद थी - किसी सरदार, जैसे राजपूत शासक, की पैतृक भूमि, जो उसी के पास रहती थी।
  • खालिसा भूमि सीधे शाही कोष के लिए सुरक्षित रखी जाती थी।
  • जब क्षेत्र अच्छी राजस्व देने वाली भूमि से तेज बढ़ा, तो मनसबदारों को जागीर के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी और उन्होंने किसानों पर दबाव बढ़ाया - यही जागीरदारी संकट है, जिसे इतिहासकार मुगल पतन के केंद्र में रखते हैं।

भू-राजस्व की पद्धतियां

  • दहसाला या जब्ती, जिसे टोडरमल ने लगभग 1580 में व्यवस्थित किया - भूमि की पैमाइश, उर्वरता के अनुसार वर्गीकरण, और पिछले दस वर्षों की औसत उपज तथा कीमतों पर नकद राजस्व निर्धारण।
  • भूमि के वर्ग - पोलज (हर वर्ष जुतने वाली), परौती (थोड़े समय परती), चाचर (तीन-चार वर्ष परती) और बंजर (लंबे समय से अकृष्ट)।
  • गल्ला-बख्शी या बटाई - कटी फसल का राज्य और किसान के बीच वास्तविक बंटवारा।
  • कनकूट - पैमाइश के बजाय खड़ी फसल का अनुमान।
  • नसक - क्षेत्र के पिछले राजस्व रिकॉर्ड पर आधारित निर्धारण।
  • राज्य का हिस्सा सामान्यतः लगभग एक-तिहाई था, और बीज तथा पशुओं के लिए तकावी ऋण दिए जाते थे।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न जात और सवार का अर्थ, दहसाला किसने बनाई, और पोलज क्या है, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में पद और कार्य या भूमि वर्ग और परिभाषा जुड़ते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि जागीर व्यवस्था पतन में कैसे सहायक बनी।

UPSC / State PSC के लिए

तीनों उपकरणों को एक मशीन की तरह प्रस्तुत कीजिए - मनसब दायित्व बनाता है, जागीर उसका भुगतान करती है, भू-राजस्व जागीर को भरता है। संकट तब शुरू होता है जब तीसरी कड़ी टूटती है। यह भी लिखें कि इन सबका मुख्य स्रोत आईन-ए-अकबरी है, जो सरकारी नियम बताता है, जो स्थानीय व्यवहार से भिन्न हो सकते हैं।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

सवार पद मनसबदार का वेतन तय करता था  |   जात हैसियत और वेतन तय करता था; सवार घुड़सवारों की संख्या

जागीरदार अपनी जागीर की भूमि का स्वामी था  |   उसे केवल राजस्व का अधिकार था, और जागीरें बदली जाती थीं

कनकूट का अर्थ भूमि की पैमाइश है  |   कनकूट खड़ी फसल का अनुमान है; पैमाइश जब्ती है

एक नजर में

  • राजस्व के लिए वजीर, सेना के लिए मीर बख्शी, गृहस्थी के लिए मीर सामान।
  • सूबेदार का सूबा, फौजदार का सरकार, शिक्कदार-आमिल का परगना, मुकद्दम का गांव।
  • मनसब में दो संख्याएं - जात हैसियत और वेतन, सवार घुड़सवार; वंशानुगत नहीं।
  • जागीर में केवल राजस्व अधिकार, हस्तांतरणीय; वतन जागीर पैतृक और स्थिर।
  • टोडरमल की दहसाला या जब्ती दस वर्ष की औसत उपज और कीमतों पर आधारित।
  • अन्य पद्धतियां - गल्ला-बख्शी, कनकूट और नसक; भूमि वर्ग पोलज, परौती, चाचर, बंजर।

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