मौर्य कला और साम्राज्य का पतन
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2
मौर्य कला और साम्राज्य का पतन
मौर्य कला ऐतिहासिक भारत की पहली पाषाण कला है। इसकी श्रेष्ठ कृति चमकीला एकाश्म स्तंभ है, जिसके शीर्ष पर पशु आकृतियां हैं। अशोक की मृत्यु के पचास वर्ष के भीतर साम्राज्य बिखर गया और लगभग 185 ईसा पूर्व तक वंश समाप्त हो गया।
अशोक के स्तंभ
- हर स्तंभ एकाश्म है, बलुआ पत्थर के एक ही खंड से तराशा गया, जो मुख्यतः वाराणसी के पास चुनार से आता था, और उस पर विशिष्ट दर्पण जैसी चमक है।
- स्तंभ में सादा गोल लाट, उलटे कमल का घंटाकार शीर्ष, पशुओं या चक्र वाला फलक (abacus), और शीर्ष पर पशु आकृति होती है।
- सारनाथ के सिंह शीर्ष में चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े हैं, और नीचे फलक पर घोड़ा, बैल, हाथी तथा सिंह हैं, जिनके बीच चक्र बने हैं।
- इसी शीर्ष को 26 जनवरी 1950 को भारत का राजचिह्न स्वीकार किया गया, और उस पर बना चक्र राष्ट्रीय ध्वज के अशोक चक्र का आधार है।
- अन्य प्रसिद्ध शीर्ष - रामपुरवा का बैल और बिहार के लौरिया नंदनगढ़ का सिंह।
स्तंभ और शीर्ष कैसे दिखते हैं
कल्पना कीजिए हल्के रंग के बलुआ पत्थर का चिकना, ऊपर की ओर थोड़ा पतला होता स्तंभ, जो बिना किसी आधार के सीधे जमीन से उठा है - वह किसी चबूतरे पर नहीं टिका। वह ऐसा चमकता है मानो तेल लगा हो। ऊपर पत्थर बाहर की ओर खुलकर झुकी पंखुड़ियों वाला कमल बन जाता है, जैसे उलटा घंटा। इस घंटे पर गोल फलक है, जिस पर चलते हुए चार पशु और उनके बीच चार चक्र उकेरे हैं। फलक के ऊपर चार सिंह पीठ से पीठ सटाकर चारों दिशाओं में देखते खड़े हैं, इसलिए किसी भी ओर से एक पूरा सिंह दिखता है।
उस काल की अन्य कला
- स्तूप - मध्य प्रदेश के सांची स्तूप का मूल भाग अशोक के समय बना; वेदिका और तोरण बाद के हैं।
- शैलकृत गुफाएं - बिहार की बराबर और नागार्जुनी गुफाएं, जो आजीवकों को दान दी गईं, सबसे प्राचीन उपलब्ध शैलकृत गुफाएं हैं और अपनी चमकदार भीतरी दीवारों के लिए प्रसिद्ध हैं।
- लोक कला दरबारी कला से अलग है - पटना के पास मिली चमकीले बलुआ पत्थर की दीदारगंज यक्षी, और बड़ी संख्या में मिट्टी की मूर्तियां।
- पाटलिपुत्र के महल में अस्सी स्तंभों वाला सभा भवन था, और उसकी काठ की प्राचीर का उल्लेख मेगस्थनीज ने किया, जिसकी पुष्टि खुदाई से हुई।
साम्राज्य का पतन
- अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या लगभग 185 ईसा पूर्व में उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी।
- अशोक के बाद कमजोर उत्तराधिकारी और दावेदारों के बीच साम्राज्य का विभाजन केंद्रीय नियंत्रण तोड़ गया।
- प्रशासन अत्यधिक केंद्रीकृत था और राजा की व्यक्तिगत निगरानी पर निर्भर था; कमजोर राजा में यह टिक नहीं सका।
- विशाल नौकरशाही, लोक कल्याण और दान से आर्थिक दबाव बना, जो बाद के आहत सिक्कों की घटती शुद्धता में दिखता है।
- दमनकारी प्रांतीय अधिकारी, विशेषकर तक्षशिला में, बार-बार विद्रोह का कारण बने।
- कुछ इतिहासकार मानते हैं कि अशोक की अहिंसा नीति ने सेना को कमजोर किया, जबकि अन्य उत्तर-पश्चिम में नए आक्रमणों और स्वतंत्र क्षेत्रीय शक्तियों के उदय को कारण बताते हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि सिंह शीर्ष कहां है, पत्थर कहां से आया, और अंतिम मौर्य को किसने मारा। सुमेलित कीजिए में स्थल और स्मारक जोड़े जाते हैं - बराबर से गुफाएं, सांची से स्तूप, दीदारगंज से यक्षी। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि केंद्रीकृत साम्राज्य इतनी जल्दी क्यों ढहा।
UPSC / State PSC के लिए
दरबारी कला और लोक कला में भेद कीजिए - चमकीले स्तंभ राज्य प्रायोजित थे, जबकि यक्ष, यक्षी और मिट्टी की मूर्तियां निरंतर चली आ रही लोक परंपरा की हैं। पतन पर सबसे मजबूत संरचनात्मक तर्क यह है कि व्यक्ति-केंद्रित और अति-केंद्रीकृत प्रशासन के पास साधारण उत्तराधिकारी को झेलने का कोई संस्थागत तंत्र नहीं था।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ अशोक के स्तंभ पत्थर के खंड जोड़कर बने हैं | ✓ हर स्तंभ एकाश्म है, एक ही पत्थर से तराशा गया
✗ सांची स्तूप अशोक ने पूरा किया | ✓ अशोक ने मूल भाग बनवाया; वेदिका और तोरण बाद के हैं
✗ पुष्यमित्र शुंग विदेशी आक्रमणकारी था | ✓ वह मौर्य सेनापति था जिसने बृहद्रथ की हत्या की
एक नजर में
- मौर्य स्तंभ एकाश्म, चुनार के बलुआ पत्थर के, दर्पण जैसी चमक वाले।
- सारनाथ सिंह शीर्ष 26 जनवरी 1950 को राजचिह्न बना; उसका चक्र अशोक चक्र है।
- बिहार की बराबर और नागार्जुनी गुफाएं सबसे प्राचीन शैलकृत गुफाएं, आजीवकों को दान।
- सांची स्तूप का मूल भाग मौर्य कालीन; दीदारगंज यक्षी लोक कला की प्रतिनिधि।
- अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ईसा पूर्व की।
- पतन के कारण - कमजोर उत्तराधिकारी, विभाजन, अति-केंद्रीकरण, आर्थिक दबाव, विद्रोह।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
