जनन की विधियां
NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "How do Organisms Reproduce" | NCERT कक्षा 7 • Science • अध्याय "Reproduction in Plants"
जनन की विधियां
जनन वह प्रक्रिया है जिससे कोई जीव अपने ही प्रकार के नए जीव उत्पन्न करता है। यह एकमात्र जैव प्रक्रम है जो किसी व्यक्ति को जीवित रखने के लिए आवश्यक नहीं, फिर भी इसके बिना प्रजाति समाप्त हो जाती है, इसीलिए हर जीव इसमें इतना निवेश करता है।
अलैंगिक जनन
- अलैंगिक जनन में एक ही जनक होता है और संतति आनुवंशिक रूप से उसके समान होती है।
- द्विविभाजन एक कोशिका को दो में बांटता है, जैसे अमीबा और जीवाणु में; बहुविभाजन एक साथ अनेक कोशिकाएं देता है, जैसे प्लाज्मोडियम में।
- मुकुलन एक उभार बनाता है जो अलग होकर बढ़ता है, जैसे यीस्ट और हाइड्रा में।
- खंडन शरीर को टुकड़ों में तोड़ता है जिनमें से हर एक नया जीव बन जाता है, जैसे स्पाइरोगायरा में।
- पुनरुद्भवन शरीर के भाग से पूरा जीव फिर बना देता है, जैसे प्लेनेरिया में।
- राइजोपस जैसी कवक में बीजाणु निर्माण अनेक बीजाणु देता है जो सरलता से फैलते और कठोर दशाओं में जीवित रहते हैं।
- कायिक प्रवर्धन जड़, तना या पत्ती का उपयोग करता है, जैसे आलू का कंद, अदरक का प्रकंद, गन्ने का तना और ब्रायोफिलम की पत्ती।
- ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला में कुछ कोशिकाओं से अनेक समान पौधे उगाता है।
पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन
- लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं और इससे विविधता बनती है, क्योंकि संतति को दोनों से जीन मिलते हैं।
- पुंकेसर नर भाग है, जिसमें परागकोश और तंतु होते हैं; स्त्रीकेसर मादा भाग है, जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं।
- जिस पुष्प में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों हों वह द्विलिंगी है; जिसमें केवल एक हो वह एकलिंगी है।
- परागण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पराग का स्थानांतरण है, और यह उसी पुष्प में स्वपरागण या अलग पुष्पों के बीच परपरागण होता है।
- पवन, जल, कीट और पक्षी परपरागण के वाहक का काम करते हैं।
- निषेचन पराग नलिका से आए नर युग्मक का अंडाशय के अंड से संलयन है।
- निषेचन के बाद अंडाशय फल और बीजांड बीज बन जाता है।
| विधि | उदाहरण जीव | जनक संख्या |
|---|---|---|
| द्विविभाजन | अमीबा, जीवाणु | एक |
| मुकुलन | यीस्ट, हाइड्रा | एक |
| कायिक प्रवर्धन | आलू, अदरक, गन्ना | एक |
| लैंगिक जनन | पुष्पी पौधे, जंतु | दो |
परागण — किसी पुष्प के परागकोश से उसी या दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण।
Exam me kaise aata hai
- अमीबा में जनन किससे होता है — द्विविभाजन
- यीस्ट में जनन किससे होता है — मुकुलन
- निषेचन के बाद अंडाशय क्या बनता है — फल
- परागकोश से वर्तिकाग्र तक पराग का जाना — परागण
UPSC/State PSC ke liye
- अलैंगिक जनन तेज और विश्वसनीय है पर विविधता नहीं देता, जिससे पूरी आबादी किसी एक रोग या परिवर्तन के सामने असुरक्षित हो जाती है।
- कायिक प्रवर्धन व्यावसायिक रूप से इसलिए अपनाया जाता है कि यह जनक पौधे के ठीक वही गुण बनाए रखता है और बीज से उगे पौधे से कहीं जल्दी फल देता है।
Yahan confuse hote hain
✗ परागण और निषेचन एक ही हैं | परागण पराग का स्थानांतरण; निषेचन युग्मकों का संलयन है | ✓
✗ बीजांड फल बनता है | बीजांड बीज बनता है; अंडाशय फल बनता है | ✓
✗ अलैंगिक जनन विविधता देता है | यह जनक के समान संतति देता है | ✓
Ek nazar me
- अलैंगिक जनन में एक जनक और समान संतति होती है।
- विभाजन, मुकुलन, खंडन, पुनरुद्भवन, बीजाणु और कायिक प्रवर्धन इसकी विधियां हैं।
- लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं और विविधता बनती है।
- परागण पराग ले जाता; निषेचन युग्मक मिलाता; अंडाशय फल और बीजांड बीज बनता है।
