प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार
Types of Natural Vegetation
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Natural Vegetation and Wildlife" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Natural Vegetation"
प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार
भारत पादप जीवन में विश्व के मेगा विविध देशों में है, क्योंकि यहां जलवायु, उच्चावच और मृदा में बहुत विविधता है। प्राकृतिक वनस्पति का वर्गीकरण मुख्यतः वर्षा के आधार पर होता है, और पांच व्यापक प्रकार माने जाते हैं - सर्वाधिक आर्द्र क्षेत्रों के सदाबहार वन से लेकर सर्वाधिक शुष्क क्षेत्रों की कंटीली झाड़ियों तक।
वर्षा के अनुसार वन प्रकार
- उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन लगभग 200 cm से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में उगते हैं - पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर तथा अंडमान और निकोबार; पेड़ एक साथ सारे पत्ते नहीं गिराते, इसलिए वन वर्ष भर हरा दिखता है।
- इसके वृक्षों में महोगनी, आबनूस और रोजवुड हैं; वन घना और बहुस्तरीय होता है।
- उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत का सर्वाधिक विस्तृत वन प्रकार है, जो लगभग 70 से 200 cm वर्षा में मिलता है; पेड़ शुष्क ऋतु में पत्ते गिराते हैं।
- यह आर्द्र पर्णपाती, जिसमें सागौन, साल और शीशम हैं, तथा शुष्क पर्णपाती, जिसमें सागौन, बेल और मिश्रित प्रजातियां हैं, में बंटा है।
- कंटीले वन और झाड़ियां लगभग 50 cm से कम वर्षा में राजस्थान, गुजरात और आंतरिक दक्कन में उगते हैं; बबूल, खेजड़ी और नागफनी प्रमुख हैं, जिनकी जड़ें लंबी और छाल मोटी होती है।
- पर्वतीय वन ऊंचाई के साथ बदलते हैं: तलहटी में चौड़ी पत्ती, फिर चीड़, देवदार और स्प्रूस, फिर अल्पाइन घास और अंत में टुंड्रा।
- मैंग्रोव वन ज्वारीय तटीय डेल्टाओं में उगते हैं; सुंदरी वृक्ष से ही सुंदरबन का नाम पड़ा।
| वन प्रकार | वर्षा | प्रमुख वृक्ष |
|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय सदाबहार | 200 cm से अधिक | महोगनी, रोजवुड |
| आर्द्र पर्णपाती | 100 से 200 cm | सागौन, साल, शीशम |
| शुष्क पर्णपाती | 70 से 100 cm | सागौन, बेल |
| कंटीले और झाड़ी | 50 cm से कम | बबूल, खेजड़ी |
| मैंग्रोव | ज्वारीय तट | सुंदरी |
पर्णपाती (Deciduous) — वे वृक्ष जो प्रतिवर्ष किसी विशेष शुष्क ऋतु में अपने पत्ते गिरा देते हैं।
वनस्पति क्यों बदलती है
- वर्षा सबसे बड़ा नियंत्रक है कि कौन सा वन प्रकार बनेगा।
- तापमान और ऊंचाई मिलकर पर्वतीय ढाल पर वनस्पति बदलते हैं।
- मृदा तय करती है कि कौन सी प्रजाति जड़ पकड़ेगी; मैंग्रोव को लवणीय ज्वारीय कीचड़ चाहिए।
- मानव गतिविधि ने बड़े क्षेत्र साफ कर दिए हैं, इसलिए आज का अधिकांश आवरण पूर्णतः प्राकृतिक नहीं है।
- वन इमारती लकड़ी, ईंधन, गोंद, लाख, रेजिन और अनेक औषधीय पौधे देते हैं।
- ये मृदा को थामते हैं, भूजल भरते हैं और स्थानीय जलवायु को संतुलित रखते हैं।
- सामाजिक वानिकी और कृषि वानिकी आरक्षित वन भूमि के बाहर वृक्ष आवरण बढ़ाने का प्रयास हैं।
Exam me kaise aata hai
- भारत का सर्वाधिक विस्तृत वन प्रकार — उष्णकटिबंधीय पर्णपाती
- सुंदरबन का नाम किस वृक्ष पर पड़ा — सुंदरी
- सागौन और साल किस वन के वृक्ष हैं — आर्द्र पर्णपाती
- सदाबहार वन के लिए कितनी वर्षा चाहिए — 200 cm से अधिक
UPSC/State PSC ke liye
- मैंग्रोव वृक्षों में श्वसन मूल (pneumatophores) होती हैं, जो जलमग्न लवणीय कीचड़ से ऊपर निकलकर सांस लेती हैं।
- पर्णपाती वृक्ष शुष्क ऋतु में जल हानि घटाने के लिए पत्ते गिराते हैं, जो अनुकूलन है, रोग का लक्षण नहीं।
Yahan confuse hote hain
✗ भारत में सदाबहार वन सर्वाधिक विस्तृत हैं | पर्णपाती वन सर्वाधिक विस्तृत हैं | ✓
✗ साल कंटीले वन का वृक्ष है | साल आर्द्र पर्णपाती वन का वृक्ष है | ✓
✗ मैंग्रोव मीठे जल के दलदल में उगता है | मैंग्रोव लवणीय ज्वारीय तटीय कीचड़ में उगता है | ✓
Ek nazar me
- पांच प्रकार: सदाबहार, पर्णपाती, कंटीले, पर्वतीय, मैंग्रोव।
- वर्गीकरण का मुख्य आधार वर्षा है।
- पर्णपाती सर्वाधिक विस्तृत; सागौन और साल इसके प्रमुख वृक्ष।
- सुंदरबन का सुंदरी एक मैंग्रोव वृक्ष है।
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