निदेशक तत्वों का स्वरूप और वर्गीकरण
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 2
निदेशक तत्वों का स्वरूप और वर्गीकरण
राज्य के नीति निदेशक तत्व भाग 4, अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं। ये राज्य को निर्देश हैं कि उसे कैसा समाज बनाना चाहिए। ये न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर अनुच्छेद 37 इन्हें देश के शासन में मौलिक घोषित करता है।
निदेशक तत्वों का स्वरूप
- ये आयरलैंड के संविधान से लिए गए, जिसने स्वयं यह विचार स्पेन के संविधान से लिया था।
- अनुच्छेद 37 दो बातें कहता है - निदेशक तत्व किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, और फिर भी कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
- ये राज्य पर सकारात्मक दायित्व डालते हैं, जबकि मूल अधिकार मुख्यतः उस पर नकारात्मक प्रतिबंध लगाते हैं।
- ये नैतिक और राजनीतिक जनादेश हैं - जो सरकार इन्हें अनदेखा करे उसे जवाब मतदाता को देना होता है, न्यायाधीश को नहीं।
- इनका लक्ष्य कल्याणकारी राज्य तथा सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र है, जिसके बिना अकेला राजनीतिक लोकतंत्र अधूरा है।
इन्हें गैर-न्यायोचित क्यों रखा गया
- नए राज्य के पास सीमित संसाधन थे, और न्यायालय से ऐसा खर्च कराने को नहीं कहा जा सकता था जो कोष में था ही नहीं।
- इनमें समय के साथ सकारात्मक कार्रवाई चाहिए, जो एक न्यायिक आदेश से नहीं हो सकती।
- इनमें प्राथमिकता निर्वाचित सरकार को तय करनी चाहिए, जो जनता के प्रति उत्तरदायी है, न्यायालय को नहीं।
- आंबेडकर का तर्क था कि जो सरकार इनकी उपेक्षा करेगी उसे चुनाव में जवाब देना पड़ेगा।
त्रिस्तरीय वर्गीकरण
| वर्ग | स्वरूप | मुख्य अनुच्छेद |
|---|---|---|
| समाजवादी | सामाजिक और आर्थिक न्याय, कल्याणकारी राज्य | 38, 39, 39क, 41, 42, 43, 43क, 47 |
| गांधीवादी | ग्राम स्वराज, कुटीर उद्योग, कमजोर वर्गों का उत्थान | 40, 43, 43ख, 46, 47, 48 |
| उदारवादी-बौद्धिक | विधि, शिक्षा और शांति के आधुनिक उदार आदर्श | 44, 45, 48, 48क, 49, 50, 51 |
- यह वर्गीकरण संविधान में स्वयं नहीं है; इसका प्रयोग विद्वान और पाठ्यपुस्तकें सूची को समझने में आसान बनाने के लिए करते हैं।
- कुछ अनुच्छेद एक से अधिक वर्ग में आते हैं। पोषण और नशाबंदी वाला अनुच्छेद 47 समाजवादी भी है और गांधीवादी भी। कृषि तथा पशुपालन वाला अनुच्छेद 48 गांधीवादी और उदारवादी-बौद्धिक दोनों है।
- संशोधनों से नए निदेशक जोड़े गए हैं - 1976 के 42वें संशोधन से अनुच्छेद 39क, 43क और 48क, तथा 2011 के 97वें संशोधन से सहकारी समितियों पर अनुच्छेद 43ख।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि निदेशक तत्व किस भाग और किन अनुच्छेदों में हैं और किस देश से लिए गए। सुमेलित कीजिए में निदेशक और उसका वर्ग जुड़ता है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि ये प्रवर्तनीय हैं या नहीं - नहीं, पर शासन में मौलिक हैं।
UPSC / State PSC के लिए
निदेशक तत्वों को भाग 3 की नकारात्मक गारंटी के सामने संविधान का सकारात्मक कार्यक्रम बताइए। यह भी लिखें कि कई निदेशक अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावी हुए हैं, क्योंकि न्यायालयों ने उन्हें अनुच्छेद 21 में पढ़ा, और इसी से शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को विधिक बल मिला।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ नीति निदेशक तत्व रिट से लागू कराए जा सकते हैं | ✓ ये गैर-न्यायोचित हैं; रिट से केवल मूल अधिकार लागू होते हैं
✗ त्रिस्तरीय वर्गीकरण संविधान में दिया गया है | ✓ यह विद्वानों का वर्गीकरण है, संवैधानिक नहीं
✗ निदेशक तत्व अमेरिका से लिए गए | ✓ ये आयरलैंड के संविधान से आए
एक नजर में
- नीति निदेशक तत्व भाग 4, अनुच्छेद 36 से 51 में, आयरलैंड से लिए गए।
- अनुच्छेद 37 इन्हें गैर-न्यायोचित पर देश के शासन में मौलिक बताता है।
- ये राज्य पर सकारात्मक कर्तव्य डालते हैं, मूल अधिकारों के नकारात्मक प्रतिबंध से भिन्न।
- गैर-न्यायोचित इसलिए कि संसाधन सीमित थे और प्राथमिकता निर्वाचित सरकार तय करे।
- वर्गीकरण समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी-बौद्धिक, जो पाठ में नहीं है।
- अनुच्छेद 39क, 43क और 48क 1976 में; अनुच्छेद 43ख 2011 में जोड़े गए।
