नाभिकीय विज्ञान और ऊर्जा
NCERT कक्षा 12 • Physics • अध्याय "Nuclei" | NCERT कक्षा 10 • Science • अध्याय "Sources of Energy"
नाभिकीय विज्ञान और ऊर्जा
सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में केवल परमाणु के इलेक्ट्रॉन भाग लेते हैं, पर नाभिकीय अभिक्रियाएं नाभिक को ही बदल देती हैं। चूंकि नाभिकीय बल रासायनिक आबंधों से कहीं प्रबल हैं, ये अभिक्रियाएं उतने ही द्रव्यमान से कहीं अधिक ऊर्जा मुक्त करती हैं।
रेडियोसक्रियता, विखंडन और संलयन
- रेडियोसक्रियता अस्थिर नाभिक से विकिरण का स्वतः उत्सर्जन है, जिसे बेकरल ने खोजा और क्यूरी दंपति ने आगे अध्ययन किया।
- विकिरण के तीन प्रकार हैं अल्फा, जिसे कागज रोक देता है, बीटा, जिसे पतली धातु रोकती है, और गामा, जिसके लिए मोटा सीसा या कंक्रीट चाहिए।
- अर्ध आयु वह समय है जिसमें रेडियोसक्रिय नमूने के आधे परमाणु क्षय हो जाते हैं।
- नाभिकीय विखंडन यूरेनियम जैसे भारी नाभिक को हल्के नाभिकों में तोड़ता है, जिससे ऊर्जा और अधिक न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं।
- वे न्यूट्रॉन और नाभिक तोड़ते हैं, जिससे शृंखला अभिक्रिया बनती है, जो रिएक्टर में नियंत्रित और बम में अनियंत्रित रहती है।
- नाभिकीय संलयन हाइड्रोजन जैसे हल्के नाभिकों को जोड़कर भारी नाभिक बनाता है और उससे भी अधिक ऊर्जा देता है; यही सूर्य की ऊर्जा का स्रोत है।
- संलयन के लिए अत्यधिक ताप और दाब चाहिए, इसीलिए उसे अब तक व्यावसायिक विद्युत के लिए नहीं साधा जा सका।
रिएक्टर और भारत का कार्यक्रम
- नाभिकीय रिएक्टर में ईंधन छड़ें, न्यूट्रॉन धीमा करने वाला मंदक, उन्हें सोखने वाली नियंत्रक छड़ें, शीतलक और मोटा परिरक्षण होते हैं।
- भारी जल और ग्रेफाइट सामान्य मंदक हैं; बोरॉन और कैडमियम की छड़ें न्यूट्रॉन सोखकर अभिक्रिया दर नियंत्रित करती हैं।
- उत्पन्न ऊष्मा जल को भाप बनाती है, जो ठीक तापीय संयंत्र की तरह टरबाइन चलाती है।
- भारत त्रि-चरणीय नाभिकीय कार्यक्रम चलाता है, जो उसके बड़े थोरियम भंडार और सीमित यूरेनियम को ध्यान में रखकर बना है।
- पहला चरण प्राकृतिक यूरेनियम, दूसरा उससे बने प्लूटोनियम और तीसरा थोरियम के उपयोग के लिए बना है।
- विकिरण के शांतिपूर्ण उपयोगों में कैंसर उपचार, चिकित्सा उपकरणों का निर्जर्मीकरण, खाद्य परिरक्षण, चिकित्सा और कृषि में अनुरेखण, तथा प्राचीन वस्तुओं की तिथि निर्धारण आते हैं।
- मुख्य चिंताएं रेडियोसक्रिय अपशिष्ट निपटान, दुर्घटना जोखिम और बहुत ऊंची प्रारंभिक लागत हैं।
| लक्षण | विखंडन | संलयन |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | भारी नाभिक टूटता है | हल्के नाभिक जुड़ते हैं |
| ईंधन | यूरेनियम या प्लूटोनियम | हाइड्रोजन के समस्थानिक |
| दशाएं | रिएक्टर में संभव | अत्यधिक ऊंचा ताप |
| उदाहरण | नाभिकीय विद्युत संयंत्र | सूर्य की ऊर्जा |
अर्ध आयु — वह समय जिसमें किसी रेडियोसक्रिय नमूने के आधे परमाणु क्षय हो जाते हैं।
Exam me kaise aata hai
- सूर्य की ऊर्जा किससे आती है — नाभिकीय संलयन
- भारी नाभिक का टूटना कहलाता है — नाभिकीय विखंडन
- अभिक्रिया दर कौन सी छड़ें नियंत्रित करती हैं — बोरॉन या कैडमियम की नियंत्रक छड़ें
- भारत का त्रि-चरणीय कार्यक्रम किस पर आधारित है — थोरियम
UPSC/State PSC ke liye
- मंदक और नियंत्रक छड़ विपरीत काम करते हैं: मंदक न्यूट्रॉन धीमा करता है ताकि विखंडन चलता रहे, जबकि नियंत्रक छड़ उन्हें सोख लेती है ताकि वह बेकाबू न हो।
- भारत का त्रि-चरणीय कार्यक्रम इसलिए है कि उसके यूरेनियम भंडार छोटे हैं जबकि थोरियम भंडार विश्व के सबसे बड़े भंडारों में हैं।
Yahan confuse hote hain
✗ सूर्य की ऊर्जा विखंडन से आती है | वह संलयन से आती है | ✓
✗ मंदक न्यूट्रॉन सोखता है | मंदक उन्हें धीमा करता है; नियंत्रक छड़ें सोखती हैं | ✓
✗ संलयन विखंडन से सरल है | संलयन को चरम दशाएं चाहिए और वह कहीं कठिन है | ✓
Ek nazar me
- रेडियोसक्रियता अल्फा, बीटा और गामा विकिरण देती है; अर्ध आयु क्षय मापती है।
- विखंडन भारी नाभिक तोड़ता; संलयन हल्के जोड़ता और सूर्य चलाता है।
- रिएक्टर में मंदक, नियंत्रक छड़ें, शीतलक और परिरक्षण होते हैं।
- भारत का त्रि-चरणीय कार्यक्रम थोरियम भंडार पर आधारित है।
