लोकतंत्र के परिणाम और चुनौतियां
NCERT Class 10 - Democratic Politics II • NCERT Class 9 - Democratic Politics I
लोकतंत्र के परिणाम और चुनौतियां
लोकतंत्र का आकलन इस बात से होना चाहिए कि वह वास्तव में क्या देता है। एनसीईआरटी इसे पांच परिणामों पर परखती है - जवाबदेह सरकार, आर्थिक विकास, असमानता में कमी, विविधता का समायोजन, और गरिमा तथा स्वतंत्रता - और फिर हर लोकतंत्र के सामने खड़ी तीन चुनौतियां रखती है।
परिणामों का आकलन
- जवाबदेह, संवेदनशील और वैध सरकार लोकतंत्र की सबसे स्पष्ट सफलता है। यह धीमी है पर पारदर्शी है, प्रक्रिया का पालन करती है, और उससे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
- आर्थिक विकास और वृद्धि पर रिकॉर्ड मिला-जुला है और यह जनसंख्या, प्राथमिकताओं, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों तथा अन्य देशों के सहयोग पर निर्भर करता है।
- असमानता और गरीबी में कमी पर लोकतंत्रों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया; एक व्यक्ति एक वोट की राजनीतिक समानता के साथ संपत्ति का अत्यंत असमान स्वामित्व बना रहता है।
- सामाजिक विभाजनों के समायोजन में लोकतंत्र विकल्पों से कहीं बेहतर हैं, बशर्ते बहुमत के शासन को बदलते बहुमत का शासन समझा जाए, किसी एक समुदाय का स्थायी शासन नहीं।
- गरिमा और स्वतंत्रता में लोकतंत्र सबसे स्पष्ट रूप से सफल रहा है - स्त्रियों, अनुसूचित जातियों-जनजातियों, और कानून के समक्ष हर नागरिक की स्थिति में।
तीन चुनौतियां
| चुनौती | अर्थ | कहां लागू |
|---|---|---|
| बुनियादी चुनौती | लोकतंत्र की ओर संक्रमण और लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना | जो देश अभी लोकतांत्रिक नहीं हैं |
| विस्तार की चुनौती | लोकतांत्रिक सिद्धांत को सभी क्षेत्रों, समूहों और संस्थाओं तक ले जाना | भारत सहित अधिकांश स्थापित लोकतंत्र |
| लोकतंत्र की गहराई | संस्थाओं और व्यवहार को इतना मजबूत करना कि आम लोग सार्थक भागीदारी करें | सभी लोकतंत्र |
- बुनियादी चुनौती में सेना को राजनीति से दूर रखना, संप्रभु और कार्यशील सरकार बनाना, तथा राज्य को बाहरी नियंत्रण से बचाना आता है।
- विस्तार की चुनौती का अर्थ है संघीय सिद्धांत सभी इकाइयों तक ले जाना, निर्णय में स्त्रियों तथा अल्पसंख्यकों को शामिल करना, और स्थानीय शासन तथा संस्थाओं को लोकतांत्रिक नियंत्रण में लाना।
- गहराई की चुनौती का अर्थ है उन संस्थाओं को मजबूत करना जो जनभागीदारी और नियंत्रण संभव बनाती हैं, और धन तथा शक्तिशाली हितों का प्रभाव घटाना।
लोकतांत्रिक सुधार
- केवल कानूनी बदलाव की सीमा है - अवांछित प्रथाओं पर रोक लगाने वाले कानून प्रायः तब तक काम नहीं करते जब तक लोकतांत्रिक आंदोलन और नागरिक संगठन दबाव न बनाएं।
- सबसे अच्छे कानून वे हैं जो लोगों को स्वयं लोकतांत्रिक सुधार करने में सक्षम बनाएं, जैसे सूचना का अधिकार, जो नई पाबंदी जोड़ने के बजाय नागरिक का हाथ मजबूत करता है।
- लोकतांत्रिक सुधार मुख्यतः राजनीतिक सक्रियता और जन आंदोलनों से होते हैं, केवल अदालतों या अधिकारियों से नहीं।
- किसी भी सुधार प्रस्ताव पर यह भी सोचना चाहिए कि उसे लागू कैसे किया जाएगा, केवल यह नहीं कि वह सुनने में कितना अच्छा है।
भारत में लोकतंत्र - रिकॉर्ड
- 1952 से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के अंतर्गत नियमित चुनाव और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण लोकतांत्रिक सफलता का सबसे मजबूत प्रमाण हैं।
- गरीबों और वंचित समूहों की भागीदारी भारत में कई पुराने लोकतंत्रों से अधिक है, जो सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति को उलट देती है।
- संवैधानिक संरक्षण - मूल अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र निर्वाचन आयोग - संस्थागत आधार देते हैं।
- बनी हुई समस्याओं में चुनावों में धन और अपराध की भूमिका, दलों में आंतरिक लोकतंत्र की कमजोरी, और न्याय तक असमान पहुंच शामिल हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तीन चुनौतियों और उनके अर्थ का सुमेलित कीजिए बहुत आम है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि लोकतंत्र कौन सा परिणाम सबसे अच्छा देता है और कौन सा नहीं। व्यावहारिक प्रश्न किसी देश की स्थिति देकर पूछते हैं कि उसके सामने कौन सी चुनौती है।
UPSC / State PSC के लिए
निबंधात्मक उत्तर में तर्क दीजिए कि लोकतंत्र का मूल्यांकन जो संभव है और विकल्प क्या देते हैं इसके सामने होना चाहिए, किसी आदर्श के सामने नहीं। एनसीईआरटी जिस विरोधाभास को रेखांकित करती है उसे लिखिए - राजनीतिक समानता आर्थिक समानता से कहीं तेज बढ़ी है, और इस अंतर को पाटना ही गहराई की चुनौती का केंद्रीय काम है।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ भारत के सामने आज बुनियादी चुनौती है | ✓ भारत के सामने मुख्यतः विस्तार और गहराई की चुनौतियां हैं
✗ लोकतंत्र ने हर जगह आर्थिक असमानता घटाई है | ✓ नहीं; कई लोकतंत्रों में असमानता बनी हुई है
✗ लोकतांत्रिक सुधार अधिक कानून बनाकर होते हैं | ✓ सुधार मुख्यतः राजनीतिक सक्रियता और जन आंदोलनों पर निर्भर हैं
एक नजर में
- पांच परिणाम - जवाबदेह सरकार, विकास, समानता, विविधता का समायोजन, गरिमा।
- जवाबदेही और गरिमा लोकतंत्र की सबसे स्पष्ट सफलताएं हैं।
- वृद्धि और असमानता में कमी पर रिकॉर्ड मिला-जुला है।
- तीन चुनौतियां - बुनियादी, विस्तार और गहराई।
- भारत के सामने मुख्यतः विस्तार और गहराई की चुनौतियां हैं।
- सबसे अच्छे सुधार नागरिक को सशक्त करते हैं, जैसे सूचना का अधिकार।
- 1952 से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर नियमित चुनाव भारतीय लोकतंत्र का आधार हैं।
अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।
