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संसदीय नियंत्रण और समितियां

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 5

संसदीय नियंत्रण और समितियां

संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका के प्रति निरंतर उत्तरदायी रहती है। संसद यह नियंत्रण सदन में प्रश्न, प्रस्ताव और बहस से करती है, और सदन के बाहर विस्तृत काम समितियों से।

सदन में नियंत्रण

  • प्रश्नकाल - बैठक का पहला घंटा, जब सदस्य मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज पर प्रश्न पूछते हैं। तारांकित प्रश्नों का मौखिक उत्तर और पूरक प्रश्न होते हैं, अतारांकित का लिखित उत्तर, और अल्प सूचना प्रश्न अत्यावश्यक विषयों पर होते हैं।
  • शून्यकाल - प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय, जब सदस्य बिना पूर्व सूचना के अत्यावश्यक विषय उठाते हैं। यह भारतीय देन है और नियमों में इसका उल्लेख नहीं है।
  • स्थगन प्रस्ताव - सामान्य कार्य रोककर लोक महत्व के निश्चित अत्यावश्यक विषय पर चर्चा कराता है; इसमें निंदा का तत्व होता है और यह केवल लोकसभा में उपलब्ध है।
  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव - मंत्री का ध्यान लोक महत्व के अत्यावश्यक विषय पर खींचता है और वक्तव्य मांगता है। यह भी भारतीय उपकरण है।
  • अविश्वास प्रस्ताव - केवल लोकसभा में लाया जा सकता है; पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, क्योंकि अनुच्छेद 75 में सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत है।
  • निंदा प्रस्ताव - किसी एक मंत्री या पूरी परिषद के विरुद्ध हो सकता है, उसमें आधार बताना अनिवार्य है, और पारित होने पर त्यागपत्र आवश्यक नहीं।
  • कटौती प्रस्ताव - नीति कटौती, मितव्ययिता कटौती और सांकेतिक कटौती, जो अनुदान मांगों पर चर्चा के समय लाए जाते हैं।

संसदीय समितियां

समितिगठनकार्य
लोक लेखा समिति22 सदस्य - 15 लोकसभा, 7 राज्यसभालेखा और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट की जांच
प्राक्कलन समिति30 सदस्य, सभी लोकसभा सेव्यय में मितव्ययिता के सुझाव
लोक उपक्रम समिति22 सदस्य - 15 लोकसभा, 7 राज्यसभासार्वजनिक उपक्रमों के कामकाज की जांच
विभाग संबंधित स्थायी समितियांदोनों सदनों के सदस्यअपने मंत्रालयों की अनुदान मांगों और विधेयकों की जांच
  • कोई मंत्री वित्तीय समिति का सदस्य नहीं हो सकता, और परंपरा से लोक लेखा समिति का सभापति विपक्ष से होता है।
  • लोक लेखा समिति नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट पर काम करती है, इसीलिए उन्हें कभी-कभी उसका मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा जाता है।
  • विभाग संबंधित स्थायी समितियां सदन के दबाव से दूर विस्तृत और दलगत राजनीति से मुक्त जांच करने देती हैं, और अधिकांश विधेयक इन्हीं को भेजे जाते हैं।
  • समितियां सदन में समय की कमी और आधुनिक विधान की तकनीकी जटिलता की भरपाई करती हैं।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न लोक लेखा समिति का गठन और अविश्वास प्रस्ताव किस सदन में आता है, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में उपकरण और उसका स्वरूप जुड़ता है। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि शून्यकाल नियमों में है या नहीं - नहीं है।

UPSC / State PSC के लिए

मानक विश्लेषणात्मक बिंदु संसदीय नियंत्रण का ह्रास है - कम बैठकें, बहस के लिए कम समय, बार-बार व्यवधान और मांगों का गिलोटिन। इसके सामने समितियां जांच का अधिक प्रभावी साधन बन गई हैं, इसीलिए 1990 के दशक में शुरू हुई विभाग संबंधित स्थायी समिति व्यवस्था को महत्वपूर्ण सुधार माना जाता है।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

अविश्वास प्रस्ताव राज्यसभा में लाया जा सकता है  |   यह केवल लोकसभा में लाया जा सकता है

प्राक्कलन समिति में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं  |   इसमें केवल लोकसभा के सदस्य होते हैं

निंदा प्रस्ताव पारित होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है  |   त्यागपत्र केवल अविश्वास प्रस्ताव पर आवश्यक है

एक नजर में

  • प्रश्नकाल में तारांकित, अतारांकित और अल्प सूचना प्रश्न होते हैं।
  • शून्यकाल भारतीय देन है और नियमों में इसका उल्लेख नहीं है।
  • स्थगन और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लोक महत्व के अत्यावश्यक विषय उठाते हैं।
  • अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में और पारित होने पर पूरी परिषद को हटाता है।
  • लोक लेखा समिति में 22 सदस्य और काम नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट पर।
  • प्राक्कलन समिति में 30 सदस्य, सभी लोकसभा से।
  • विभाग संबंधित स्थायी समितियां विधेयकों और अनुदान मांगों की जांच करती हैं।

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