प्रायद्वीपीय नदियां
NCERT कक्षा 9 • Contemporary India I • अध्याय "Drainage" | NCERT कक्षा 11 • India Physical Environment • अध्याय "Drainage System"
प्रायद्वीपीय नदियां
प्रायद्वीपीय नदियां पुरानी, छोटी और मौसमी हैं, जो मुख्यतः वर्षा पर निर्भर हैं। अधिकांश पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और डेल्टा बनाती हैं। केवल कुछ, विशेषकर नर्मदा और तापी, भ्रंश घाटी से होकर पश्चिम में अरब सागर जाती हैं और ज्वारनदमुख बनाती हैं।
पूर्व की ओर बहने वाली नदियां
- गोदावरी सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है, जिसे दक्षिण गंगा कहते हैं; यह महाराष्ट्र में नासिक के पास से निकलती है।
- इसकी सहायक नदियां - पूर्णा, मंजरा, वैनगंगा, पेनगंगा, इंद्रावती।
- कृष्णा महाबलेश्वर के पास से निकलती है; प्रमुख सहायक नदियां कोयना, तुंगभद्रा, भीमा।
- कावेरी कर्नाटक की ब्रह्मगिरि पहाड़ियों से निकलती है और अपेक्षाकृत कम मौसमी है।
- महानदी छत्तीसगढ़ की ऊपरी भूमि से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
- ये चारों अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं।
- स्वर्णरेखा और दामोदर छोटानागपुर पठार का जल बहाती हैं; दामोदर को कभी "बंगाल का शोक" कहा जाता था।
| नदी | उद्गम | गिरती है |
|---|---|---|
| गोदावरी | नासिक, महाराष्ट्र | बंगाल की खाड़ी |
| कृष्णा | महाबलेश्वर | बंगाल की खाड़ी |
| कावेरी | ब्रह्मगिरि पहाड़ियां | बंगाल की खाड़ी |
| महानदी | छत्तीसगढ़ की ऊपरी भूमि | बंगाल की खाड़ी |
| नर्मदा | अमरकंटक | अरब सागर |
| तापी | सतपुड़ा श्रेणी | अरब सागर |
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियां
- नर्मदा अमरकंटक से निकलकर विंध्य और सतपुड़ा के बीच भ्रंश घाटी में पश्चिम बहती है।
- यह जबलपुर के पास संगमरमर चट्टानों में धुआंधार जलप्रपात बनाती है।
- तापी सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है और नर्मदा के समानांतर, वह भी भ्रंश घाटी में बहती है।
- दोनों ज्वारनदमुख (estuary) बनाती हैं, डेल्टा नहीं, क्योंकि भ्रंश घाटी संकरी और तीव्र ढाल वाली है।
- शरावती, पेरियार और भारतपुझा जैसी छोटी तेज धाराएं पश्चिमी घाट से अरब सागर जाती हैं।
ज्वारनदमुख (Estuary) — कीप के आकार का नदी मुहाना जहां नदी बिना डेल्टा बनाए समुद्र में मिलती है।
प्रायद्वीपीय नदियां अलग क्यों हैं
- ये कठोर चट्टान पर बहती हैं, इसलिए घाटियां उथली और तल चट्टानी होते हैं।
- ये लगभग संतुलित ढाल (graded profile) पा चुकी हैं, इसलिए कटाव और निक्षेपण दोनों सीमित हैं।
- हिमालयी नदियों की तुलना में इनके जलग्रहण क्षेत्र छोटे हैं।
- गर्मियों में ये तेजी से सिकुड़ती हैं क्योंकि इन्हें हिमनद से जल नहीं मिलता।
- पश्चिमी घाट प्रायद्वीप का मुख्य जल विभाजक है।
- स्थिर ढाल और गॉर्ज इन्हें जलविद्युत के लिए उपयोगी बनाते हैं।
डेल्टा और ज्वारनदमुख की तुलना
| लक्षण | डेल्टा | ज्वारनदमुख |
|---|---|---|
| आकार | त्रिभुजाकार, बंटी धाराएं | कीप जैसा, एक धारा |
| निक्षेपण | भारी गाद जमा होती है | गाद समुद्र में चली जाती है |
| भारतीय उदाहरण | गोदावरी, कृष्णा | नर्मदा, तापी |
Exam me kaise aata hai
- सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी — गोदावरी
- नर्मदा का उद्गम — अमरकंटक
- कौन सी नदियां ज्वारनदमुख बनाती हैं — नर्मदा और तापी
- दक्षिण गंगा किसे कहते हैं — गोदावरी
UPSC/State PSC ke liye
- नर्मदा और तापी भ्रंशन से बनी रिफ्ट घाटियों में बहती हैं, इसीलिए सामान्य पूर्वी ढाल के विपरीत पश्चिम जाती हैं।
- प्रायद्वीपीय नदियों की घाटियां चौड़ी और उथली हैं तथा ढाल लगभग संतुलित है, इसलिए निम्नवर्ती कटाव कम होता है।
Yahan confuse hote hain
✗ कृष्णा सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है | गोदावरी सबसे बड़ी है | ✓
✗ नर्मदा डेल्टा बनाती है | नर्मदा ज्वारनदमुख बनाती है | ✓
✗ तापी अमरकंटक से निकलती है | तापी सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है | ✓
Ek nazar me
- प्रायद्वीपीय नदियां वर्षा पर निर्भर, मौसमी और पुरानी हैं।
- पूर्ववाहिनी: गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी - सभी डेल्टा बनाती हैं।
- पश्चिमवाहिनी: नर्मदा और तापी भ्रंश घाटी में - ज्वारनदमुख।
- दामोदर और स्वर्णरेखा छोटानागपुर पठार का जल बहाती हैं।
