नियोजन और नेहरू युग
Planning and the Nehru Era
NCERT Class 12 - Politics in India Since Independence, Chapter 3
नियोजन और नेहरू युग
भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था में नियोजित विकास चुना - न सोवियत नमूने जैसा पूर्ण राज्य नियंत्रण, न पश्चिम जैसा मुक्त बाजार। राज्य भारी उद्योग और आधारभूत ढांचा बनाएगा, जबकि कृषि तथा उपभोक्ता वस्तुएं मुख्यतः निजी हाथों में रहेंगी।
नियोजन और योजना आयोग
- योजना आयोग की स्थापना 1950 में सरकार के कार्यपालिका प्रस्ताव से हुई; यह न संवैधानिक था न वैधानिक निकाय, और प्रधानमंत्री उसके अध्यक्ष थे।
- राष्ट्रीय विकास परिषद, जिसमें मुख्यमंत्री सदस्य थे, योजनाओं को स्वीकृति देती थी, जिससे राज्यों को औपचारिक भूमिका मिली।
- प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) ने कृषि, सिंचाई और शरणार्थी पुनर्वास को प्राथमिकता दी, और यह हैरोड-डोमर मॉडल से प्रभावित थी; के. एन. राज इससे निकटता से जुड़े थे।
- द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) निर्णायक रूप से भारी उद्योग की ओर मुड़ी, जिसका मॉडल सांख्यिकीविद पी. सी. महालनोबिस ने तैयार किया।
- 1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने प्रमुख उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किए और राज्य को अर्थव्यवस्था की कमान सौंपी।
- योजना आयोग की जगह 2015 में नीति आयोग आया, जो नीति थिंक टैंक है और उसके पास धन आवंटन की शक्ति नहीं है।
केंद्रीय बहसें
| बहस | दो पक्ष |
|---|---|
| पहले कृषि या उद्योग | उद्योग स्थायी क्षमता देता है बनाम कृषि लोगों को खिलाती है इसलिए पहले आए |
| सार्वजनिक या निजी क्षेत्र | प्रमुख उद्योगों पर राज्य नियंत्रण बनाम निजी पहल और दक्षता |
| पूंजी या श्रम प्रधान | भारी मशीन और तकनीक बनाम अधिक रोजगार देने वाला लघु उद्योग |
| केंद्रित या विकेंद्रित | ऊपर से नियोजन बनाम गांधीवादियों का पसंदीदा ग्राम स्तरीय नियोजन |
- उद्योग-प्रथम दृष्टिकोण के आलोचकों का तर्क था कि कृषि की उपेक्षा से 1960 के दशक के मध्य का खाद्य संकट आया।
- समर्थकों का तर्क था कि सार्वजनिक धन से भारी औद्योगिक आधार बनाए बिना भारत मशीनों और रक्षा सामग्री के लिए आयात पर निर्भर रहता।
कृषि, भूमि सुधार और हरित क्रांति
- जमींदारी उन्मूलन सबसे सफल भूमि सुधार था, जिसने मध्यस्थ हटाकर कृषक को सीधे राज्य से जोड़ा।
- भूमि सीमा कानून और काश्तकारी सुधार कहीं कम सफल रहे, जिन्हें छूटों, बेनामी हस्तांतरण और खराब भूमि अभिलेखों ने कमजोर किया।
- 1960 के दशक के मध्य की हरित क्रांति ने अधिक उपज वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, सिंचाई और आश्वस्त खरीद मूल्य का उपयोग किया और भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया।
- इसके लाभ क्षेत्रीय रूप से केंद्रित रहे, मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, और अधिकतर मध्यम तथा बड़े किसानों को मिले, जिससे असमानता बढ़ी।
- दीर्घकालिक लागत में गिरता भूजल स्तर, मिट्टी का क्षरण और सब्सिडी वाले आदानों पर भारी निर्भरता शामिल हैं।
- वर्गीज कुरियन से जुड़ा दुग्ध सहकारी आंदोलन ऑपरेशन फ्लड भारत को अग्रणी दुग्ध उत्पादक बना गया और यह राज्य नहीं, सहकारिता आधारित सफलता का मानक उदाहरण है।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि किस योजना ने भारी उद्योग पर बल दिया और उसका मॉडल किसने बनाया, तथा योजना आयोग की जगह कौन सा निकाय आया। सुमेलित कीजिए में योजना और प्राथमिकता जुड़ती है। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि हरित क्रांति ने क्षेत्रीय असमानता क्यों बढ़ाई।
UPSC / State PSC के लिए
निबंध में नियोजन को इससे आंकिए कि उसने क्या हासिल किया और क्या चूक गया - उसने उद्योग, आधारभूत ढांचा, वैज्ञानिक संस्थाएं और खाद्य आत्मनिर्भरता दी, पर भूमि सुधार, सार्वभौमिक साक्षरता और रोजगार नहीं दे सका। मानक सूत्र यह है कि नियोजन क्षमता निर्माण में सफल और पुनर्वितरण में विफल रहा।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ योजना आयोग संवैधानिक निकाय था | ✓ यह 1950 में कार्यपालिका प्रस्ताव से बना था
✗ प्रथम योजना ने भारी उद्योग पर बल दिया | ✓ प्रथम योजना ने कृषि पर; द्वितीय ने भारी उद्योग पर बल दिया
✗ हरित क्रांति का लाभ सभी क्षेत्रों को समान मिला | ✓ लाभ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केंद्रित रहा
एक नजर में
- भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था में नियोजित विकास चुना।
- योजना आयोग 1950 में कार्यपालिका प्रस्ताव से बना, अधिनियम से नहीं।
- प्रथम योजना 1951-56 कृषि पर; द्वितीय योजना 1956-61 भारी उद्योग पर केंद्रित।
- द्वितीय योजना का मॉडल पी. सी. महालनोबिस ने बनाया; 1956 की नीति सार्वजनिक क्षेत्र पक्षधर।
- जमींदारी उन्मूलन सफल; भूमि सीमा और काश्तकारी सुधार अधिकतर असफल।
- हरित क्रांति ने खाद्य आत्मनिर्भरता दी पर लाभ क्षेत्रीय रूप से केंद्रित रहा।
- वर्गीज कुरियन के ऑपरेशन फ्लड ने भारत को अग्रणी दुग्ध उत्पादक बनाया।
Checking your account…
It takes a minute with your WhatsApp number. Reading is free.
Done with this topic?
Lock it in with a quick Practice Set, then move on.