राजनीतिक दल और उनकी भूमिका
NCERT Class 10 - Democratic Politics II • NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work
राजनीतिक दल और उनकी भूमिका
राजनीतिक दल उन लोगों का समूह है जो चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता संभालने के लिए साथ आते हैं। उसके पास नीतियों और कार्यक्रमों का सहमत समूह होता है, और वह उसी को सामूहिक हित मानकर आगे बढ़ाता है।
घटक और कार्य
- दल के तीन घटक होते हैं - नेता, सक्रिय सदस्य और अनुयायी या समर्थक।
- चुनाव लड़ना - अधिकांश लोकतंत्रों में उम्मीदवार दल ही चुनते और खड़े करते हैं।
- नीतियां और कार्यक्रम रखना - दल असंख्य भिन्न मतों को कुछ व्यापक स्थितियों में समेटते हैं, जिनमें से मतदाता चुन सके।
- कानून बनाना - कानून विधायिका में बहस के बाद पारित होते हैं, पर निर्णय व्यवहार में दल का नेतृत्व लेता है और सदस्य दल के साथ मतदान करते हैं।
- सरकार बनाना और चलाना - दल नेता तैयार करते हैं, उन्हें मंत्री बनाते हैं और सरकार चलाते हैं।
- विपक्ष की भूमिका - हारने वाले दल सरकार की आलोचना करते हैं, शिकायतें उठाते हैं और विकल्प देते हैं।
- जनमत को आकार देना - दल मुद्दे उठाते और उभारते हैं, और प्रायः दबाव समूहों तथा आंदोलनों से जुड़े रहते हैं।
- सरकारी तंत्र और कल्याण योजनाओं तक पहुंच देना, इसीलिए स्थानीय दल कार्यकर्ता आम नागरिक के लिए महत्वपूर्ण होता है।
दल प्रणालियां
| प्रणाली | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकदलीय प्रणाली | केवल एक दल को सरकार चलाने की अनुमति | लोकतांत्रिक नहीं |
| द्विदलीय प्रणाली | सत्ता प्रायः दो बड़े दलों के बीच बदलती है | अमेरिका, ब्रिटेन |
| बहुदलीय प्रणाली | कई दल प्रतिस्पर्धा करते हैं, सरकारें प्रायः गठबंधन की | भारत |
- भारत की बहुदलीय प्रणाली यहां की सामाजिक और भौगोलिक विविधता का सीधा परिणाम है, जिसे दो दल समेट नहीं सकते थे।
- यह प्रणाली राजनीतिक अव्यवस्था और अस्थिरता जैसी दिखती है, पर यह विविध हितों और क्षेत्रों को आवाज देती है, इसीलिए टिकी हुई है।
मान्यता और चुनौतियां
- निर्वाचन आयोग सभी दलों का पंजीकरण करता है और चुनाव चिह्न आदेश के अंतर्गत निर्धारित चुनावों में मत तथा सीट के आवश्यक हिस्से के आधार पर राष्ट्रीय या राज्य दल की मान्यता देता है।
- मान्यता प्राप्त दलों को आरक्षित चुनाव चिह्न, नि:शुल्क प्रसारण समय और अन्य सुविधाएं मिलती हैं; राष्ट्रीय दल का चिह्न पूरे देश में आरक्षित रहता है।
- दलों के सामने चुनौतियां - आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, जिसमें नियमित संगठनात्मक चुनाव नहीं होते और निर्णय शीर्ष पर केंद्रित रहते हैं।
- वंशवादी उत्तराधिकार, जो सीधे आंतरिक लोकतंत्र के अभाव से निकलता है।
- उम्मीदवार चयन और प्रचार में धन तथा बाहुबल की बढ़ती भूमिका।
- जहां दल बुनियादी मुद्दों पर बहुत भिन्न नहीं होते, वहां मतदाता के सामने सार्थक विकल्प नहीं रहता।
- सुधार - दल-बदल विरोधी कानून, उम्मीदवारों के अनिवार्य शपथपत्र, दलों के लिए आयकर विवरणी और संगठनात्मक चुनाव की शर्त, तथा सरकारी फंडिंग और उम्मीदवार सूची में स्त्रियों के कोटे के प्रस्ताव।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न दल के तीन घटक और मान्यता कौन देता है, पूछते हैं। सुमेलित कीजिए में दल प्रणाली और उदाहरण जुड़ते हैं। व्यावहारिक प्रश्न वंशवाद या दल-बदल की स्थिति देकर पूछते हैं कि वह किस चुनौती या सुधार से संबंधित है।
UPSC / State PSC के लिए
दलों को समाज और राज्य के बीच अनिवार्य कड़ी बताइए - इनके बिना हर उम्मीदवार निर्दलीय होता, शासन के लिए किसी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, और कोई स्थिर नीति दिशा नहीं बनती। फिर तर्क दीजिए कि इनकी कमियों का उपाय नियमन और आंतरिक लोकतंत्र है, दलविहीन राजनीति की कल्पना नहीं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ एकदलीय प्रणाली लोकतंत्र का एक रूप है | ✓ यह लोकतांत्रिक नहीं है, क्योंकि वास्तविक विकल्प नहीं होता
✗ दलों को मान्यता संसद देती है | ✓ मान्यता निर्वाचन आयोग देता है
✗ द्विदलीय प्रणाली में केवल दो दल होते हैं | ✓ कई दल होते हैं, पर सत्ता प्रायः दो के बीच बदलती है
एक नजर में
- राजनीतिक दल सहमत कार्यक्रम के साथ चुनाव लड़ता और सत्ता चाहता है।
- तीन घटक - नेता, सक्रिय सदस्य और अनुयायी।
- कार्य - चुनाव लड़ना, नीति बनाना, कानून बनाना, सरकार चलाना, विपक्ष बनना, जनमत गढ़ना।
- एकदलीय, द्विदलीय और बहुदलीय प्रणाली; भारत विविधता के कारण बहुदलीय है।
- निर्वाचन आयोग दलों का पंजीकरण करता और राष्ट्रीय या राज्य दल की मान्यता देता है।
- चुनौतियां - आंतरिक लोकतंत्र का अभाव, वंशवाद, धन-बाहुबल, सीमित विकल्प।
- सुधार - दल-बदल कानून, शपथपत्र, संगठनात्मक चुनाव और सरकारी फंडिंग के प्रस्ताव।
