निर्धनता और बेरोजगारी
NCERT कक्षा 9 • Economics • अध्याय "Poverty as a Challenge" | NCERT कक्षा 11 • Indian Economic Development • अध्याय "Poverty" और "Employment"
निर्धनता और बेरोजगारी
निर्धनता का अर्थ है न्यूनतम जीवन स्तर भी न जुटा पाना। यह केवल कम आय नहीं, बल्कि भूख, खराब आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का अभाव तथा आवाज का अभाव भी है। बेरोजगारी का अर्थ है कि प्रचलित मजदूरी पर काम करने के इच्छुक और सक्षम लोगों को काम नहीं मिल रहा, और यही निर्धनता के मुख्य कारणों में है।
निर्धनता और उसका मापन
- निर्धनता रेखा न्यूनतम उपभोग टोकरी पर आधारित एक काल्पनिक रेखा है, जिसमें मुख्यतः कैलोरी आवश्यकता और अनिवार्य गैर-खाद्य वस्तुएं आती हैं।
- इस रेखा के नीचे के लोग निर्धनता रेखा से नीचे कहलाते हैं, और ऐसे लोगों का हिस्सा शीर्ष गणना अनुपात है।
- सापेक्ष निर्धनता एक वर्ग की आय की तुलना दूसरे से करती है, जबकि निरपेक्ष निर्धनता एक निश्चित न्यूनतम से मापती है।
- सर्वाधिक प्रभावित वर्ग भूमिहीन मजदूर, अनियत श्रमिक, अनुसूचित जाति और जनजाति, तथा निर्धन परिवारों की महिलाएं और बच्चे हैं।
- कारणों में प्रारंभिक दशकों की कम वृद्धि, कृषि पर अधिक जनसंख्या निर्भरता, बेरोजगारी, ऋणग्रस्तता और असमान भूमि वितरण आते हैं।
- निर्धनता आगे भी बढ़ती है, क्योंकि निर्धन परिवार शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश नहीं कर पाते।
- खाद्यान्न की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पोषण कार्यक्रम भूख को सीधे संबोधित करते हैं।
बेरोजगारी के प्रकार और उपाय
- छिपी बेरोजगारी तब है जब किसी काम पर आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों, जो पारिवारिक खेतों में आम है।
- मौसमी बेरोजगारी तब होती है जब काम केवल कुछ महीनों में मिले, जैसे कृषि में।
- संरचनात्मक बेरोजगारी तब उठती है जब कौशल और उपलब्ध रोजगार मेल न खाएं।
- चक्रीय बेरोजगारी आर्थिक गतिविधि में मंदी के बाद आती है।
- शिक्षित बेरोजगारी विशेष नगरीय समस्या है, जहां योग्य लोग उपयुक्त कार्य नहीं पाते।
- उपायों में तीव्र श्रम प्रधान वृद्धि, कौशल प्रशिक्षण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्य, स्वरोजगार सहायता और बेहतर शिक्षा आते हैं।
| प्रकार | कहां आम | कारण |
|---|---|---|
| छिपी | पारिवारिक खेत | आवश्यकता से अधिक श्रमिक |
| मौसमी | कृषि | काम केवल कुछ महीनों में |
| संरचनात्मक | उद्योग और सेवा | कौशल का मेल न होना |
| चक्रीय | पूरी अर्थव्यवस्था | मांग में गिरावट |
निर्धनता रेखा — आय या उपभोग का वह स्तर जिससे नीचे व्यक्ति को निर्धन माना जाता है।
Exam me kaise aata hai
- निर्धनता रेखा से नीचे के लोगों का हिस्सा कहलाता है — शीर्ष गणना अनुपात
- पारिवारिक खेत पर अतिरिक्त श्रमिक क्या दर्शाते हैं — छिपी बेरोजगारी
- कौशल मेल न होने से बेरोजगारी कहलाती है — संरचनात्मक
- कृषि में मौसम के बाहर बेरोजगारी कहलाती है — मौसमी
UPSC/State PSC ke liye
- निर्धनता आकलन विवादित रहता है क्योंकि उपभोग टोकरी और कीमत सूचकांक का चयन मापी गई गणना को तेजी से बदल देता है।
- रोजगार गारंटी योजनाएं अंशतः मजदूरी फर्श का काम करती हैं, क्योंकि गारंटीशुदा मजदूरी स्थानीय अनियत श्रम दर की निचली सीमा बना देती है।
Yahan confuse hote hain
✗ निर्धनता का अर्थ केवल कम आय है | इसमें भूख, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य भी आते हैं | ✓
✗ छिपी बेरोजगारी का अर्थ पूर्ण बेरोजगारी है | इसका अर्थ बहुत कम योगदान के साथ काम करना है | ✓
✗ मौसमी और संरचनात्मक बेरोजगारी एक ही हैं | मौसमी पंचांग से; संरचनात्मक कौशल मेल न होने से | ✓
Ek nazar me
- निर्धनता रेखा न्यूनतम उपभोग टोकरी पर आधारित है।
- शीर्ष गणना अनुपात उस रेखा से नीचे लोगों का हिस्सा बताता है।
- बेरोजगारी के प्रकार: छिपी, मौसमी, संरचनात्मक, चक्रीय, शिक्षित।
- उपाय: श्रम प्रधान वृद्धि, कौशल, रोजगार गारंटी, शिक्षा।
