प्रागैतिहासिक भारत: पाषाण काल
NCERT Class 6 - Our Pasts I • NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I
प्रागैतिहासिक भारत: पाषाण काल
प्रागैतिहासिक काल वह लंबा दौर है जब लिपि नहीं थी और जानकारी केवल पत्थर के औजारों, हड्डियों और गुफा चित्रों से मिलती है। भारतीय प्रागितिहास को पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण में बांटा जाता है, इसके बाद ताम्रपाषाण आता है।
पाषाण काल के तीन चरण
- पुरापाषाण काल (Palaeolithic) - केवल शिकार और संग्रहण, न खेती न मिट्टी के बर्तन। औजार बड़े हस्तकुठार (hand-axe), क्लीवर और चॉपर थे।
- मध्यपाषाण काल (Mesolithic) - इसकी पहचान लघु पाषाण उपकरण (Microliths) हैं, जो लकड़ी या हड्डी के हत्थे में जड़े जाते थे। पशुपालन की शुरुआत यहीं से।
- नवपाषाण काल (Neolithic) - घिसे और चमकाए गए औजार, खेती, पशुपालन और मिट्टी के बर्तन। स्थायी झोपड़ियां और अनाज के गड्ढे मिलते हैं।
- ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic) - पत्थर के साथ तांबे के औजार, चित्रित मृद्भांड और गांव।
- ये चरण एक के बाद एक सीधी रेखा में नहीं आते - एक ही समय में अलग क्षेत्रों में अलग चरण चल सकते थे।
याद रखने योग्य स्थल
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश) - शैलाश्रय, जिनमें शिकार, नृत्य और पशुओं के प्रागैतिहासिक चित्र हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।
- मेहरगढ़ (बोलन घाटी, अब पाकिस्तान में) - उपमहाद्वीप के सबसे पुराने कृषक गांवों में से एक; गेहूं, जौ, बकरी और भेड़ के प्रमाण।
- बुर्जहोम (कश्मीर) - नवपाषाणिक गर्त आवास (pit dwelling) यानी जमीन खोदकर बनाए घर, और मालिक के साथ कुत्ते का दफन।
- चिरांद (बिहार) - गंगा किनारे का नवपाषाण स्थल, सींग और हड्डी के औजारों के लिए प्रसिद्ध।
- कोलडिहवा और महगड़ा (उत्तर प्रदेश) - चावल की प्रारंभिक खेती के प्रमाण।
- इनामगांव (महाराष्ट्र) - बड़ा ताम्रपाषाणिक गांव, अनाज भंडार और घर के फर्श के नीचे दफन।
औजारों का पदार्थ और तकनीक
- अधिकांश औजार क्वार्टजाइट नामक कठोर चट्टान से बने, इसीलिए पुरापाषाण मानव को क्वार्टजाइट मानव भी कहा जाता है।
- औजार या तो पत्थर के केंद्र से परत उतारकर बनते थे, या केंद्र को ही तराशकर।
- घिसाई और पॉलिश नवपाषाण की तकनीकी पहचान है - इससे धार तेज और टिकाऊ होती है।
- लघु उपकरण लकड़ी के डंडे में राल से जोड़े जाते थे, जिससे हंसिया या तीर बनता था।
| चरण | मुख्य औजार | अर्थव्यवस्था | उदाहरण स्थल |
|---|---|---|---|
| पुरापाषाण | हस्तकुठार, चॉपर | शिकार, संग्रहण | भीमबेटका, हुंसगी |
| मध्यपाषाण | माइक्रोलिथ | शिकार, प्रारंभिक पशुपालन | बागोर, आदमगढ़ |
| नवपाषाण | पॉलिश कुल्हाड़ी, चक्की | खेती, पशुपालन | मेहरगढ़, बुर्जहोम |
| ताम्रपाषाण | तांबा और पत्थर | ग्रामीण खेती | इनामगांव, आहड़ |
भीमबेटका के चित्र कैसे दिखते हैं
एनसीईआरटी में ये रेखा-चित्रों के रूप में दिखाए गए हैं। कल्पना कीजिए एक खुरदरी चट्टानी छत जिस पर लाल और सफेद रंग में डंडेनुमा मानव आकृतियां बनी हैं। शिकारी धनुष और भाले लिए हैं; बाइसन या हिरण जैसा कोई बड़ा पशु मनुष्यों से कहीं बड़ा दिखाया गया है और चारों ओर से घेरा गया है। दूसरे हिस्सों में हाथ पकड़े नाचती पंक्तियां और बाद की परतों में घुड़सवार दिखते हैं। लाल रंग हेमेटाइट (गेरू) से और सफेद चूने के लेप से बनता था।
परीक्षा में कैसे आता है
इस टॉपिक से अधिकतर तथ्यात्मक और सुमेलित कीजिए प्रकार के प्रश्न बनते हैं - स्थल के साथ राज्य, या औजार के साथ चरण। कथन-आधारित प्रश्न यह जांचते हैं कि खेती नवपाषाण की है या पुरापाषाण की। भीमबेटका, मेहरगढ़ और बुर्जहोम सबसे अधिक पूछे जाने वाले नाम हैं।
UPSC / State PSC के लिए
ध्यान रखें कि नवपाषाणिक बदलाव अब क्रमिक और क्षेत्रीय माना जाता है, अचानक आई क्रांति नहीं। बुर्जहोम के गर्त आवास ठंडी जलवायु के अनुकूल थे, और मेहरगढ़ दिखाता है कि उपमहाद्वीप में खेती स्वतंत्र रूप से शुरू हुई, केवल पश्चिम एशिया से उधार लेकर नहीं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ माइक्रोलिथ नवपाषाण के हैं | ✓ माइक्रोलिथ मध्यपाषाण की पहचान हैं
✗ भीमबेटका महाराष्ट्र में है | ✓ भीमबेटका मध्य प्रदेश में है
✗ बुर्जहोम चावल के लिए प्रसिद्ध है | ✓ बुर्जहोम गर्त आवास और कुत्ते के दफन के लिए प्रसिद्ध है
एक नजर में
- प्रागितिहास = लिपि से पहले का काल; औजार, हड्डी और चित्रों से जानकारी।
- पुरापाषाण - हस्तकुठार, केवल शिकार; मध्यपाषाण - माइक्रोलिथ; नवपाषाण - पॉलिश औजार, खेती, बर्तन।
- ताम्रपाषाण में तांबा जुड़ता है; इनामगांव और आहड़ इसके प्रमुख स्थल।
- भीमबेटका - शैल चित्र, मध्य प्रदेश, यूनेस्को स्थल।
- मेहरगढ़ - सबसे पुराना कृषक गांव; बुर्जहोम - गर्त आवास; चिरांद - हड्डी के औजार।
- कोलडिहवा और महगड़ा में प्रारंभिक चावल; औजारों के लिए क्वार्टजाइट सबसे पसंदीदा पत्थर।
