राष्ट्रपति: निर्वाचन और शक्तियां
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 4
राष्ट्रपति: निर्वाचन और शक्तियां
राष्ट्रपति राज्य के प्रमुख और कार्यपालिका के औपचारिक प्रमुख हैं, वास्तविक प्रमुख नहीं। अनुच्छेद 74 के अनुसार वे प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। संघ की सारी कार्यपालिका कार्रवाई उन्हीं के नाम से होती है।
निर्वाचन और योग्यताएं
- राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं, तथा 70वें संशोधन के बाद दिल्ली और पुदुच्चेरी के भी।
- राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सदस्य मतदान नहीं करते, और विधान परिषदों के सदस्य भी मतदान नहीं करते।
- पद्धति एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व है, और मतदान गुप्त मतपत्र से होता है।
- मतों का मूल्य इस तरह तौला जाता है कि संघ और राज्यों के बीच समता रहे और राज्यों में एकरूपता।
- योग्यताएं - भारत का नागरिक, कम से कम 35 वर्ष आयु, लोकसभा के निर्वाचन के लिए योग्य, और लाभ का पद धारण न करता हो।
- कार्यकाल पांच वर्ष है, और पुनर्निर्वाचन पर कोई रोक नहीं है।
महाभियोग
- राष्ट्रपति को केवल अनुच्छेद 61 के महाभियोग से हटाया जा सकता है, और केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर।
- आरोप किसी भी सदन में लाया जा सकता है, कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव से, चौदह दिन की सूचना के बाद।
- उसे उस सदन की कुल सदस्यता के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए, और फिर दूसरा सदन जांच करके उसी तरह पारित करे।
- महाभियोग में मनोनीत सदस्य भाग ले सकते हैं, क्योंकि यह संसदीय प्रक्रिया है, पर विधायक नहीं, जबकि वे निर्वाचन में मतदान करते हैं।
राष्ट्रपति की शक्तियां
| श्रेणी | मुख्य शक्तियां |
|---|---|
| कार्यपालिका | प्रधानमंत्री, मंत्री, न्यायाधीश, राज्यपाल, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक, महान्यायवादी, निर्वाचन आयुक्त और संघ लोक सेवा आयोग सदस्यों की नियुक्ति |
| विधायी | संसद का सत्रावसान और आहूत करना, लोकसभा भंग करना, अभिभाषण, राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत करना, विधेयकों पर अनुमति |
| अध्यादेश | अनुच्छेद 123 में संसद सत्र में न होने पर अध्यादेश; इसे संसद के समक्ष रखना होता है और पुनः बैठने के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाता है |
| वित्तीय | धन विधेयक के लिए पूर्व सिफारिश, बजट रखवाना, वित्त आयोग की नियुक्ति |
| न्यायिक | अनुच्छेद 72 में क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार या दंडादेश का लघुकरण |
| आपात | अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपात, 356 राष्ट्रपति शासन, 360 वित्तीय आपात |
| सैनिक और राजनयिक | सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सेनापति; संधियां और अंतरराष्ट्रीय समझौते उन्हीं के नाम से |
- 42वें संशोधन ने मंत्रिपरिषद की सलाह बाध्यकारी बनाई; 44वें संशोधन ने राष्ट्रपति को सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने की अनुमति दी, जिसके बाद उन्हें उसे मानना ही होता है।
- साधारण विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति दे सकते हैं, रोक सकते हैं, या एक बार लौटा सकते हैं। चूंकि विधेयक पर कार्रवाई की कोई समय सीमा नहीं है, वे व्यवहार में अनिश्चित काल तक टाल सकते हैं - इसे पॉकेट वीटो कहते हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में कौन मतदान करता है, न्यूनतम आयु क्या है, और क्षमादान किस अनुच्छेद में है। कथन-आधारित प्रश्न निर्वाचक मंडल और महाभियोग प्रक्रिया का अंतर जांचते हैं। सुमेलित कीजिए में अनुच्छेद और शक्ति जुड़ती है।
UPSC / State PSC के लिए
राष्ट्रपति की स्थिति ठीक-ठीक रखिए - वे सलाह पर कार्य करने वाले संवैधानिक प्रमुख हैं, पर कुछ स्थितियों में उनके पास वास्तविक विवेक रहता है, जैसे किसी दल को बहुमत न मिलने पर प्रधानमंत्री की नियुक्ति, विश्वास खो चुकी सरकार को हटाना, और अनुमति देने का समय। परीक्षक यही परिस्थितिजन्य विवेकाधिकार खोजते हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ विधान परिषद के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करते हैं | ✓ केवल संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं
✗ राष्ट्रपति पर कुशासन के लिए महाभियोग हो सकता है | ✓ एकमात्र आधार संविधान का उल्लंघन है
✗ राष्ट्रपति को हर स्थिति में सलाह माननी ही होती है | ✓ कुछ स्थितियों में, जैसे त्रिशंकु संसद में, उनके पास विवेक होता है
एक नजर में
- निर्वाचन निर्वाचित सांसदों और निर्वाचित विधायकों के निर्वाचक मंडल से, दिल्ली-पुदुच्चेरी सहित।
- पद्धति एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व, मतदान गुप्त मतपत्र से।
- योग्यताएं - नागरिक, 35 वर्ष, लोकसभा के योग्य; कार्यकाल पांच वर्ष, पुनर्निर्वाचन संभव।
- अनुच्छेद 61 का महाभियोग केवल संविधान उल्लंघन पर, कुल सदस्यता के दो-तिहाई से।
- अनुच्छेद 123 में अध्यादेश शक्ति; अनुच्छेद 72 में क्षमादान शक्ति।
- आपात शक्तियां अनुच्छेद 352, 356 और 360 में।
- 44वां संशोधन उन्हें सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने देता है।
