प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
NCERT Class 11 - Indian Constitution at Work, Chapter 4
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
वास्तविक कार्यपालिका शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है। अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाली परिषद का प्रावधान करता है, और अनुच्छेद 75 बताता है कि उसकी नियुक्ति कैसे होती है और वह किसके प्रति उत्तरदायी है।
नियुक्ति और गठन
- प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, जो परंपरा से लोकसभा में बहुमत रखने वाले दल या गठबंधन के नेता को बुलाते हैं।
- अन्य मंत्री राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं और उन्हीं के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।
- जो मंत्री किसी सदन का सदस्य नहीं है उसे छह माह के भीतर सदस्य बनना होता है।
- 2003 के 91वें संशोधन ने मंत्रिपरिषद का आकार केंद्र में लोकसभा की संख्या के 15 प्रतिशत और राज्य में विधानसभा के 15 प्रतिशत तक सीमित किया, राज्यों में न्यूनतम बारह।
- परिषद में तीन श्रेणियां हैं - कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री। मंत्रिमंडल वह छोटा आंतरिक निकाय है जो वास्तविक निर्णय लेता है; कैबिनेट शब्द संविधान में केवल 44वें संशोधन से आया।
उत्तरदायित्व
- सामूहिक उत्तरदायित्व - अनुच्छेद 75 कहता है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर सभी मंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ता है, राज्यसभा से आने वालों को भी।
- सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ यह भी है कि निर्णय हो जाने पर हर मंत्री उसका सार्वजनिक रूप से बचाव करे, चाहे बैठक में उसका मत कुछ भी रहा हो; जो ऐसा न कर सके उसे त्यागपत्र देना होता है।
- व्यक्तिगत उत्तरदायित्व - मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है, जिसका व्यावहारिक अर्थ है कि प्रधानमंत्री किसी भी मंत्री से त्यागपत्र मांग सकते हैं।
- अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य बनाता है कि वे मंत्रिमंडल के सभी निर्णय राष्ट्रपति को बताएं और मांगी गई जानकारी दें।
प्रधानमंत्री की शक्तियां
- मंत्रियों की नियुक्ति और हटाने की सिफारिश करते हैं और उनमें विभाग बांटते हैं।
- मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और कार्यसूची पर नियंत्रण से निर्णयों को दिशा दे सकते हैं।
- राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच मुख्य कड़ी हैं।
- लोकसभा में बहुमत दल का नेतृत्व करते हैं और उसके मुख्य प्रवक्ता हैं, इसलिए उनका राजनीतिक अधिकार उसी बहुमत पर टिका है।
- लोकसभा भंग करने और वरिष्ठ नियुक्तियों पर राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।
- प्रमुख निकायों की अध्यक्षता करते हैं और विदेश नीति में सरकार के प्रमुख स्वर हैं।
- इसलिए प्रधानमंत्री की वास्तविक शक्ति इस पर निर्भर करती है कि वे एकदलीय बहुमत का नेतृत्व कर रहे हैं या गठबंधन का, और उत्तरों में यही तुलना अपेक्षित है।
उपराष्ट्रपति
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद | 63 से 71 |
| निर्वाचक मंडल | संसद के दोनों सदनों के सदस्य, निर्वाचित और मनोनीत दोनों |
| पद्धति | एकल संक्रमणीय मत से आनुपातिक प्रतिनिधित्व, गुप्त मतपत्र |
| योग्यताएं | नागरिक, 35 वर्ष, राज्यसभा के निर्वाचन के योग्य |
| कार्यकाल | पांच वर्ष |
| पद | राज्यसभा के पदेन सभापति |
| हटाना | राज्यसभा का प्रस्ताव, जिस पर लोकसभा की सहमति हो |
- पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, अधिकतम छह माह तक, जिसके भीतर नया राष्ट्रपति चुना जाना चाहिए।
- राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय वे राज्यसभा के सभापति का काम नहीं करते और राष्ट्रपति का वेतन लेते हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि सामूहिक उत्तरदायित्व किस अनुच्छेद में है, गैर-सदस्य मंत्री की समय सीमा क्या है, और उपराष्ट्रपति को कौन चुनता है। कथन-आधारित प्रश्न दोनों निर्वाचक मंडलों की तुलना करते हैं। व्यावहारिक प्रश्न पूछते हैं कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर क्या होता है।
UPSC / State PSC के लिए
एकदलीय युग और गठबंधन युग की तुलना कीजिए - सामूहिक उत्तरदायित्व और प्रधानमंत्री का प्रभुत्व तब बहुत भिन्न ढंग से काम करते हैं जब प्रधानमंत्री बहुमत दल नहीं, सहयोगियों का नेतृत्व करते हैं। यह भी लिखें कि 91वें संशोधन की सीमा इसलिए लगी कि मंत्री पद से राजनीतिक समर्थन खरीदना रोका जा सके।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ मंत्री दोनों सदनों के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी हैं | ✓ वे केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी हैं
✗ उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल निर्वाचित सांसद मतदान करते हैं | ✓ मनोनीत सदस्य भी मतदान करते हैं
✗ मंत्री नियुक्ति के समय संसद सदस्य होना ही चाहिए | ✓ वह पहले नियुक्त हो सकता है पर छह माह में सदस्य बनना होगा
एक नजर में
- अनुच्छेद 74 मंत्रिपरिषद का प्रावधान; अनुच्छेद 75 नियुक्ति और उत्तरदायित्व।
- प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, परंपरा से लोकसभा बहुमत का नेता।
- गैर-सदस्य मंत्री को छह माह में किसी सदन का सदस्य बनना होता है।
- 91वां संशोधन परिषद को लोकसभा की संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित करता है।
- परिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी; अविश्वास प्रस्ताव सबको हटाता है।
- अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री को मंत्रिमंडल और राष्ट्रपति के बीच कड़ी बनाता है।
- उपराष्ट्रपति दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं और राज्यसभा की अध्यक्षता करते हैं।
