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क्षेत्रीय आकांक्षाएं और विदेश नीति

Regional Aspirations and Foreign Policy

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NCERT Class 12 - Politics in India Since Independence, Chapters 4 and 8

क्षेत्रीय आकांक्षाएं और विदेश नीति

विविध देश के भीतर क्षेत्रों की मांगें होती हैं और बाहर प्रतिस्पर्धी शक्तियों की दुनिया। भारत की प्रतिक्रिया दोनों में एक ही सिद्धांत पर रही है - दमन के बजाय बातचीत से समायोजन, यद्यपि इसमें चूक और लंबी देरियां भी रहीं।

क्षेत्रीय आकांक्षाएं

  • क्षेत्रीय मांगें तीन व्यापक रूप लेती हैं - राज्य के दर्जे की मांग, संघ के भीतर अधिक स्वायत्तता की, और कुछ मामलों में अलगाव की, जिसकी संविधान अनुमति नहीं देता।
  • पंजाब - पंजाबी भाषी राज्य की मांग 1966 में पूरी हुई; आगे आनंदपुर साहिब प्रस्ताव की मांगों से एक दशक की हिंसा चली, जिसका समाधान 1985 के पंजाब समझौते से हुआ।
  • असम - प्रवास और पहचान को लेकर लंबा आंदोलन 1985 के असम समझौते से समाप्त हुआ।
  • पूर्वोत्तर में नगालैंड, मिजोरम और अन्यत्र आंदोलन हुए; 1986 का मिजोरम समझौता सबसे सफल समाधानों में गिना जाता है, जिसने उग्रवाद को चुनावी राजनीति में बदल दिया।
  • जम्मू-कश्मीर का 1947 के विलय के बाद से अलग राजनीतिक इतिहास रहा है, जिसमें स्वायत्तता का विवाद और बाहरी हस्तक्षेप शामिल हैं।
  • विकास और पहचान के आधार पर नए राज्य बने - 2000 में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड, तथा 2014 में तेलंगाना।
  • एनसीईआरटी का निष्कर्ष यह है कि लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाएं सामान्य हैं, और बातचीत तथा सत्ता में भागीदारी उन्हें सुलझाती है जबकि बल उन्हें केवल लंबा खींचता है।

विदेश नीति के सिद्धांत

सिद्धांतविषय
गुटनिरपेक्षताशीत युद्ध के किसी गुट में जाने के बजाय हर मुद्दे पर स्वतंत्र निर्णय
पंचशीलशांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांत, जो चीन से 1954 के समझौते में आए
उपनिवेशवाद विरोधएशिया और अफ्रीका के स्वतंत्रता आंदोलनों का समर्थन
शांतिपूर्ण समाधानबातचीत, मध्यस्थता और संयुक्त राष्ट्र को प्राथमिकता
रणनीतिक स्वायत्तताराष्ट्रीय हित के अनुसार क्षमता बनाने और साझेदार चुनने की स्वतंत्रता
  • इंडोनेशिया में हुए 1955 के बांडुंग सम्मेलन ने एशियाई और अफ्रीकी देशों को जोड़ा, और गुटनिरपेक्ष आंदोलन की औपचारिक स्थापना 1961 में बेलग्रेड में हुई।
  • गुटनिरपेक्षता तटस्थता या अलगाव नहीं थी - इसका अर्थ था हर मुद्दे पर अलग स्थिति लेना, और भारत ने विशिष्ट प्रश्नों पर प्रायः पक्ष लिया भी।

निर्णायक मोड़

  • 1962 - चीन से संघर्ष ने सहज आत्मविश्वास का दौर समाप्त किया और रक्षा तैयारी पर ध्यान दिलाया।
  • 1965 - पाकिस्तान से युद्ध, जो 1966 के ताशकंद समझौते से समाप्त हुआ।
  • 1971 - वह युद्ध जिससे बांग्लादेश बना, जिससे पहले भारत-सोवियत संधि हुई और बाद में 1972 का शिमला समझौता, जिसमें दोनों पक्षों ने विवाद द्विपक्षीय ढंग से सुलझाने का वचन दिया।
  • 1974 और 1998 - पोखरण में परमाणु परीक्षण, जिसके बाद भारत ने पहले प्रयोग न करने और न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध का सिद्धांत घोषित किया।
  • शीत युद्ध की समाप्ति के बाद विदेश नीति आर्थिक कूटनीति, सभी बड़ी शक्तियों से जुड़ाव और क्षेत्रीय समूहों की ओर मुड़ी, जबकि मार्गदर्शक विचार रणनीतिक स्वायत्तता बना रहा।

परीक्षा में कैसे आता है

तथ्यात्मक प्रश्न पूछते हैं कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना कहां हुई, कौन सा समझौता किस वर्ष हुआ, और किस समझौते ने भारत-पाकिस्तान को द्विपक्षीय समाधान से बांधा। सुमेलित कीजिए में समझौता और राज्य जुड़ते हैं। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि गुटनिरपेक्षता तटस्थता है या नहीं।

UPSC / State PSC के लिए

निबंध में तर्क दीजिए कि क्षेत्रीय समायोजन और गुटनिरपेक्षता एक ही प्रवृत्ति पर टिके हैं - बहुलता से प्रभुत्व नहीं, बातचीत से निपटना। दोनों की आलोचना भी लिखिए - समझौते प्रायः लंबी हिंसा के बाद, देर से हुए, और गुटनिरपेक्षता ने 1962 में भारत को भरोसेमंद सहयोगियों के बिना छोड़ दिया। दोनों आलोचनाएं उचित हैं और संतुलित उत्तर का हिस्सा हैं।

यहां कन्फ्यूज होते हैं

✗ गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना बांडुंग में हुई  |  ✓ बांडुंग 1955 का सम्मेलन था; आंदोलन 1961 में बेलग्रेड में बना

✗ गुटनिरपेक्षता का अर्थ हर मुद्दे पर तटस्थ रहना था  |  ✓ इसका अर्थ हर मुद्दे पर स्वतंत्र निर्णय था, तटस्थता नहीं

✗ तेलंगाना 2000 में बना  |  ✓ छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड 2000 में; तेलंगाना 2014 में बना

एक नजर में

  • क्षेत्रीय मांगें राज्य के दर्जे, स्वायत्तता या कभी-कभी अलगाव का रूप लेती हैं।
  • पंजाब और असम समझौते 1985 में; मिजोरम समझौता 1986 में हुआ।
  • छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड 2000 में और तेलंगाना 2014 में बने।
  • विदेश नीति सिद्धांत - गुटनिरपेक्षता, पंचशील, उपनिवेशवाद विरोध और शांतिपूर्ण समाधान।
  • 1955 में बांडुंग सम्मेलन; 1961 में बेलग्रेड में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना।
  • 1962 में चीन संघर्ष, 1965 और 1971 के युद्ध, और 1972 का शिमला समझौता।
  • 1974 और 1998 में पोखरण परीक्षण, उसके बाद पहले प्रयोग न करने का सिद्धांत।

अब इसी अध्याय के प्रश्न ExamAtlas मॉक टेस्ट में अभ्यास कीजिए।

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