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ग्रामीण साख और सहकारिता

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 12 • Indian Economic Development • अध्याय "Rural Development"

ग्रामीण साख और सहकारिता

कृषि में बुवाई और आय के बीच लंबा अंतराल रहता है, इसलिए किसान को बीज, उर्वरक और मजदूरी पर धन आने से महीनों पहले खर्च करना पड़ता है। इसलिए साख कृषि में विलासिता नहीं बल्कि आवश्यकता है, और जिन शर्तों पर वह मिलती है वे पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आकार देती हैं।

साख की आवश्यकता और प्रकार

  • अल्पकालिक साख एक फसल ऋतु के लिए ली जाती है, जिससे बीज, उर्वरक और मजदूरी चुकाई जाती है।
  • मध्यमकालिक साख कुछ वर्षों की होती है और औजार, पशु तथा छोटे सिंचाई कार्य में लगती है।
  • दीर्घकालिक साख कई वर्षों की होती है और भूमि, ट्रैक्टर खरीदने या कुआं बनाने में लगती है।
  • साख की आवश्यकता कम मौसम में उपभोग के लिए तथा विवाह, बीमारी और त्योहारों के लिए भी होती है।
  • स्वतंत्रता से पहले ग्रामीण साख पर साहूकार का प्रभुत्व था और वह बहुत ऊंचा ब्याज लेता था।
  • ऋण भूमि पर सुरक्षित होते थे, इसलिए चूक होने पर प्रायः किसान की भूमि ही चली जाती थी।

स्वतंत्रता के बाद संस्थागत साख

  • गांव स्तर पर मुख्य संस्थागत स्रोत के रूप में सहकारी साख समितियों को बढ़ावा मिला।
  • बैंक राष्ट्रीयकरण के बाद वाणिज्यिक बैंकों को ग्रामीण शाखाएं खोलने और प्राथमिकता क्षेत्रों को ऋण देने को कहा गया।
  • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इसलिए बनाए गए कि ग्रामीण ऋणियों को सहकारी की स्थानीय पहुंच और बैंक का अनुशासन एक साथ मिले।
  • ग्रामीण और कृषि साख के पुनर्वित्त तथा पर्यवेक्षण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था बनाई गई।
  • स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म वित्त ने बिना प्रतिभूति वालों तक, विशेषकर महिलाओं तक, साख पहुंचाई।
  • समस्याएं बनी हुई हैं: बकाया और चूक, शाखाओं का असमान फैलाव, तथा अनौपचारिक ऋण की निरंतर उपस्थिति।
  • किसान क्रेडिट कार्ड किसान को लचीली अल्पकालिक साख सीमा देता है, जो हर ऋतु नवीकृत होती है।
  • फसल बीमा फसल विफल होने पर ऋणी की रक्षा करता है, जिससे ऋण जाल नहीं बनता।
साख प्रकारअवधिसामान्य उपयोग
अल्पकालिकएक फसल ऋतुबीज, उर्वरक, मजदूरी
मध्यमकालिककुछ वर्षऔजार, पशु, छोटी सिंचाई
दीर्घकालिककई वर्षभूमि, ट्रैक्टर, कुआं

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण — वह आवश्यकता कि बैंक अपनी साख का एक निश्चित भाग कृषि और अन्य निर्दिष्ट क्षेत्रों को दें।

Exam me kaise aata hai

  • एक फसल ऋतु की साख कहलाती है — अल्पकालिक साख
  • ट्रैक्टर खरीदने की साख कहलाती है — दीर्घकालिक साख
  • ग्रामीण ऋणियों के लिए कौन से बैंक बने — क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  • कृषि को निश्चित हिस्सा देना कहलाता है — प्राथमिकता क्षेत्र ऋण

UPSC/State PSC ke liye

  • अकेली साख खेत की आय नहीं बढ़ा सकती; वह तभी काम करती है जब साथ में सुनिश्चित सिंचाई, प्रसार सलाह और चालू बाजार हों।
  • अधिक बकाया सहकारी समितियों को कमजोर करता है, क्योंकि जो समिति वसूल न कर सके वह फिर ऋण नहीं दे सकती, इसीलिए वसूली अनुशासन ग्रामीण साख के केंद्र में है।

Yahan confuse hote hain

किसानों को साख केवल आपात स्थिति में चाहिए | उन्हें हर ऋतु में नियमित कृषि खर्च के लिए चाहिए  |  

सहकारी और वाणिज्यिक बैंक साख एक ही हैं | सहकारी समितियां सदस्य स्वामित्व की हैं; वाणिज्यिक बैंक नहीं  |  

बीज खरीदने में दीर्घकालिक साख लगती है | बीज अल्पकालिक साख से खरीदा जाता है  |  

Ek nazar me

  • कृषि को साख चाहिए क्योंकि आय खर्च के महीनों बाद आती है।
  • अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक साख अलग उद्देश्यों की पूर्ति करती हैं।
  • सहकारी समितियां, राष्ट्रीयकृत बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक संस्थागत आधार हैं।
  • बकाया और अनौपचारिक ऋण मुख्य समस्याएं बनी हुई हैं।

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