संगम युग और तमिल राज्य
NCERT Class 12 - Themes in Indian History Part I, Chapter 2
संगम युग और तमिल राज्य
संगम युग, मोटे तौर पर ईस्वी की पहली तीन शताब्दियां और उससे पहले की जड़ें, तमिल इतिहास का सबसे प्रारंभिक काल है। इसकी जानकारी कवि सभाओं में रची कविताओं से और तीन राज्यों - चेर, चोल और पांड्य - से मिलती है, जिनके बंदरगाह सीधे रोम से व्यापार करते थे।
संगम साहित्य
- परंपरा तीन संगमों की बात करती है, जो पांड्य संरक्षण में मदुरै में हुए; तीसरे संगम की रचनाएं बची हैं।
- तोल्काप्पियम तमिल व्याकरण और काव्यशास्त्र का ग्रंथ है और सबसे प्राचीन उपलब्ध तमिल ग्रंथ है।
- मुख्य संग्रह हैं एट्टुत्तोगै (आठ संग्रह) और पत्तुप्पाट्टु (दस गीत)।
- तिरुवल्लुवर रचित तिरुक्कुरल, जो छोटे दोहों में नीति और राजनीति का ग्रंथ है, अठारह लघु कृतियों के समूह में आता है।
- इलंगो अडिगल का शिलप्पदिकारम और सत्तनार की मणिमेखलै जुड़वां महाकाव्य हैं, जिन्हें सामान्यतः संगम संग्रहों के बाद का माना जाता है।
- कविताएं अकम (प्रेम) और पुरम (युद्ध तथा सार्वजनिक जीवन) में बंटी हैं।
तीन राज्य
| राज्य | राजधानी | प्रमुख बंदरगाह | प्रतीक |
|---|---|---|---|
| चेर | वंजि | मुजिरिस और तोंडी | धनुष-बाण |
| चोल | उरैयूर | पुहार (कावेरीपट्टिनम) | बाघ |
| पांड्य | मदुरै | कोरकई | मछली |
- करिकाल सबसे प्रसिद्ध चोल शासक है; उसे कावेरी पर बांध बनाने और वेण्णि के युद्ध का श्रेय दिया जाता है।
- चेर शासक चेरन सेनगुट्टुवन को पत्तिनी पूजा से जोड़ा जाता है, यानी शिलप्पदिकारम की नायिका कण्णगी की पूजा।
- पांड्य क्षेत्र मन्नार की खाड़ी के मोतियों के लिए प्रसिद्ध था, जिसका उल्लेख यूनानी और रोमन लेखकों ने किया।
- राजाओं की प्रशंसा चारण करते थे; पशु छापों और युद्ध में मरे योद्धाओं के लिए वीरगाथा पत्थर (नडुकल) लगाए जाते थे।
पांच तिणै
- संगम काव्य भूमि को पांच तिणै में बांटता है, हर एक का अपना भूदृश्य, लोग और जीवन शैली।
- कुरिंजी - पहाड़, शिकार और संग्रहण; मुल्लै - चरागाह, पशुपालन।
- मरुदम - नदियों के किनारे उपजाऊ मैदान, स्थायी खेती; यहीं राज्य टिके थे।
- नेयदल - तट, मछली पकड़ना और नमक बनाना; पालै - सूखी बंजर भूमि, पशु छापे।
- यह विभाजन साहित्यिक है पर तमिल भूमि के वास्तविक पारिस्थितिक बंटवारे को दर्शाता है।
रोम से व्यापार
- यूनानी ग्रंथ पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी पश्चिमी तट के बंदरगाहों और वस्तुओं का वर्णन करता है।
- निर्यात में काली मिर्च, मोती, हाथीदांत, मलमल, मसाले और बेरिल थे; मुख्य आयात रोमन स्वर्ण सिक्के थे, जिनके भंडार दक्षिण में मिले हैं।
- पुदुच्चेरी के पास अरिकामेडु से रोमन मृद्भांड और कांच मिले हैं, जो व्यापारिक बस्ती दिखाते हैं।
- रोमन लेखक प्लिनी ने शिकायत की कि इस व्यापार से साम्राज्य का सोना बह रहा है।
परीक्षा में कैसे आता है
राज्य, राजधानी, बंदरगाह और प्रतीक का सुमेलित कीजिए लगभग निश्चित है। तथ्यात्मक प्रश्न सबसे प्राचीन तमिल ग्रंथ और तिरुक्कुरल के रचयिता पूछते हैं। कथन-आधारित प्रश्न जांचते हैं कि महाकाव्य संगम संग्रह का हिस्सा हैं या नहीं - नहीं हैं।
UPSC / State PSC के लिए
संगम समाज अभी राज्य व्यवस्था नहीं था - राजा नियमित कर के बजाय लूट, उपहार और भेंट पर निर्भर थे, और तिणै योजना राज्य-पूर्व पारिस्थितिक अर्थव्यवस्था दिखाती है। रोमन सिक्कों के भंडार प्रारंभिक हिंद महासागर व्यापार की तिथि और स्थान तय करने का मानक प्रमाण हैं।
यहां कन्फ्यूज होते हैं
✗ शिलप्पदिकारम आठ संग्रहों का हिस्सा है | ✓ यह बाद का महाकाव्य है, संगम संग्रहों से बाहर
✗ चोल का प्रतीक मछली था | ✓ चोल का प्रतीक बाघ; मछली पांड्य की
✗ तोल्काप्पियम काव्य ग्रंथ है | ✓ यह तमिल व्याकरण और काव्यशास्त्र का ग्रंथ है
एक नजर में
- संगम युग की जानकारी मदुरै में पांड्य संरक्षण में रची कविताओं से मिलती है।
- तोल्काप्पियम सबसे प्राचीन तमिल ग्रंथ; तिरुक्कुरल तिरुवल्लुवर की रचना।
- शिलप्पदिकारम और मणिमेखलै जुड़वां महाकाव्य, संगम संग्रहों से बाद के।
- चेर - वंजि, धनुष; चोल - उरैयूर, बाघ; पांड्य - मदुरै, मछली।
- पांच तिणै - कुरिंजी, मुल्लै, मरुदम, नेयदल और पालै।
- मुजिरिस और अरिकामेडु से भारी रोमन व्यापार; निर्यात काली मिर्च, मोती, मलमल।
