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अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

By ExamAtlas · 18/9/2026

NCERT कक्षा 10 • Economics • अध्याय "Sectors of the Indian Economy"

अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

आर्थिक क्रियाओं को क्षेत्रकों में बांटा जाता है ताकि उनके योगदान और समस्याओं का अलग-अलग अध्ययन हो सके। सर्वाधिक प्रयुक्त वर्गीकरण क्रिया की प्रकृति से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक में है। दो अन्य वर्गीकरण कार्य दशाओं से संगठित और असंगठित में, तथा स्वामित्व से सार्वजनिक और निजी में हैं।

प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक

  • प्राथमिक क्षेत्रक प्रकृति से सीधे वस्तुएं उत्पन्न करता है: कृषि, दुग्ध, मत्स्य, वानिकी और खनन; इसे कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रक भी कहते हैं।
  • द्वितीयक क्षेत्रक विनिर्माण द्वारा प्राकृतिक उत्पादों को अन्य रूपों में बदलता है, इसलिए इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं।
  • तृतीयक क्षेत्रक वस्तु नहीं बनाता बल्कि परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन जैसी सेवाएं देकर अन्य दोनों को सहारा देता है।
  • तृतीयक को सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं, और भारत में उत्पादन में इसका हिस्सा सबसे तेजी से बढ़ा है।
  • भारत में श्रमिकों का बड़ा भाग अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में है जबकि उत्पादन में उसका हिस्सा बहुत कम है, जो अल्प रोजगार दर्शाता है।
  • अल्प रोजगार का अर्थ है लोग काम करते दिखते हैं पर योगदान बहुत कम करते हैं; इसे छिपी बेरोजगारी भी कहते हैं।

संगठित, असंगठित, सार्वजनिक और निजी

  • संगठित क्षेत्रक में पंजीकरण, निश्चित कार्य घंटे, नियमित वेतन, अवकाश, भविष्य निधि और अन्य विधिक सुरक्षा रहती है।
  • असंगठित क्षेत्रक में छोटी बिखरी इकाइयां, कम और अनियमित वेतन, रोजगार सुरक्षा का अभाव तथा बहुत कम विधिक संरक्षण रहता है।
  • भारत के अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • सार्वजनिक क्षेत्रक का स्वामित्व और संचालन सरकार करती है, और इसका उद्देश्य जन कल्याण है, केवल लाभ नहीं।
  • निजी क्षेत्रक का स्वामित्व व्यक्तियों या कंपनियों के पास है और यह मुख्यतः लाभ से चलता है।
  • रक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आधारभूत शिक्षा जैसी अनिवार्य सेवाएं प्रायः सार्वजनिक क्षेत्रक के पास रखी जाती हैं।
  • दोनों क्षेत्रक आवश्यक हैं: सार्वजनिक क्षेत्रक बाजार की उपेक्षा भरता है और निजी क्षेत्रक कार्यकुशलता लाता है।
  • अर्थव्यवस्था के विकास के साथ श्रमिक प्राथमिक से द्वितीयक और फिर तृतीयक कार्य की ओर जाते हैं।
आधारश्रेणियांउदाहरण
क्रिया की प्रकृतिप्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयककृषि, कारखाना, बैंक
कार्य दशाएंसंगठित, असंगठितसरकारी कार्यालय, ठेला विक्रेता
स्वामित्वसार्वजनिक, निजीरेलवे, निजी दुकान

छिपी बेरोजगारी — वह स्थिति जिसमें आवश्यकता से अधिक लोग काम में लगे हों, इसलिए कुछ को हटाने पर भी उत्पादन नहीं घटेगा।

Exam me kaise aata hai

  • खनन किस क्षेत्रक में आता है — प्राथमिक
  • बैंकिंग किस क्षेत्रक में आती है — तृतीयक
  • तृतीयक क्षेत्रक का दूसरा नाम — सेवा क्षेत्रक
  • एक खेत पर आवश्यकता से अधिक लोग कहलाते हैं — छिपी बेरोजगारी

UPSC/State PSC ke liye

  • उत्पादन में घटता प्राथमिक हिस्सा पर रोजगार में बड़ा प्राथमिक हिस्सा उस संक्रमणशील अर्थव्यवस्था का शास्त्रीय लक्षण है जिसने अभी अपने श्रमिक नहीं हटाए।
  • असंगठित क्षेत्रक की सुरक्षा इसीलिए कठिन है कि इकाइयां छोटी, बिखरी और प्रायः अपंजीकृत हैं, जिससे प्रवर्तन की लागत बहुत अधिक पड़ती है।

Yahan confuse hote hain

खनन द्वितीयक क्रिया है | खनन प्राथमिक क्रिया है  |  

तृतीयक क्षेत्रक वस्तुएं बनाता है | यह सेवाएं देता है, वस्तुएं नहीं  |  

सार्वजनिक क्षेत्रक का अर्थ पब्लिक लिमिटेड कंपनी है | सार्वजनिक क्षेत्रक का अर्थ सरकारी स्वामित्व है  |  

Ek nazar me

  • क्रिया से क्षेत्रक: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक।
  • भारत में उत्पादन में तृतीयक का हिस्सा सबसे तेज बढ़ा है।
  • संगठित क्षेत्रक में सुरक्षा और लाभ; असंगठित में नहीं।
  • सार्वजनिक क्षेत्रक कल्याण; निजी क्षेत्रक लाभ का लक्ष्य रखता है।

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